#aao kuch sikhe (आओ कुछ सीखे)

#aao kuch sikhe (आओ कुछ सीखे) हेलो दोस्तों हमारे इस पेज पर कुछ न कुछ सीखने के लिए बताया जाएगा।

04/03/2026
14/02/2026
25/12/2023

🔥हमारे ऋषियों और मुनियों द्वारा किये आविष्कार !!!
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आचार्य कणाद : कणाद परमाणुशास्त्र के जनक हैं। आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन के भी हजारों साल पहले आचार्य कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं।

भास्कराचार्य :- आधुनिक युग में धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई हजार पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया।

भास्कराचार्यजी ने अपने ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है। इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है’।

आचार्य चरक : - चरकसंहिता जैसा महत्तवपूर्ण आयुर्वेद ग्रंथ रचने वाले आचार्य चरक आयुर्वेद विशेषज्ञ व ‘त्वचा चिकित्सक’ भी बताए गए हैं। आचार्य चरक ने शरीरविज्ञान गर्भविज्ञान, औषधि विज्ञान के बारे में गहन खोज की। आज के दौर की सबसे ज्यादा होने वाली डायबिटीज, हृदय रोग व क्षय रोग जैसी बीमारियों के निदान व उपचार की जानकारी हजारों वर्षों पहले ही उजागर की।

भारद्वाज - कई सदियो पहले ऋषि भारद्वाज ने विमानशास्त्र के जरिए वायुयान को गायब करने के असाधारण विचार से लेकर, एक ग्रह से दूसरे ग्रह व एक दुनिया से दूसरी दुनिया में ले जाने के रहस्य उजागर किए। इस तरह ऋषि भारद्वाज को वायुयान का आविष्कारक भी माना जाता है।

कण्व : - वैदिक कालीन ऋषियों में कण्व का नाम प्रमुख है। इनके आश्रम जो कि उत्तराखंड में मालनी नदी के तट पर कोटद्वार में है।इनके आश्रम में ही राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था। माना जाता है कि उसके नाम पर देश का नाम भारत हुआ। सोमयज्ञ परंपरा भी कण्व की देन मानी जाती है।

कपिल मुनि : - इनके पिता कर्दम ऋषि थे। इनकी माता देवहूती थी। कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रवर्तक माने जाते हैं। इससे जुड़ा प्रसंग है कि जब उनके पिता कर्दम संन्यासी बन जंगल में जाने लगे तो देवहूती ने खुद अकेले रह जाने की स्थिति पर दुःख जताया। इस पर ऋषि कर्दम देवहूती को इस बारे में पुत्र से ज्ञान मिलने की बात कही। वक्त आने पर कपिल मुनि ने जो ज्ञान माता को दिया, वही सांख्य दर्शन' कहलाता है।

पतंजलि : - आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है। किंतु कई सदियों पहले ही ऋषि पतंजलि ने कैंसर को रोकने वाला योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है।

शौनक : - वैदिक आचार्य और ऋषि शौनक ने गुरु-शिष्य परंपरा व संस्कारों को इतना फैलाया कि उन्हें दस हजार शिष्यों वाले गुरुकुल का कुलपति होने का गौरव मिला। शिष्यों की यह तादाद कई आधुनिक विश्वविद्यालयों तुलना में भी कहीं ज्यादा थी।

महर्षि सुश्रुत : - ये शल्यचिकित्सा विज्ञान यानी सर्जरी के जनक व दुनिया के पहले शल्यचिकित्सक
(सर्जन) माने जाते हैं। वे शल्यकर्म (आपरेशन) में दक्ष थे। महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखी गई सुश्रुतसंहिता’ ग्रंथ में शल्य चिकित्सा के बारे में कई अहम ज्ञान विस्तार से बताया है। इनमें सुई, चाकू व चिमटे जैसे तकरीबन 125 से भी ज्यादा शल्यचिकित्सा में जरूरी औजारों के नाम और 300 तरह की शल्यक्रियाओं व उसके पहले की जाने वाली तैयारियों, जैसे उपकरण उबालना आदि के बारे में पूरी जानकारी बताई गई है।

जबकि आधुनिक विज्ञान ने शल्य क्रिया की खोज तकीबन चार सदी पहले ही की है। माना जाता है कि महर्षि सुश्रुत मोतियाबिंद, पथरी, हड्डी टूटना जैसे पीड़ाओं के उपचार के लिए शल्यकर्म यानी आपरेशन करने में माहिर थे। यही नहीं वे त्वचा बदलने की शल्यचिकित्सा भी करते थे।

वशिष्ठ : - वशिष्ठ ऋषि राजा दशरथ के कुलगुरु थे। दशरथ के चारों पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न ने इनसे ही शिक्षा पाई। देवप्राणी व मनचाहा वर देने वाली कामधेनु गाय वशिष्ठ ऋषि के पास ही थी।

विश्वामित्र : - ऋषि बनने से पहले विश्वामित्र क्षत्रिय थे। ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को पाने के लिए हुए युद्ध में मिली हार के बाद तपस्वी हो गए। विश्वामित्र ने भगवान शिव से अस्त्र विद्या पाई। इसी कड़ी में माना जाता है कि आज के युग में प्रचलित प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रणाली हजारों साल पहले विश्वामित्र ने ही खोजी थी।

ऋषि विश्वामित्र ही ब्रह्म गायत्री मंत्र के दृष्टा माने जाते हैं।

महर्षि अगस्त्य :- महर्षि ऋषि ने ही सर्वप्रथम बिजली का आविष्कार किया था। ये घोर तपस्वी थे। रामायण के अरण्यकाण्ड में श्री राम और महर्षि अगस्त्य के बीच वार्तालाप मिलता है । महर्षि अगस्त्य ने श्री राम को धर्मयुद्ध के लिय दिव्य अस्त्र- शस्त्र दिये थे। व रामसेतू निर्माण हेतू जल विखण्डन का सूत्र दिया ।

गर्गमुनि :- गर्ग मुनि नक्षत्रों के खोजकर्ता माने जाते हैं। यानी सितारों की दुनिया के जानकार। ये गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के बारे नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ।

कौरव-पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा। इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी। इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी। पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था। तिथि-नक्षत्रों की यही स्थिति व नतीजे गर्ग मुनि जी ने पहले बता दिए थे।

बौद्धायन :- भारतीय त्रिकोणमितिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। कई सदियों पहले ही तरह-तरह के आकार-प्रकार की यज्ञवेदियां बनाने की त्रिकोणमितिय रचना-पद्धति बौद्धयन ने खोजी।

दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी, उतने क्षेत्रफल का ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान के वृत्त में बदलना, इस तरह के कई मुश्किल सवालों का जवाब बौद्धयन ने आसान बनाया।

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https://youtu.be/GmbrKXFJkfY बागरा में निकाली गई पहले भव्य कावड़ यात्रा।सभी दोस्तो से मेरा निवेदन ।मेरे चैनल को सब्सक्रा...
20/08/2023

https://youtu.be/GmbrKXFJkfY
बागरा में निकाली गई पहले भव्य कावड़ यात्रा।
सभी दोस्तो से मेरा निवेदन ।
मेरे चैनल को सब्सक्राइब करें
वीडियो को लाइक करें
ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
धन्यवाद।

Hi friend's like my videos share my videossubscrib my chhannelpres the bell iconfriend's bagra me pahli bar kavd yatra nikali gali thihttps://youtu.be/GmbrKX...

19/08/2023

*बुढापा पैरों से शुरु होता है*
मुझे आज उपरोक्त संदर्भ में समझने लायक लेख मिला।मैं रोज कम से कम 45 मिनट लगातार पैदल चलता हूं जो मेरे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है,ये सीनियर सिटीजन्स हेतु सबसे अच्छी एक्सरसाइज है। इस लेख में पैदल चलने के और भी फायदे बताए हैं। मैं पैरों के नर्व्स और वेंस के लिए स्ट्रेच एक्सरसाइज़ में अलाली कर लेता था, जो अब से नही करूँगा। क्योंकि पिंडली को कुछ लोग उसमें पाए जाने वाले नर्व्स और वेंस के कारण उसे छोटा दिल जो कहते हैं। शायद ये लेख आपको भी अच्छा लगे।

*बुढ़ापा पैरों से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ता है ! अपने पैरों को सक्रिय और मजबूत रखें !!*

जैसे-जैसे हम ढलते जाते हैं और रोजाना बूढ़े होते जाते हैं, हमें पैरों को हमेशा सक्रिय और मजबूत बनाए रखना चाहिए।

हम लगातार बूढ़े हो रहे हैं, वृद्ध हो रहे हैं, मगर हमें बालों के भूरे होने, त्वचा के झड़ने (या) झुर्रियों से डरना नहीं चाहिए।

दीर्घायु के संकेतों में, जैसा कि अमेरिकी पत्रिका प्रिवेंशन (रोकथाम) में मजबूत पैर की मांसपेशियों को शीर्ष पर सूचीबद्ध किया गया है, क्योंकि यह सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक है।

यदि आप दो सप्ताह तक अपने पैर नहीं हिलाते हैं, तो आपके पैरों की ताकत 10 साल कम हो जाएगी। यानी आप दस साल बूढ़े हो जाएंगे।

डेनमार्क में कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया कि वृद्ध और युवा दोनों, *निष्क्रियता* के दो हफ्तों के दौरान, पैरों की मांसपेशियों की ताकत *एक तिहाई कम हो सकती है जो 20 से 30 साल की उम्र के बराबर है।*

जैसे-जैसे हमारे पैर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं, ठीक होने में लंबा समय लगता है, भले ही हम बाद में पुनर्वास और व्यायाम करें।

इसलिए, *चलने जैसे नियमित व्यायाम बहुत जरूरी हैं*।

पूरे शरीर का भार पैरों पर रहता है और शरीर आराम करता है। पैर एक प्रकार के स्तंभ हैं, जो मानव शरीर के पूरे भार का वहन करते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि किसी व्यक्ति की 50% हड्डियाँ और 50% मांसपेशियाँ दोनों पैरों में ही होती हैं। मानव शरीर के सबसे बड़े और मजबूत जोड़ और हड्डियां भी पैरों में होती हैं।

▪️मजबूत हड्डियां, मजबूत मांसपेशियां और लचीले जोड़ "आयरन ट्राएंगल" का निर्माण करते हैं जो सबसे महत्वपूर्ण भार यानी *मानव शरीर को वहन करता है।*

७०% मानव गतिविधियां और कैलोरी बर्निंग इन्हीं दो पैरों से होते हैं।

क्या आप यह जानते हैं? जब इंसान जवान होता है तो उसकी *जांघों में इतनी ताकत होती है कि वह 800 किलो की छोटी कार को उठा सके*

*पैर शरीर की हरकत का केंद्र है*।

दोनों पैरों में मिलकर मानव शरीर की ५०% नसें, ५०% रक्त वाहिकाएं और ५०% रक्त उनमें से बहता है।

▪️ यह सबसे बड़ा संचार नेटवर्क है जो शरीर को जोड़ता है।

केवल जब पैर स्वस्थ होते हैं तब रक्त की कन्वेंशन धारा सुचारू रूप से प्रवाहित होती है, इसलिए जिन लोगों के पैर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, उनका हृदय निश्चित रूप से मजबूत होता है।

*बुढ़ापा पैरों से ऊपर की ओर जाता है।*

जैसे-जैसे व्यक्ति बूढ़ा होता है, मस्तिष्क और पैरों के बीच निर्देशों के संचरण की सटीकता और गति कम होती जाती है, इसके विपरीत जब कोई व्यक्ति युवा होता है तो यह बहुत तेज और सटीक होती है।

इसके अलावा, तथाकथित अस्थि उर्वरक (कैल्शियम) समय बीतने के साथ खो जाएगा, जिससे बुजुर्गों को हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा अधिक हो जाएगा।

बुजुर्गों में अस्थि भंग आसानी से जटिलताओं की एक श्रृंखला को ट्रिगर कर सकता है, विशेष रूप से घातक रोग जैसे मस्तिष्क घनास्त्रता।

क्या आप जानते हैं कि आम तौर पर 15 फीसदी बुजुर्ग मरीजों की जांघ की हड्डी में फ्रैक्चर के एक साल के भीतर मौत हो जाती है ?

* *पैरों की एक्सरसाइज करने में कभी देर नहीं करनी चाहिए, 60 साल की उम्र के बाद भी यदि आप नियमित व्यायाम करें तो परिणाम चौंकाने वाले होते हैं।*

हालांकि समय के साथ हमारे पैर धीरे-धीरे बूढ़े हो जाएंगे, लेकिन हमें पैरों का व्यायाम करना जीवन भर का काम बना लेना चाहिए।

केवल पैरों को मजबूत करके ही आगे बढ़ती उम्र को रोका या कम किया जा सकता है।

▪️कृपया रोजाना कम से कम 30-40 मिनट टहलें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपके पैरों को पर्याप्त व्यायाम मिले और यह सुनिश्चित हो सके कि आपके पैरों की मांसपेशियां स्वस्थ रहें।

यदि आप सहमत हैं तो आपको इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने सभी दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ साझा करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति रोज बूढ़ा हो रहा है।

मस्त रहें, स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें और नियमित 4 km पैदल अवश्य चलें.🙏Jai Shri Ram 🙏

17/08/2023

इंग्लैंड में पहला स्कूल 1811 में खुला उस समय भारत में 732000 गुरुकुल थे । खोजिए हमारे गुरुकुल कैसे बन्द हुए ❓

: *गुरुकुल कैसे खत्म हो गये*❓

आपको पहले ये बता दे कि हमारे सनातन संस्कृति परम्परा के गुरुकुल मे क्या क्या पढाई होती थी ! आर्यावर्त के गुरुकुल के बाद ऋषिकुल में क्या पढ़ाई होती थी ये जान लेना आवश्यक है । इस शिक्षा को लेकर अपने विचारों में परिवर्तन लायें और प्रचलित भ्रांतियां दूर करें !

01 अग्नि विद्या (Metallurgy)
02 वायु विद्या (Flight)
03 जल विद्या (Navigation)
04 अंतरिक्ष विद्या (Space Science)
05 पृथ्वी विद्या (Environment)
06 सूर्य विद्या (Solar Study)
07 चन्द्र व लोक विद्या (Lunar Study)
08 मेघ विद्या (Weather Forecast)
09 पदार्थ विद्युत विद्या (Battery)
10 सौर ऊर्जा विद्या (Solar Energy)
11 दिन रात्रि विद्या
12 सृष्टि विद्या (Space Research)
13 खगोल विद्या (Astronomy)
14 भूगोल विद्या (Geography)
15 काल विद्या (Time)
16 भूगर्भ विद्या (Geology Mining)
17 रत्न व धातु विद्या (Gems & Metals)
18 आकर्षण विद्या (Gravity)
19 प्रकाश विद्या (Solar Energy)
20 तार विद्या (Communication)
21 विमान विद्या (Plane)
22 जलयान विद्या (Water Vessels)
23 अग्नेय अस्त्र विद्या (Arms & Ammunition)
24 जीव जंतु विज्ञान विद्या (Zoology Botany)
25 यज्ञ विद्या (Material Sic)

*ये तो बात हुई वैज्ञानिक विद्याओं की । अब बात करते है व्यावसायिक और तकनीकी विद्या की !*

26 वाणिज्य (Commerce)
27 कृषि (Agriculture)
28 पशुपालन (Animal Husbandry)
29 पक्षिपलन (Bird Keeping)
30 पशु प्रशिक्षण (Animal Training)
31 यान यन्त्रकार (Mechanics)
32 रथकार (Vehicle Designing)
33 रतन्कार (Gems)
34 सुवर्णकार (Jewellery Designing)
35 वस्त्रकार (Textile)
36 कुम्भकार (Pottery)
37 लोहकार (Metallurgy)
38 तक्षक
39 रंगसाज (Dying)
40 खटवाकर
41 रज्जुकर (Logistics)
42 वास्तुकार (Architect)
43 पाकविद्या (Cooking)
44 सारथ्य (Driving)
45 नदी प्रबन्धक (Water Management)
46 सुचिकार (Data Entry)
47 गोशाला प्रबन्धक (Animal Husbandry)
48 उद्यान पाल (Horticulture)
49 वन पाल (Horticulture)
50 नापित (Paramedical)

यह सब विद्या गुरुकुल में सिखाई जाती थी पर समय के साथ गुरुकुल लुप्त हुए तो यह विद्या भी लुप्त होती गयी ! आज मैकाले पद्धति से हमारे देश के युवाओं का भविष्य नष्ट हो रहा तब ऐसे समय में गुरुकुल के पुनः उद्धार की आवश्यकता है।

भारतवर्ष में गुरुकुल कैसे खत्म हो गये ? कॉन्वेंट स्कूलों ने किया बर्बाद । 1858 में Indian Education Act बनाया गया। इसकी ड्राफ्टिंग ‘लोर्ड मैकाले’ ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W. Luther और दूसरा था Thomas Munro ! दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। Luther, जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100% साक्षरता है ।

मैकाले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी “देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था” को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह “अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था” लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे ।

मैकाले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है - “कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी।” इस लिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया | जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज की तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी | फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया | उनमें आग लगा दी, उसमें पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा- पीटा, जेल में डाला।
1850 तक इस देश में ’7 लाख 32 हजार’ गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे ’7 लाख 50 हजार’ । मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में ‘Higher Learning Institute’ हुआ करते थे । उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था और ये गुरुकुल समाज के लोग मिलके चलाते थे न कि राजा, महाराजा ।

गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी। इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया । उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था । इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी, ये तीनों गुलामी ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी देश में हैं !

मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमें वो लिखता है कि: “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा । इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।” उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है । अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा । हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा।

लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है । दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी भाषा सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ॽ शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी । समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी।

संयुक्तराष्टसंघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी ! जिसमे लगभग वो विजय पा चुके क्योंकि आज का युवा भारत को कम यूरोप को ज्यादा जानता है । भारतीय संस्कृति को ढकोसला समझता है लेकिन पाश्चात्य देशों को नकल करता है । धर्म की प्रमुखता और विशेषता को न जानते हुए भी वामपंथियों का समर्थन करता है।

सभी बन्धुओ से एक चुभता सवाल हम सभी को धर्म की जानकारी होनी चाहिये । क्योंकि धर्म ही हमे राष्ट्र धर्म सिखाती है, धर्म ही हमे समाजिकता सिखाती है, धर्म ही हमे माता - पिता, गुरु और राष्ट्र के प्रति प्राण न्योछावर करने की प्रेरणा देती है। परंपरा एक आध्यात्मिक विज्ञान है, जिस विज्ञान को हम सभी आज जानते है उससे बहुत ही समृद्ध विज्ञान ही अध्यात्म है...
*जयतु गुरुकुलम् , जयतु भारतम् ...*

27/07/2023

माइकल जैक्सन 150 साल जीना चाहता था!

किसी सेे हाथ मिलाने से पहले दस्ताने
पहनता था!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क
लगाता था !
अपनी देखरेख करने के लिए उसने अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे खिलाया जाता था!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!

माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवाकर
अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी छोड़ दिया।
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
किराए पर लिया! और अपने दोस्त भी गोरे बनाए शादी भी गोरी औरतों के साथ की!

नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो से विवाह किया, जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997) तथा पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को जन्म दिया। वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर चल रहा था!

हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले डोनर भी तैयार कर रखे थे!
जिन्हें वह खर्चा देता था, ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत पड़ने पर वह आकर दे दें,
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की बदौलत मौत को भी चकमा दे सकता है,
लेकिन वह गलत साबित हुआ।

25 जून 2009 को उसके दिल की धड़कन
रुकने लगी, उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी में हालत काबू में नहीं आए, सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए, वह भी उसे नहीं बचा पाए।

उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी , 50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था. 29अगस्त1958 को जन्मा. 25 जून 2009 को वह इस दुनिया से चला गया !

जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था! उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि, उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!
उसका सिर गंजा था, उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे, उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे,
प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से
छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!

माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 अरब लोगो ने लाइव देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।

माइकल जैक्सन की मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर,
Wikipedia,Twitter और AOL’s
instant messenger यह सभी क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलते ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने माइकल जैकसन को सर्च किया! ज्यादा सर्च होने के कारण गूगल पर सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और गूगल क्रैश हो गया,
ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!

सार यही है,
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग कुदरती मौत की बजाय बनावटी मौत ही मरते हैं!

"क्यों करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर ,
मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे घाट पर"...

धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"

आइए ज़िंदगी को पकड़ें,
इससे पहले कि,
जिंदगी हमको पकड़ ले❗️

खुल कर जियो दोस्तों, मौत तो अटल सत्य है, उस को तो आना ही है ।....... ✍️✍️✍️✍️

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