OM Vasttu CURE

OM Vasttu CURE Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from OM Vasttu CURE, Home improvement, Brantford, ON.

पौराणिक साहित्य में इंद्र देव का अक्सर उल्लेख किया गया है। वेदों में उन्हें महेंद्र के रूप में वर्णित किया गया है। उन्हे...
03/31/2025

पौराणिक साहित्य में इंद्र देव का अक्सर उल्लेख किया गया है। वेदों में उन्हें महेंद्र के रूप में वर्णित किया गया है। उन्हें स्वर्ग या स्वर्गलोक का स्वामी माना जाता है, और वे स्वर्ग के सुचारू और व्यवस्थित कामकाज के लिए जिम्मेदार हैं, जहाँ वे आनंद और विलासिता से भरा जीवन जीते हैं। भवन के पूर्वी क्षेत्र में एक मेज पर इंद्र देव की मूर्ति रखनी चाहिए; और मूर्ति का मुख पश्चिम की ओर होना चाहिए। इस उपाय को करने से आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप नए लोगों से मिलेंगे, और नए संपर्क या संबंध विकसित करेंगे। इंद्र देव यह भी सुनिश्चित करते हैं कि कुशल लोग आपके और आपके व्यवसाय से जुड़ें। इसके अलावा, यदि आपका काम अव्यवस्थित लगता है, तो यह उपाय आपके जीवन में व्यवस्था की भावना लाने में मदद करेगा, और आपको इसे 'वापस पटरी पर लाने' में सहायता करेगा। यह उन बाधाओं को दूर करता है जिनका सामना आपको कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करते समय या किसी ऐसे काम में करना पड़ सकता है जिसमें आपको सरकार से निपटना पड़ता है। इस उपाय का उपयोग सरकारी अनुबंध और सौदे जीतने में भी किया जा सकता है।

The Eagle does not fight the snake on the ground.It picks it up into the sky and changes the battle ground, and then it ...
12/18/2022

The Eagle does not fight the snake on the ground.

It picks it up into the sky and changes the battle ground, and then it releases the snake into the sky.

The snake has no stamina, no power and no balance in the air.

It is useless, weak and vulnerable unlike on the ground where it is powerful wise and deadly.

Take your fight into the spiritual realm by praying and when you are in the spiritual realm God takes over your battles.

Don’t fight the enemy in his comfort zone,
change the battle grounds like the Eagle
and let God take charge through your earnest prayer.

You’ll be assured of a clean victory !!

01/07/2022
*कौनसा अभिवादन उचित??**नमस्ते* या *नमस्कार*??प्रायः लोग अभिवादन के लिए *नमस्ते* और *नमस्कार* दोनों शब्दों का प्रयोग करते...
12/23/2021

*कौनसा अभिवादन उचित??*
*नमस्ते* या *नमस्कार*??

प्रायः लोग अभिवादन के लिए *नमस्ते* और *नमस्कार* दोनों शब्दों का प्रयोग करते हैं ।
कुछ लोग मानते हैं *नमस्ते और नमस्कार* दोनों का अर्थ एक ही है।
दोनों का अर्थ एक ही तब कहा जाए जब ये एक दूसरे के पर्यायवाची हों।

किंतु ये दोनों भिन्न अर्थ वाले शब्द हैं।

*नमस्कार* में अंत मे *कार* धातु लगने से यह क्रियासूचक बन गया।

*न* का अर्थ *"मैं"*
और *असते* का अर्थ है *"आपका सम्मान करता हूँ"*।
अर्थात *मैं आपका सम्मान करता हूँ।*

*नमस्कार* शब्द का प्रयोग *जड़(निर्जीव) वस्तुओं* के लिए किया जाता है!
जैसे *सूर्य नमस्कार, चन्द्र नमस्कार, सागर नमस्कार* इत्यादि इत्यादि

जबकि *नमस्ते* अर्थात *नमस्तुभ्यं* सम्मानसूचक शब्द है। जिसका अर्थ है *नमन है तुमको/आपको* जोकि *चेतन (सजीव)* के लिए प्रयोग किया जाता है।

*✍️इसलिए नमस्कार कम और नमस्ते शब्द का ही प्रयोग ज्यादा करें!*
अतः आप सभी को प्रातः कालीन
*नमस्ते जी*
🙏

12/22/2021

अग्नि सुरक्षा देती है। अगर अग्नि तत्व कमजोर हो तो आपके अंतर मन में डर और घबराहट होगी। मन बेचैन होगा। नऐ काम शुरू होने में समस्या, काम पूरे नही होंगे। रस्ता दिखाने वाले गुमराह करेंगे। तत्थो के आधार पर निरणे ना होना। मान हानी होना, यश ना मिलना। नींद ना आना, नुक़सान होना, पैसे की समस्या, पेट और हजमे की समस्या, मासपेशीयो का कमज़ोर होना, हमेशा थकावट का रहना। स्फूर्ति ना होना। चोरी होना। बीमारी का घर में रहना। विना कारण अनजान डर का होना। अगर आप इन में से किसी समस्या का सामना कर रहे हो, तो आपके घर में अग्नि तत्व कमजोर हैं। अगर सम्भब हो तो किसी वास्तु विशेषज्ञ को घर का नक़्शा दिखाके सलाह ले। वरना अपने घर में अग्नि की दिशाओं को अच्छी तरह से देखें कि वहाँ कोई जल तत्व ( नीला, काला रंग, ऐल्यूमिनीयम धांत, समुंदर या पानी का कोई चित्र) तो नही है। अगर है तो वहाँ से उसे हटा दे। SOUTHEAST या SOUTH में मुख्य द्वार तो नही है अगर है तो वहाँ द्वार के नीचे ज़मीन पर लाल रंग की 3” WIDE पट्टी लगादे। SOUTHEAST से SOUTH तक कोई किसी दिशा में कट है या कोई दिशा का एरीआ छोटा हैं तो वहाँ दीवार पर लाल रंग करवाए।

ध्यान रहे कि ये विधियाँ बहुत ही powerful है इस लिए इनका इस्तेमाल सिर्फ़ तो ही करें अगर आप को शतप्रतिशत यक़ीन है दिशायों के म्मले में। क्योंकि अग्नि तत्व का ज़रूरत से ज़्यादा ताक़तवार होना भी बहुत ख़तरनाक होता है।

वासुदेव: सर्वम 🙏🏻🙏🏻

महान लेखक टालस्टाय की एक कहानी है *- "शर्त "*इस कहानी में दो मित्रो में आपस मे शर्त लगती है कि, यदि उसने एक वर्ष  एकांत ...
12/21/2021

महान लेखक टालस्टाय की एक कहानी है *- "शर्त "*

इस कहानी में दो मित्रो में आपस मे शर्त लगती है कि, यदि उसने एक वर्ष एकांत में बिना किसी से मिले,बातचीत किये एक कमरे में बिता देता है, तो उसे 10 लाख नकद वो देगा । इस बीच, यदि वो शर्त पूरी नहीं करता, तो वो हार जाएगा ।
पहला मित्र ये शर्त स्वीकार कर लेता है । उसे दूर एक खाली मकान में बंद करके रख दिया जाता है । बस दो जून का भोजन और कुछ किताबें उसे दी गई ।

उसने जब वहां अकेले रहना शुरू किया तो 1 दिन 2 दिन किताबो से मन बहल गया फिर वो खीझने लगा । उसे बताया गया था कि थोड़ा भी बर्दाश्त से बाहर हो तो वो घण्टी बजा के संकेत दे सकता है और उसे वहां से निकाल लिया जाएगा ।
जैसे जैसे दिन बीतने लगे उसे एक एक घण्टे युगों से लगने लगे । वो चीखता, चिल्लाता लेकिन शर्त का खयाल कर बाहर किसी को नही बुलाता । वोअपने बाल नोचता, रोता, गालियां देता तड़फ जाता,मतलब अकेलेपन की पीड़ा उसे भयानक लगने लगी पर वो शर्त की याद कर अपने को रोक लेता ।

कुछ दिन और बीते तो धीरे धीरे उसके भीतर एक अजीब शांति घटित होने लगी।अब उसे किसी की आवश्यकता का अनुभव नही होने लगा। वो बस मौन बैठा रहता। एकदम शांत उसका चीखना चिल्लाना बंद हो गया।

इधर, उसके दोस्त को चिंता होने लगी कि एक वर्ष के दिन पर दिन बीत रहे हैं पर उसका दोस्त है कि बाहर ही नही आ रहा है ।
वर्ष के अब अंतिम 2 दिन शेष थे,इधर उस दोस्त का व्यापार चौपट हो गया, वो दिवालिया हो गया।उसे अब चिंता होने लगी कि यदि उसके मित्र ने शर्त जीत ली तो इतने पैसे वो उसे कहाँ से देगा ।
वो उसे गोली मारने की योजना बनाता है और उसे मारने के लिये जाता है ।

जब वो वहां पहुँचता है तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नही रहता ।
वो दोस्त शर्त के एक वर्ष के ठीक एक दिन पहले वहां से चला जाता है, और एक खत अपने दोस्त के नाम छोड़ जाता है ।
खत में लिखा होता है-
प्यारे दोस्त, इस एक वर्ष में मैंने वो चीज पा ली है जिसका कोई मोल नही चुका सकता । मैंने अकेले मे रहकर असीम शांति का सुख पा लिया है और मैं ये भी जान चुका हूं कि जितनी जरूरतें हमारी कम होती जाती हैं उतना हमें असीम आनंद और शांति मिलती है। मैंने इन दिनों परमात्मा के असीम प्यार को जान लिया है । इसीलिए मैं अपनी ओर से यह शर्त तोड़ रहा हूँ। अब मुझे तुम्हारे शर्त के पैसे की कोई जरूरत नही।

Good morning beautiful people and Happy Wednesday!This morning The Morning Mind Love 💌 messageWhat is this obsession wit...
12/21/2021

Good morning beautiful people and Happy Wednesday!

This morning The Morning Mind Love 💌 message

What is this obsession with "finding yourself"?

Let me tell you, that’s not really how it works, because you are not lost. 🤔

Perhaps more accurately, you’ve been buried… in social constructs, personal narratives, family expectations, ideals, unmet desires…

So stop searching and start uncovering.

Your brilliant, unique, authentic self is in there, just waiting for you to polish away all that nonsense. ✨

अब जिस व्यक्ति को सच में ही संन्यासी होना हो, उसे समाज से भागने की कोई जरूरत नहीं; सिर्फ भाषा का जो राग—विराग है, उससे म...
09/23/2021

अब जिस व्यक्ति को सच में ही संन्यासी होना हो,
उसे समाज से भागने की कोई जरूरत नहीं;
सिर्फ भाषा का जो राग—विराग है,
उससे मुक्त हो जाना काफी है।

बस इतना जान ले कि शब्द तो मात्र ध्वनियां है
—अर्थहीन,
मूल्यहीन, न अच्छे हैं, न बुरे हैं।
ऐसा जानते ही, तुम अचानक पाओगे तुम मुक्त हो गए समाज से।
अब तुम्हें कोई न तो गाली दे कर दुखी कर सकता है,
न खुशामद करके तुम्हें प्रसन्न कर सकता है।

जिस दिन
तुम लोगों के दुख देने और सुख देने की
क्षमता के पार हो गए, उस दिन तुम पार हो गए।

'शब्द आदि ऐंद्रिक विषयों के प्रति राग के अभाव से
और आत्मा की अदृश्यता से जिसका मन विक्षेपों से
मुक्त हो कर एकाग्र हो गया—ऐसा ही मैं स्थित हूं।’

आत्मा अदृश्य है।
और सब दृश्य है, आत्मा अदृश्य है—होनी ही चाहिए।
अगर आत्मा भी दृश्य हो तो किसके लिए दृश्य होगी?
आत्मा द्रष्टा है।
तुम सब कुछ देखते हो आत्मा से—आत्मा को नहीं देखते।
इसलिए तो लोग आत्मा को विस्मरण कर बैठे हैं।
आंख से सब दिखाई पड़ता है,
बस आंख दिखाई नहीं पड़ती।
हाथ से तुम सब पकड़ सकते हो,
लेकिन इसी हाथ को इसी हाथ से नहीं पकड़ सकते।

आत्मा तो द्रष्टा है।
चाहे बाहर लगे इन हरे वृक्षों को देखो,
चाहे बैठे जनसमूह को देखो, चाहे अपनी देह को देखो,
चाहे आंख बंद करके अपने विचारों को देखो,
और गहरे उतरो, भावों की सूक्ष्म तरंगों को देखो—
लेकिन तुम तो सदा देखने वाले हो। तुम कभी भी दृश्य नहीं बनते।

आत्मा अदृश्य है।
आत्मा कभी विषय नहीं बनती—अविषय है।
हटती जाती पीछे, हटती जाती पीछे।
तुम जो भी देखते जाओ, समझ लेना कि वही तुम नहीं हो।
तुम तो सिर्फ देखने वाले हो।
इसलिए आत्म—दर्शन शब्द झूठा है।
आत्मा का कभी दर्शन नहीं होता, किसको होगा?
उपयोग के लिए ठीक है, कामचलाऊ है, लेकिन बहुत अर्थपूर्ण नहीं है।
दर्शन तो आत्मा का कभी नहीं होता।
आत्मा की अनुभूति होती है।
जब सभी दृश्य समाप्त हो जाते हैं और
देखने को कुछ भी नहीं बचता,
सिर्फ देखने वाला अकेला बचता है,
तब ऐसा नहीं होता है कि तुम देखते हो आत्मा को,
क्योंकि देखने में फिर खंड हो जाएगा।
फिर आधी आत्मा हो जाएगी, जो देख रही,
और जो दिखाई पड़ रही, वह अनात्मा हो जाएगी।
अनात्मा का अर्थ ही यह है कि जिसे हम देख लेते हैं,
वह पराया, वह विषय हो गया।
और जिसे हम कभी नहीं देख पाते,
जिसे दृश्य बनाने का कोई उपाय नहीं—वही आत्मा है।

Life is always now.
08/15/2021

Life is always now.

Address

Brantford, ON

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when OM Vasttu CURE posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share