Ashok Vatika Research Centre

Ashok Vatika Research Centre Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Ashok Vatika Research Centre, Kotra, Bhopal.

आपको इस पेज पर झाड़ीदार, लताओं वाले और खूबसूरत पेड़ो के बारे में। फल, फूल और सजावटी पौधों के बारे में, बोनसाई पौधों के बारे में, एवं उनपर किए अनुप्रयोगों के बारे में, तथा उनके रख रखाव से संबंधित जानकारी, फोटो और वीडियो के द्वारा आप तक पहुंचाने का माध्यम🙏

दोस्तों इस खूबसूरत पौधे को आपने देखा ही होगा, हर गांव, गली मुहल्ले में दिख जाता है। हम 90 के दशक के लोगो का जीवन रहन सहन...
26/06/2026

दोस्तों इस खूबसूरत पौधे को आपने देखा ही होगा, हर गांव, गली मुहल्ले में दिख जाता है। हम 90 के दशक के लोगो का जीवन रहन सहन बिल्कुल ही अलग था, आज से। इस पौधे को देख कर मैं अपने बचपन की यादों में लौट जाता हूँ, बहुत भावनात्मक जुड़ाव हैं इससे , इसी लिए इस पौधे को मैंने खरीद कर पिछले साल बरसात के मौसम में घर के सामने सड़क के किनारे लगा दिया था, देखिये एक साल से भी कम समय में यह कितना बड़ा और खूबसूरत हो चूका हैं, कितने ज्यादा फूल आना शुरू हो चुके हैं। इसी पोस्ट में इस पौधे से जुड़े सभी बातें रखूँगा। इसकी देखभाल से जुडी जानकारिया भी आप पढ़ेंगे।

मेरी माता जी को पूजा करनी होती थी, और मुझे लगता हैं गांव में सभी घरो कि महिलाएं प्रति दिन पूजा पाठ करती थी, और फूल लाने कि जिम्मेदारी हम बच्चों की थी। तब उम्र आठ दस साल रही होगी, सभी पडोसी बच्चे, आस पास के घरों, डेरों पर लगे फूलों को तोड़ने निकल जाते थे, कई महिलाएं भी फूल तोड़ने जाती थी। सबको पता होता था की कहाँ कहाँ फूल वाले पौधे लगे हैं , और जैसे ही नींद खुलती हम भागते थे। कही सारे फूल ख़त्म न हो जाये यह एक टेंशन रहा करती थी। अधिकतर फूलों वाले पेड़ छोटे रहा करते थे, जैसे गेंदा, गुड़हल (हमारे यहाँ अढ़उल कहा जाता हैं ), धतूरा, अपराजिता, गंधराज, केली, चांदनी के फूल प्रमुख थे। लेकिन फूलों के पौधे लगाने का शौक बहुत ही कम लोगो में था। आज भी वैसा ही हैं। लेकिन ठाकुर जी की मठिया पर कई सारे बड़े पेड़ होते थे कनेर के। वह यही पौधा था, जिसकी फोटो मैंने लगायी हैं। हमारे यहाँ उत्तर प्रदेश बलिया में इसे कैनेला कहा जाता हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Nerium oleander है। इसे भगवान शिव को अर्पित करने की परंपरा भी है.

सुबह के तीन चार बजे घना अँधेरा होता था, और इसी समय को ब्रम्ह मुहूर्त कहा जाता हैं, और गांव में यह समय सभी के उठने का सामान्य समय होता था। अँधेरे में टोर्च हमारा सबसे बड़ा हथियार होता था। मठिआ पर जहाँ ये पेड़ उगे होते थे वहां जंगल था, सांप बिच्छू का खतरा भी होता था, हम टोर्च लेकर जाते थे, घने अँधेरे में टोर्च की रौशनी में फूल खोजना, ताजे फूलों की पहचान करना भी अपने आप में एक टैलेंट था। सारे फूल ख़त्म हो जाते थे लेकिन कनैला के कुछ फूल बच जाते थे, क्यूंकि इसके बड़े बड़े पेड़ भी हुआ करते थे, और सभी लोग ऊपर के फूलों तक नहीं पहुंच पाते थे। कुछ लोग जिसमे हम भी थे, पेड़ पर चढ़ कर तोड़ लेते थे। फूल मिल जाना एक बड़ा अचीवमेंट से कम नहीं होता था। और यह प्रतिदिन का पहला काम होता था।

अब जब भी मैं इस पौधे को देखता हूँ तो उन्ही ख्वाबो में खो जाता हूँ। और इस पौधे से खासा जुड़ाव मह्सुश करता हूँ , और इसी लिए मैंने इस पौधे को लेकर लगा दिया हैं अपने गार्डन में। भोपाल में सड़को पर मिटटी नहीं होता हैं, आप यदि इस क्षेत्र से जुड़े होंगे तो जानते होंगे की यहाँ सडकों और घरो को बनाते समय मिटटी नहीं कोपरा भरा जाता हैं, कोपरा पहाड़ों को काट कर आता हैं, जिसमे मिटटी कम पत्थर ज्यादा होते हैं। सरकार द्वारा इनके खनन पर प्रतिबन्ध हैं, लेकिन सिर्फ कागजों पर। तो सड़क के किनारो पत्थरों पर थोड़ी सी रेतीली पथरीली मिटटी होती हैं, वहां से थोड़े पत्थर हटा कर मिटटी भरकर मैंने इस पौधे को लगा दिया था, मतलब यह हैं की पत्थरों पर, पथरीली मिटटी में जिसमे पोषक तत्वों की काफी कमी होगी उसमे भी यह पौधा आसानी से जीवित रह सकता हैं।

गर्मियों में इसको मैं बराबर पानी डालता रहा, खाद बिलकुल भी नहीं। यह मिटटी में उपस्थित पोषक तत्वों में भी अपना बराबर विकास कर लेता हैं। लेकिन यदि आप इसे गोबर कि खाद या वर्मी कम्पोस्ट देते हैं तो इसकी ताकत कई गुना बढ़ जाएगी और बहुत तेजी से यह विकसित होगा। प्रत्येक तीन महीने में इसके मिटटी कि गुड़ाई करके सड़े हुए गोबर कि खाद या वर्मी कम्पोस्ट इसकी जड़ों में डालना चाहिए। खाद कि मात्रा पौधे की आकार के हिसाब से तय करना पड़ता हैं। कनैला की यह खूबसूरती हैं कि इसको बहुत अधिक पानी नहीं चाहिए होता हैं, कम पानी में भी यह जीवित रह सकता हैं, इसलिए सड़को के किनारे डिवाइडरों पर इसके पौधे लगाए जाते हैं।

आप सभी इस पौधे से परिचित तो होंगे ही कि इसके फूल पूजा पाठ में प्रयोग किये जाते हैं। पीले , सफ़ेद और हल्का गुलाबी रंग के भी इसके फूल खिलते हैं, और काफी पसंद किये जाते हैं। लेकिन पीले फूलों कि बात अलग ही हैं। सबसे खूबसूरत और मनमोहक लगते हैं।

इसके फल जहरीले माने जाते हैं। इसके दूध आँखों में पड़ जाये तो ऑंखें ख़राब हो जाती हैं। इसलिए यह हमें बचपन इसके फलों और दूध के बारे में आगाह किया जाता था। डराया जाता था। और आपके आस पास भी यह पौधा हैं तो खुद भी सतर्क रहें और अपने बच्चों को भी इसके बारे में जरूर बताएं, जिससे वे भी सावधान रहें।

दोस्तों इसमें फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स, टैनिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कनेर के फूलों को पीसकर त्वचा पर लगाने से फोड़े-फुंसी, दाने और संक्रमण से राहत मिलती है. इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं.

बवासीर की समस्या में कनेर के फूलों का सेवन फायदेमंद साबित होता है. इसके फूलों का रस सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है.

कनेर के फूलों से बना तेल बालों की जड़ों को मजबूत करता है और डैंड्रफ को दूर करने में सहायक होता है. बल्कि आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी जाना जाता है.

कनेर के फूलों का तेल या पेस्ट जोड़ो और मांसपेशियों के दर्द में लगाने से सूजन कम होती है और दर्द से छुटकारा मिलता है

क्या आपके जिंदगी में पौधों से भावनात्मक जुड़ाव के कोई किस्से हैं, तो आप हमारे साथ साझा कर सकते हैं। पेड़ पौधों हमारे अभिन्न अंग होते हैं , मेरा आपसे अनुरोध हैं की जितना ज्यादा संभव हो उतने ही ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं। आपने इस लेख को इतने प्यार से अंत तक पढ़ा इसके लिए आपको तहे दिल से धन्यवाद। आभार।


24/06/2026

ओवरब्रिज की दीवार पर उगा ये 🌱 फाइकस… और आज बन गया मेरे गार्डन का हिस्सा ❤️

दोस्तों, प्रकृति सच में कमाल करती है! बिना मिट्टी के, सिर्फ थोड़ी सी नमी में भी ये पौधा इतनी गर्मी में भी हरा-भरा रहा 🌿
लेकिन इसकी जड़ें इतनी ताकतवर होती हैं कि सीमेंट की दीवार भी फाड़ देती हैं 😲

मैं इसे जड़ से नहीं निकाल पाया, लेकिन इसकी कटिंग्स लेकर आ गया… और अब इन छोटी-छोटी डालियों से बनेंगे ढेर सारे नए पौधे 🌱✨

फाइकस की खास बात 👉 कटिंग से बहुत आसानी से उग जाता है और सर्वाइवल रेट भी बहुत ज्यादा होता है 💯

आप भी ट्राय करें और अपने गार्डन को हरियाली से भर दें 💚

और बताइए कमेंट में – क्या आपने कभी कटिंग से पौधे उगाए हैं? 👇

दोस्तों आज मैं ऑफिस में लंच के बाद मैं गेट से बाहर चला गया, वहां एक बड़ा खड़ा पहाड़ है, वहीं ढेर सारे पेड़ लगे हुए हैं। ...
24/06/2026

दोस्तों आज मैं ऑफिस में लंच के बाद मैं गेट से बाहर चला गया, वहां एक बड़ा खड़ा पहाड़ है, वहीं ढेर सारे पेड़ लगे हुए हैं। उनमें से सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे मै अपने सहकर्मियों के साथ खड़ा था, अचानक मेरी नजर इन बीजों पर पड़ी, तो मैने इन्हें वहां से उठा लिया, और अपने साथियों से इस बीज की पहचान पूछी, लेकिन उनमें से किसी एक को भी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी, फिर मैने सोचा कि अधिकतर ज़ेन जी हैं, किसी बड़े से पूछा जाए, तो मैने एक 50 की उम्र के सहकर्मी है उनसे पूछा और कमाल की बात है कि उन्हें भी नहीं मालूम था। इससे मुझे यह समझ आ रहा है कि लोगों का जमीन से जुड़ाव कितना कम हुआ है, पर्यावरण से अलगाव कितना अधिक हो गया है। यह बेहद चिंता जनक है। मेरा ऐसे पोस्ट को डालना नई पीढ़ी में पेड़ पौधों की जानकारियों को बढ़ाने के साथ पेड़ पौधों के बारे में रूचि पैदा करना है।

मुझे मालूम है कि सबको इन सवालों के जवाब नहीं मालूम होंगे, इसलिए मैं चाहता हूं कि लोग इस पोस्ट को पढ़े, और कमेंट के माध्यम से आप दोस्तो द्वारा दी गई जानकारियों को पढ़ कर अपना ज्ञानवर्धन करें। इसलिए आप साथियों से निवेदन है कि इस बीज के साथ साथ इसके पौधे के बारे में भी अपनी जानकारियों को साझा करें।

आपके लिए एक संकेत है कि इस बीज़ से तेल निकाला जाता है, जो कि खाने योग्य होता है और लोग खाने में प्रयोग करते हैं। दूसरा इसके फूलों से शराब बनती है।

अब देखते हैं कितने लोग इसका सही सही जवाब दे पाते हैं।

23/06/2026

मानसून सीज़न चल रहा है, ऐसे में सांप का दिख जाना आम बात है। हमे सांप को हर संभव कोशिश कर बचाना चाहिए, क्योंकि पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए जैव विविधता का होना अनिवार्य है और इस कड़ी में हमे सांपों को बचाना चाहिए। ऐसे भी ये निरपराधी और मासूम होते है, इन्हें मारना अक्षम पाप है। इनसे बचाव जरूरी है। फोरेट का छिड़काव अपने गार्डन में हर सप्ताह करें। फोरेट की तेज गंध से सांप दूर रहते हैं।

दोस्तों कल रात में ये भाईसाब घर के सामने सड़क पर दिख गए । जब ये घर के आस पास दिख जाएं,तो ऐसे में लोग दो काम करते है, एक इ...
23/06/2026

दोस्तों कल रात में ये भाईसाब घर के सामने सड़क पर दिख गए । जब ये घर के आस पास दिख जाएं,तो ऐसे में लोग दो काम करते है, एक इन्हें मार देते है, जो सबसे आसान काम है, और दूसरा इन्हें पकड़ कर छोड़ देना।जो सबके लिए थोड़ा मुश्किल होता है, किसी स्नेक रेस्क्यूर को बुलाना और तब तक कई बार ये छिप भी जाते हैं।

जब आप पेड़ पौधों के शौकीन होते है, हर कही ढेर सारे पेड़ पौधे लगाते रहते हैं तब घर को भी एक एक छोटा जंगल बना ही देते है, तो बरसात के मौसम में उमस के कारण ये सांप बाहर निकलते है, दूसरा इनके प्रजनन और अंडे देने का समय होता है तो यह ज्यादा एक्टिव रहते हैं, रात में मेढक और कीट पतंगों को खाने के लिए भी निकलते हैं, जिन जगहों पर ये रहते है उन बिलों के पानी भर जाती है तो सुरक्षित जगह ढूंढने के लिए भी निकलते है और आपके पेड़ पौधे उन्हें छिपने के लिए पर्याप्त जगह दे देते हैं।तो जितना संभव हो साफ सफाई बना कर रखें।

मुझे सांप बहुत ही प्यारे और मासूम लगते हैं। अगर अपने अबोध बच्चों पर पूरा भरोसा नहीं होता तो मैं इन्हें छोड़ देता वैसे ही टहलने के लिए, लेकिन मेरे दोनों खतरनाक बच्चों पर पूरा यकीन है कि वे इसे पकड़ कर खेलने लगते, तो मेरे लिए अपने घर के आस पास से दूर इन बेजुबानों को करना ही पड़ता है।

स्नेक रेस्क्यूर ने हमे काफी जागरूक और समझदार बना दिया है। अब हम बिना डर के सांपों को बचा सकते है, कुछ सावधानियां बरत कर, कुछ उनके द्वारा सिखाई गई तरकीबें अपना कर, सांपों को रेस्क्यू किया जा सकता है। यदि हम करतब न दिखलाएं तो। तो मैं इन स्नेक रेस्क्यूर्स को सलाम करता हूं। ये बेजुबान प्रकृति के लिए भी अहम है, जो पर्यावरण में जैविक विविधता और संतुलन बनाने के लिए सबसे अहम है।

अब ऑफिस से आकर, कार पार्किंग की तरफ बढ़ाने ही वाला था कि इस भाई साहब पर नजर पड़ी। मैने कार रोकी। और इन्हें पकड़ने के लिए एक सूती की बोरी और एक प्लास्टिक की बॉटल मंगाया। चूंकि मुझे नहीं मालूम था कि यह जहरीला है या नहीं। मै कोई शर्प विशेषज्ञ तो हूं नहीं। लेकिन मेरे घर के आस पास जो सांप निकलते है वे अक्सर कॉमन करैत ही निकलते हैं जो कि भारत का सबसे जहरीला सांप होता है। पहली नजर में यह भाई साब मुझे कॉमन करैत ही लगे।

जब मैने इन्हें पकड़ लिया और ध्यान से देखा तो यह थोड़ा अलग लगा, कॉमन करैत अधिकतर काले रंगकर होते हैं और उसपर सफेद रंग की धारियां होती है, ठीक इसी सांप की तरह। बस रंगों का अंतर है, इसके रंग धूसर भूरे या हल्का भूरा था और काली धारियां बनी हुई थी। तो सबसे पहले मैने इसकी फोटो खींची और ए आई से इसकी जानकारी पूछी। ढेर सारी लिंक्स से जानकारी इकट्ठा किया, मैनुअली फोटोज को मैच किया, और अंत में जब पुख्ता तौर पर यकीन हो गया कि यह कॉमन करैत नहीं कॉमन कुकरी सांप है, जो कि बिल्कुल भी जहरीला नहीं होता। तब मैने इसे बोतल में डाल दिया। और फिर इसकी एक वीडियो भी शूट किया जिसे आपको दिखा सकूं और अपने परिचित, पड़ोसियों और मित्र लोगों को भी थोड़ा जागरूक कर सकूं। वीडियो भी जल्द ही इस पेज पर भी प्रकाशित करूंगा।

दोस्तों आप सप्ताह में एक बार फोरेट का छिड़काव अपने गार्डन के आस पास जरूर करें। इस कीटनाशक के गंध से सांप भागते है।

आप दोस्तो का इस पर क्या राय, विचार, एवं सुझाव है, कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताएं। आप सभी प्रिय मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

21/06/2026

पीपल के पौधे की बोनसाई बनाने की शुरुआत कैसे करें? पीपल के पौधे के बारे में थोड़ी जानकारी साझा किया हूं, कुछ अपने अनुभव और कुछ अपने प्रयोगों को आपके साथ साझा किया हूं। उम्मीद है यह वीडियो आपके लिए उपयोगी होगी। वीडियो पसंद आये तो लाइक और शेयर जरूर करें। अपने सवाल और सुझाव कमेंट में लिखें। आप सभी प्रिय मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

20/06/2026

Look at these beautiful plants! See how I’ve potted and cared for them. Aren’t they looking amazing? All of these are indoor plants.

दोस्तों कुछ दिन पहले एक पोस्ट डाला था, जिसमें मैंने एक फोटो पोस्ट करी थी, उसमे एक पौधे कि फोटो थी, उस पौधे का नाम मैं जा...
19/06/2026

दोस्तों कुछ दिन पहले एक पोस्ट डाला था, जिसमें मैंने एक फोटो पोस्ट करी थी, उसमे एक पौधे कि फोटो थी, उस पौधे का नाम मैं जानना चाह रहा था, लेकिन अभी तक मैं खाली हाथ हूँ। एक भी व्यक्ति ने अभी तक सही जबाब नहीं दिया है, आज मैं इस पौधे का नाम जानने कि फिर कोशिश करता हूँ।

पिछली बार जो सबसे ज्यादा जबाब मिले थे, 90 प्रतिशत से ज्यादा नाम था पिलखन या पाकड़ का, जो कि बिलकुल ही गलत जबाब था। जो अधिकतर उत्तर मिले थे उनमे बरगद, पीपल, पाकड़, और पारस पीपल प्रमुख थे। इसलिए मैं उस फोटो के साथ इन चार प्रमुख पौधों कि फोटो लगा रहा हूँ, जिससे आप ज्यादा भ्रम में न पड़ें, पत्तों कि स्पष्टता से पहचान कर पाएंगे, और पौधे कि पहचान बताने में अपना योगदान देंगे। मेरा भी ज्ञानवर्धन होगा। जो साथी इस पोस्ट से जुड़ेंगे उनका भी ज्ञानवर्धन होगा। सबसे ज्यादा मुझे इस पौधे का नाम जान कर ख़ुशी होगी क्यूंकि मेरे मन में इसका नाम जानने कि प्रबल उत्सुकता है। आप सभी गूगल कर, या किसी व्यक्ति से पूछ कर भी बता कर मेरी मदद कर सकते हैं।

आम और जामुन भी कुछ लोगों ने लिखा था, जो बिलकुल गलत जबाब था। आप सभी की कोशिशों कि मैं तहे दिल से सराहना करता हूँ, लेकिन जब तक सही, संतोष जनक उत्तर प्राप्त नहीं हो जायेगा, तब तक संतुष्टि मुझे मिलेगी नहीं। देखते हैं कौन इसका सही जबाब ढूंढ पाता है।

आप सभी प्रिय मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद ! नमस्कार।

18/06/2026

सबसे बड़ा सवाल 🤔 — पौधों को सही तरीके से रिपोट कैसे करें कि वो सूखें नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ें? 🌱

इस वीडियो में आपको मिलेगा पूरा स्टेप-बाय-स्टेप समाधान 💯
और अंत में एक खास सीक्रेट टिप भी है जो आपके पौधे की ग्रोथ को दोगुना कर सकती है 🔥

यह है हारश्रृंगार (पारिजात) का पौधा 🌼
गलत पॉट और गलत समय पर रिपोटिंग से पौधे सूख सकते हैं 😔
लेकिन सही तरीका अपनाकर आप इन्हें और हेल्दी बना सकते हैं 💚

अगर आप भी अपने पौधों को तेजी से बढ़ाना चाहते हैं तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखें 👇

The biggest question 🤔 — How to repot a plant the right way so it doesn’t die, but grows faster? 🌱

In this video, you’ll get a complete step-by-step solution 💯
Plus, there’s a special secret tip at the end that can boost your plant’s growth 🔥

This is a Harshringar (Parijat) plant 🌼
Using the wrong pot or repotting at the wrong time can damage your plant 😔
But with the right method, you can make it healthier and stronger 💚

If you want faster plant growth, watch till the end 👇

दोस्तों एक मेरे फेसबुक पोस्ट पर हमारे फेसबुक परिवार की एक सदस्य ने कुछ ऐसा कॉमेंट किया कि मुझे वो बात बड़ी वाजिब लगी, जि...
18/06/2026

दोस्तों एक मेरे फेसबुक पोस्ट पर हमारे फेसबुक परिवार की एक सदस्य ने कुछ ऐसा कॉमेंट किया कि मुझे वो बात बड़ी वाजिब लगी, जिसके बारे में चर्चा करना आवश्यक लगा। क्योंकि यह सिर्फ उनकी अपनी बात नहीं है ये एक सामाजिक मिथक है जो आम जनमानस के मन में घर कर चुका है। आपको अनेको ऐसे लोग मिल जायेंगे जो इस प्रकार की या ऐसी बातें कहेंगे।

मेरे खुद के घर पर जब मैं छोटा था, लगभग 19 - 20 साल का, मैने ढेर सारे कैक्टस, अनेकों प्रजातियों के बहुत ही खूबसूरत कैक्टस थे, बहुत जुगाड़ से उनका संकलन तैयार किया था, घर के सामने लगा दिया था। घर वालों ने उसे उखाड़ कर फेंक दिया। कहने लगे इससे घर में हानी होगी, अशुभ है।जबकि दो तीन पेड़ छत पर लगाए थे वो उनकी नजर से बच गया था।

कई लोग मुझसे मिलते है कहते है कि बरगद, पीपल, कैक्टस छत पर, या घर के आस पास भी मत लगाइए। आपमें से कई साथी भी ऐसा विचार रखते होंगे। पर क्या सिर्फ़ इतना ही सच है जैसा कमेंट के स्क्रीनशॉट में लिखा हुआ है? आइए इसपर मैं अपनी राय एक एक कर रख रहा हूं, जिससे शायद कुछ तस्वीर साफ हो।

1. जो पौधे हमे ऑक्सीजन देते हैं, सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देते है, जो प्राण वायु देते है, जिसके बगैर जीवों की कल्पना इस धरा पर मुमकिन नहीं, उसे हम कैसे फेंक दें?
2. दूसरी बात यह कि भूत रहते हैं इन पौधों पर! मैने अपने जीवन काल में कभी भूत नहीं देखे। मै उत्तर प्रदेश के एक ग्रामीण परिवेश में पला बढ़ा हूं । जहां भूतों की कहानियां सुनते हुए बचपन बीता है, लेकिन कभी भूत से मुलाकात नहीं हो पायी। मै कई बार अपने युवा अवस्था में भूतों की पड़ताल करने रात के हर प्रहरों में बगीचे में चला जाता था, जहां मुर्दे जलाए जाते थे, जहां कब्रगाह थी, वहाँ जाकर रात के अंधेरे में, अकेले रात के 12 बजे, एक बजे , 2 बजे , 3 बजे और चार बजे यानी की अलग अलग दिन, अलग अलग समय पर भूतों का आह्वाहन भी करता था, लेकिन कभी भी मुझे भूत, पिशाच, डायन, शैतान नहीं मिले। पानी में घंटों तैरता था, लोग कहते थे कि पानी में भी भूत होते है जो डूबा देते है, कभी नहीं मिले।

मुझे लगता है कि यह सब कहानियां लोगों को डरा कर सुनसान जगहों पर जाने से रोकने के लिए थी। बाग़ बगीचों में जहां किसी के साथ गलत घटना हो सकने की संभावना होती थी, वहां ज्यादातर भूत पाए जाते थे। रात में भूतों की शक्ति ज्यादा तेज होती थी, क्योंकि रात में गलत घटनाएं ज्यादा होने की संभावना रहती थी। पानी में लोग डूब न जाएं इस लिए पानी के भूतों की कल्पनाएं की गई थी। हमारे यहां उन्हें बुडुवा कहा जाता था।

3. अब आते हैं उस विषय पर जिसमें कहा गया है कि घर में फ़ाइकस की किसी भी वैराइटी के पौधे नहीं लगाने चाहिए, उनमें बरगद, पीपल, और पाकड़ भी शामिल है। मुझे लगता है कि इसको इस लिए घर में लगाना अशुभ कहा गया होगा क्योंकि इस प्रजाति के पौधे अनियंत्रित गति से बढ़ते हैं। ये किसी भी परिस्थित में जीवित रह लेते हैं। यहां तक कि थोड़ी सी इसकी जड़ काट कर भी लगा दें तो यह फिर से एक नया पौधा बन जाता है। और यह इतना विशालकाय रूप लेता है, इसकी जड़ों से लेकर तने तक कि आप रोक ही नहीं पाते और यह घर की मजबूत से मजबूत दीवालों को फाड़ देता है। जहां यह लग जाता है इसको हटाना बहुत कठिन हो जाता है, इसलिए ऐसा कहा गया होगा।

भगवान कृष्ण ने भागवत गीता में कहा है कि वृक्षों में मै पीपल हूं। यदि यह इतना अशुभ है तो भगवान कृष्ण ने ऐसा क्यों कहा होगा? भगवान बुद्ध को पीपल के वृक्ष के नीचे ही परम ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह चौबीसों घंटे ऑक्सीजन देने वाले पौधे अपशगुन कैसे?

5. अगली बात जो कमेंट में कहा गया है कि मंदिर के पास लगा देना चाहिए। मंदिर ही क्यों हर सार्वजनिक जगह पर पहले लगाया जाता था, और उन विशाल वृक्षों के नीचे लोग गर्मी की दोपहरिया से लेकर रात तक विश्राम करते थे, सोते थे। आज भी जहाँ है वहां लोग इसका भारी लाभ लोग लेते हैं। आज भी मै जाता हूं तो गांव के शिवाले पर बरगद और पीपल के साझे वृक्ष के नीचे लोगों को आराम करते सोते हुए देखता हूं।

अब मैं जो कह रहा हूं वह यह है कि आप इसे गमले में लगाए, जिससे यह नियंत्रण में रहेगा। मै एक सफल जीवन जी रहा हूं। सभी संसाधनों से भरी हंसी खुशी अपने परिवार के साथ रह रहा हूं और मेरे छत पर पीपल, बरगद, कैक्टस के अनेकों पौधे लगे हुए है। फिर मेरे लिए ये कभी अशुभ क्यों नहीं हुए?

शायद आप मेरे द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से सहमत होंगे। आपके क्या विचार है इस विषय पर कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं। आप सभी प्रिय मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

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