Kiwi Nursery - Zero point Oachghat

Kiwi Nursery - Zero point Oachghat Kiwi plant (Allison and Hayward) which can be grown at 3000 feet and above. Grafted & well rooted

01/12/2023

नौणी विश्वविद्यालय 11 दिसंबर से आयोजित करेगा पौधों की वार्षिक बिक्री

बजौरा में 2 दिसंबर से होगी बिक्री

डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी 11 दिसंबर से किसानों को रोपण सामग्री की वार्षिक बिक्री शुरू करेगा। यह बिक्री नौणी के मुख्य परिसर में विश्वविद्यालय की नर्सरियों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालय के अनुसंधान स्टेशनों पर पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आयोजित की जाएगी। इस वर्ष, विश्वविद्यालय और अन्य स्टेशनों पर बिक्री के लिए उपलब्ध पौधों की कुल संख्या 2.72 लाख से अधिक है। इस बिक्री के दौरान किसानों को सेब, कीवी, अनार, खुमानी, आड़ू, नेक्टरीन, चेरी, अखरोट, नाशपाती, प्लम आदि की विभिन्न किस्में उपलब्ध कारवाई जाएंगी। सीद्लिंग्स के साथ सेब के क्लोनल रूट स्टॉक भी उपलब्ध होनें। लाहौल और स्पीति और पांगी के किसानों की सुविधा के लिए, बजौरा में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशन से पौधों की बिक्री 2 दिसंबर से शुरू होगी।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालय के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और अनुसंधान स्टेशन भी 11 दिसंबर से पौधों की बिक्री करेंगे। इनमें कंडाघाट (सोलन), शरबो (किन्नौर), रोहड़ू (शिमला), चंबा, ताबो (लाहौल और स्पीति) के केवीके, नेरी महाविद्यालय और मशोबरा में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशन शामिल हैं।

01/12/2023

Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry, Nauni 11 दिसंबर से किसानों को रोपण सामग्री की वार्षिक बिक्री शुरू करेगा। यह बिक्री नौणी के मुख्य परिसर में विश्वविद्यालय की नर्सरियों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालय के अनुसंधान स्टेशनों पर पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आयोजित की जाएगी। इस वर्ष, विश्वविद्यालय और अन्य स्टेशनों पर बिक्री के लिए उपलब्ध पौधों की कुल संख्या 2.72 लाख से अधिक है। इस बिक्री के दौरान किसानों को सेब, कीवी, अनार, खुमानी, आड़ू, नेक्टरीन, चेरी, अखरोट, नाशपाती, प्लम आदि की विभिन्न किस्में उपलब्ध कारवाई जाएंगी। सीद्लिंग्स के साथ सेब के क्लोनल रूट स्टॉक भी उपलब्ध होनें। लाहौल और स्पीति और पांगी के किसानों की सुविधा के लिए, बजौरा में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशन से पौधों की बिक्री 2 दिसंबर से शुरू होगी।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालय के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और अनुसंधान स्टेशन भी 11 दिसंबर से पौधों की बिक्री करेंगे। इनमें कंडाघाट (सोलन), शरबो (किन्नौर), रोहड़ू (शिमला), चंबा, ताबो (लाहौल और स्पीति) के केवीके, नेरी महाविद्यालय और मशोबरा में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशन शामिल हैं।
UHF Kisan Sewa

14/08/2023
04/07/2023
16/12/2022

मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर मंदिर में है..। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है..।

दीपक के ऊपर हाथ
घुमाने का वैज्ञानिक
कारण

आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है..।

मंदिर में घंटा लगाने
का कारण

जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है..।

भगवान की मूर्ति

मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।

परिक्रमा करने के
पीछे वैज्ञानिक कारण

हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 3,5,7 से बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है. है

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