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बिहार के सारण के अंकित कुमार ने 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में 333वीं रैंक के साथ डीएसपी (DSP) का पद हासिल किया है। प...
10/08/2026

बिहार के सारण के अंकित कुमार ने 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में 333वीं रैंक के साथ डीएसपी (DSP) का पद हासिल किया है। पैसों की कमी के कारण वे कभी बड़े शहर या महंगी कोचिंग में नहीं जा सके।

उन्होंने अपने गांव में ही फूस का एक साधारण कोचिंग सेंटर बनाया, जहां वे 10 सालों तक बच्चों को पढ़ाते रहे। अंकित दिन में पढ़ाते थे और रात में अपनी पढ़ाई करते थे। उन्होंने सिर्फ सेल्फ-स्टडी और पुराने प्रश्नपत्रों के जरिए घर पर ही तैयारी कर यह सफलता पाई है।

अंकित ने ग्रामीण छात्रों को संदेश दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही रणनीति और कड़ी मेहनत से गांव में रहकर भी बड़ी परीक्षा पास की जा सकती है।

गाजियाबाद के मोदीनगर (गांव अबूपुर) की रहने वाली 15 साल की खुशी चौधरी हरिद्वार से 61 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल लौटी...
10/08/2026

गाजियाबाद के मोदीनगर (गांव अबूपुर) की रहने वाली 15 साल की खुशी चौधरी हरिद्वार से 61 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल लौटीं। रविवार दोपहर जब वह मोदीनगर के मोदी मंदिर के पास पहुंचीं, तो स्थानीय लोगों ने उन पर फूल बरसाकर उनका जोरदार स्वागत किया।

इतनी कम उम्र में भारी कांवड़ लेकर आने पर भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने उन्हें सम्मानित किया। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगेराम त्यागी ने खुशी चौधरी को उपहार स्वरूप एक स्कूटी भेंट की। त्यागी ने कहा कि खुशी ने यह साबित कर दिया है कि श्रद्धा और हौसले के आगे उम्र कोई मायने नहीं रखती। नई स्कूटी पाकर खुशी बेहद प्रसन्न दिखीं।

बिहार के पटना निवासी उज्जवल प्रियांक ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 10वीं रैंक (AIR 10) हासिल कर IAS का प...
10/08/2026

बिहार के पटना निवासी उज्जवल प्रियांक ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 10वीं रैंक (AIR 10) हासिल कर IAS का पद प्राप्त किया है। पिता के अलग रहने के कारण उनका पालन-पोषण उनकी मां ने किया और इस दौरान परिवार को कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

12वीं कक्षा में 96% अंक प्राप्त करने के बाद, उज्जवल ने स्कॉलरशिप के माध्यम से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। UPSC की तैयारी के लिए उन्होंने दिल्ली जाने या महंगी कोचिंग लेने के बजाय घर पर रहकर यूट्यूब और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज का सहारा लिया।

अपने पहले प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन उनका अंतिम चयन नहीं हुआ, जबकि दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाए। लगातार असफलताओं के बाद जब वे निराश थे, तब उनकी मां ने उनसे पूछा, "तुम रो क्यों नहीं रहे हो?" इस सवाल ने उन्हें दोगुनी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। आखिरकार, ऑनलाइन सेल्फ-स्टडी के दम पर उज्जवल ने अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया।

रविवार को यूपी के मेरठ स्थित सिवाया गांव में 40 वर्षीय मुस्लिम युवक निजाम का हार्ट अटैक से निधन हो गया। शव को दफनाने के ...
10/08/2026

रविवार को यूपी के मेरठ स्थित सिवाया गांव में 40 वर्षीय मुस्लिम युवक निजाम का हार्ट अटैक से निधन हो गया। शव को दफनाने के लिए परिजनों को दिल्ली-देहरादून हाईवे पार करके कब्रिस्तान जाना था। उस समय हाईवे पर कांवड़ यात्रा के कारण हजारों शिवभक्तों की भारी भीड़ थी।

पुलिस की मौजूदगी में जब जनाजा हाईवे के पास पहुंचा, तो कुछ कांवड़ियों ने खुद कमान संभाली। उन्होंने तुरंत मानव श्रृंखला बनाई और हजारों कांवड़ियों की भीड़ को रोककर जनाजे को सुरक्षित रास्ता दिया। पूरा जनाजा सम्मानपूर्वक हाईवे पार करने के बाद ही कांवड़ियों ने अपनी आगे की यात्रा शुरू की।

आजमगढ़ के लालपुर गौहर गांव के रहने वाले आदित्य सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में 508वीं अखिल भारतीय रैंक हासि...
10/08/2026

आजमगढ़ के लालपुर गौहर गांव के रहने वाले आदित्य सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में 508वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की है। उन्होंने हिंदी मीडियम से अपने दूसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। आदित्य एक साधारण परिवार से आते हैं; उनके पिता एक किसान और मां गृहणी हैं।

आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे शुरुआत में दिल्ली के बजाय प्रयागराज गए। वहां उन्होंने अपनी तैयारी शुरू की। उनके कमरे से कोचिंग सेंटर 7 किलोमीटर दूर था, जहां वे रोजाना साइकिल से जाते थे। उन्होंने प्रतिदिन 8 से 9 घंटे पढ़ाई की।

अपने लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने कई वर्षों तक होली-दिवाली जैसे त्योहारों पर भी घर जाना छोड़ दिया था। साल 2024 में अपने पहले प्रयास में प्रीलिम्स पास करने के बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और अपनी पिछली कमियों को सुधार कर यह मुकाम हासिल किया। गांव की समस्याओं और बुनियादी ढांचे की कमी ने ही उन्हें एक सिविल सेवक बनने के लिए प्रेरित किया था।

महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले शरण कांबले ने बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आते हुए लगातार तीन बार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ...
10/08/2026

महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले शरण कांबले ने बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आते हुए लगातार तीन बार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की है। उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर थे और उनकी मां परिवार चलाने के लिए सब्जियां बेचती थीं।

आईआईएससी (IISc) से पोस्टग्रेजुएशन करने के बाद, शरण को 20 लाख रुपये के सालाना पैकेज वाली नौकरी का ऑफर मिला था। सिविल सेवा में जाने के लक्ष्य के कारण उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया।

शरण ने 2019 में UPSC CAPF परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल की। इसके बाद 2020 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में AIR 542 लाकर आईपीएस (IPS) के लिए चुने गए। उन्होंने 2021 में फिर परीक्षा दी और AIR 127 हासिल कर आईएफएस (IFS) कैडर के लिए चुने गए, लेकिन उन्होंने आईपीएस के रूप में ही अपनी सेवा जारी रखने का फैसला किया। वर्तमान में वे राजस्थान कैडर में एक IPS अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में एक बुजुर्ग महिला बेसहारा जीवन बिताने को मजबूर हैं। उनके जीवन में दो शादियां हु...
08/08/2026

हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में एक बुजुर्ग महिला बेसहारा जीवन बिताने को मजबूर हैं। उनके जीवन में दो शादियां हुईं, लेकिन उनके दोनों पतियों का निधन हो चुका है। महिला के पास करीब 40 लाख रुपये की जमा पूंजी है। भारी भरकम बैंक बैलेंस होने के बावजूद उनका ठिकाना अपना घर नहीं, बल्कि वृद्धाश्रम है।

बुजुर्ग महिला के अनुसार, उनका बेटा उन्हें अपने साथ नहीं रखना चाहता था। बेटे द्वारा साथ रखने से इनकार करने के कारण उन्हें मजबूरन वृद्धाश्रम में शरण लेनी पड़ी और अकेलेपन का सामना करना पड़ रहा है।

बेटे की इस बेरुखी के बावजूद महिला के दिल में उसके प्रति ममता बरकरार है। महिला ने स्पष्ट किया है कि उनके निधन के बाद उनकी पूरी 40 लाख रुपये की संपत्ति और जमा पूंजी उनके उसी बेटे को मिलेगी, जिसने उन्हें वृद्धाश्रम भेजा है।

दिल्ली की रहने वाली सौम्या शर्मा ने 2017 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासि...
08/08/2026

दिल्ली की रहने वाली सौम्या शर्मा ने 2017 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल की। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी सुनने की क्षमता पूरी तरह से खो दी थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और नेशनल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई पूरी की।

सौम्या ने UPSC की तैयारी के लिए केवल चार महीने का समय दिया। उन्होंने कोचिंग लेने के बजाय रोजाना 10 से 15 घंटे सेल्फ-स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया। मुख्य परीक्षा के दौरान वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं थीं, जिसके कारण उन्हें एक दिन में तीन बार सलाइन (ड्रिप) तक चढ़ानी पड़ी थी। इतनी खराब स्वास्थ्य स्थितियों के बावजूद उन्होंने परीक्षा बीच में नहीं छोड़ी। पेशे से डॉक्टर माता-पिता की बेटी सौम्या ने यह बड़ी उपलब्धि अपने मजबूत संकल्प और निरंतर अध्ययन के दम पर हासिल की है।

महाराष्ट्र के वाशिम में बस कंडक्टर राजू वाणी ने एक बुजुर्ग महिला को उनके 24,000 रुपये दो साल बाद वापस लौटा दिए हैं। अप्र...
07/08/2026

महाराष्ट्र के वाशिम में बस कंडक्टर राजू वाणी ने एक बुजुर्ग महिला को उनके 24,000 रुपये दो साल बाद वापस लौटा दिए हैं। अप्रैल 2024 में कासाबाई गायकवाड़ नाम की महिला बस यात्रा के दौरान रुपयों से भरी थैली भूल गई थीं।

हाल ही में, वही महिला दोबारा राजू की बस में चढ़ीं। वरिष्ठ नागरिक होने के नाते मुफ्त टिकट के लिए उन्होंने अपना आधार कार्ड दिखाया। कार्ड पर 'कासाबाई गायकवाड़' नाम पढ़ते ही कंडक्टर को पुरानी घटना याद आ गई और उसने महिला से पूछताछ की। पैसे गुम होने की पुष्टि होने के बाद राजू ने उन्हें डिपो ले जाकर अधिकारियों के जरिए पूरे 24,000 रुपये सौंप दिए। महिला ने खुश होकर कंडक्टर को 1,100 रुपये का इनाम दिया।

कांवड़ यात्रा के दौरान हरियाणा के शिवभक्त रोशन लाल सेवादार अपनी अनोखी भक्ति से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। वह पारंपरिक ...
07/08/2026

कांवड़ यात्रा के दौरान हरियाणा के शिवभक्त रोशन लाल सेवादार अपनी अनोखी भक्ति से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। वह पारंपरिक रूप से केवल कांवड़ उठाने के बजाय, भगवान शिव की सवारी 'नंदी' के साथ 800 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा कर रहे हैं।

रोशन लाल अपने साथ नंदी को हरिद्वार ले गए, उन्हें गंगा स्नान कराया और अब उनके साथ पैदल वापस लौट रहे हैं। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा पाने का मार्ग केवल जलाभिषेक नहीं, बल्कि नंदी की सेवा भी है। अन्य कांवड़ियों को विभिन्न स्वरूपों में यात्रा करते देख उनके मन में नंदी को गंगा स्नान कराने का यह विचार आया था।

उनकी इस कठिन पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य नंदी के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल का निर्माण करना और वहां भगवान शिव का मंदिर स्थापित करना है ताकि निरंतर सेवा हो सके। उनकी इस अनूठी आस्था और भक्ति को रास्ते भर में लोगों का भरपूर ध्यान मिल रहा है।

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