30/10/2020
Listen to the sixteenth verse of the charchastav and chant along...
श्री पंचसतवी चर्चास्तव: 16
ये चिन्तयन्त्यरुण मण्डल मध्यवर्ति
रूपं तवाऽम्ब ! नव यावक पंकपिंगम् ।
तेषां सदैव कुसुमायुध बाण भिन्न -
वक्ष:स्थला मृगदृशो वशगा भवन्ति ।।
अर्थात्:
सूर्यमण्डलुक प्रकाश वोज़लि रंग सोस बेयि
लाऽछि रंग सोस यिम्म चोन ध्यान दाऽराऽन।
काऽमदीव सऽन्ज़ तीर चमचम वछि सोस
अछ़ रछ़ तिमन मातहत छि रोऽज़ाऽन ।।
Audio: Kuldeep Pandita