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30/10/2020

Listen to the sixteenth verse of the charchastav and chant along...

श्री पंचसतवी चर्चास्तव: 16
ये चिन्तयन्त्यरुण मण्डल मध्यवर्ति
रूपं तवाऽम्ब ! नव यावक पंकपिंगम् ।
तेषां सदैव कुसुमायुध बाण भिन्न -
वक्ष:स्थला मृगदृशो वशगा भवन्ति ।।
अर्थात्:
सूर्यमण्डलुक प्रकाश वोज़लि रंग सोस बेयि
लाऽछि रंग सोस यिम्म चोन ध्यान दाऽराऽन।
काऽमदीव सऽन्ज़ तीर चमचम वछि सोस
अछ़ रछ़ तिमन मातहत छि रोऽज़ाऽन ।।

Audio: Kuldeep Pandita

23/10/2020

Listen to the fourteenth verse of the charchastav and chant along...

श्री पंचसतवी चर्चास्तव: 14

माता: ! मुहूर्तमऽपि य:स्मरति स्वरूपं
लाक्षारस प्रसरतन्तु निभं भवत्या:।
ध्यायन्त्यऽनन्य मनस स्तमनंग तप्ता:
प्रद्युम्न सीम्नि सुभगत्व गुणं तरुण्य:।।
अर्थात्:
ही माता युस महूरतस चोन ध्यान करि
चोन स्वरूप लाऽछि रंग ताऽरि समाऽन।
सुन्दर जवान अछ़ रछ़ न डलवऽनि मन सोस
काऽमनायि ताऽवि मचि तस छि सुमराऽन।

Audio: Kuldeep Pandita

19/10/2020

Listen to the thirteenth verse of the charchastav and chant along...

श्री पंचसतवी चर्चास्तव: 13

सिन्दूर पांसु पठल च्छुरिता मिव द्यां
त्वत्तेजसा जतुरस स्नपिता मिवोर्वीम्।
य: पश्यति क्षणमपि त्रिपुरे विहाय
व्रीडां मृडानि सुदृश स्तमनु द्रवन्ति।।
अर्थात्:
स्यन्दरि गर्दि सोसतयि जोरमुत आऽकाश
लाऽछ रंग पृथ्वी श्राऽन करिथ ज़न
युस वुच्छि क्षण माऽतरस लाऽज त्रऽविथ
तस सिद्धि मऽज्य भवाऽनी पत्ऽ दोऽराऽन

Audio: Kuldeep Pandita

18/10/2020

Listen to the twelfth verse of the charchastav and chant along...

श्री पंचसतवी चर्चास्तव: 12

मूर्ध्नि स्फुरत्तुहिन दीधिति-दीप्ति दीप्तं
मध्ये ललाटमऽमरायुध रश्मि चित्रम्।
हृच्चक्र चुम्बि हुतभुक् कणिकानुरूपं
ज्योतिर्यदेतदिदमम्ब ! तव स्वरूपम्।।
अर्थात्:

माता च़य मस्तक च़न्द्र ज़न प्रज़ल्वुन
राम राम बदर्नि दून्यि चमकऽवन्नि।

हृदयस मँज़ अग्नि ज्योति सरूप ज़न
मऽज्य चोन सरूप छु प्रकाश आऽसवुन ।।

Audio: Kuldeep Pandita

18/10/2020

Listen to the eleventh verse of the charchastav and chant along...

श्री पंचसतवी चर्चास्तव: 11

देवि ! त्वदंघ्रि नखरत्न भुवो मयुखा:
प्रत्यग्र मौक्तिक रुचो मुदमुद्वहन्ति।
सेवानति व्यतिकरे सुर सुन्दरीणां
सीमन्त सीम्नि कुसम स्तवकायितं यै:।।
अर्थात्:
मऽज्य भवाऽनी चाऽनि चरणन
ह्येन्द रतन
मोख़्त दिप्ती दाऽरान ज़न किरण।
योऽगिनी यलि परन प्यवाऽन
च़ेयि च़रणन प्यठ
नम चमकऽ प्रज़लान मस त सुम तिमन।।५

Audio: Kuldeep Pandita

18/10/2020

Listen to the tenth verse of the Charchastav and chant along..

श्री पंचसतवी चर्चास्तव:10

लक्ष्मीवशीकरणकर्मणि कामिनीना-
माऽकर्षण व्यतिकरेषु च सिद्धमन्त्र:।
नीरन्ध्र मोह तिमिर च्छिदुर प्रदीपो
देवी ! त्वदंघ्रि जनितो जयति प्रसाद:।।
अर्थात्:
चाऽनि चरण कमल सेवाय हुन्द प्रसाऽद
वश कराऽन लक्ष्मी त बेयि सऽदीन।
शक्ति सु प्राऽवान मोह रूपी गऽन्नि
अनिगटऽ गालाऽन च़ांऽगि सऽति ज़न।।

Audio: Kuldeep Pandita

Chant along to the ninth verse of the Charchastav.श्री पंचसतवी चर्चास्तव:9कल्पद्रुम प्रसव कल्पित चित्र पूजा-मुद्दीपित प्...
05/10/2020

Chant along to the ninth verse of the Charchastav.

श्री पंचसतवी चर्चास्तव:9

कल्पद्रुम प्रसव कल्पित चित्र पूजा-
मुद्दीपित प्रियतमा मद रक्त गीतिम्।
नित्यं भवानि ! भवती मुपवीणयन्ति
विद्याधर: कनकशैल गुहागृहेषु।।

कल्पवृक्ष पोषव सऽति चऽऽनि पूज़ा
लोल सऽति छि ग्यवाऽन चऽऽनीय गीत
नित्य समीरके गुफ़ायी रूपी घरन मँज़
वाऽयान विद्याधर सोज़ त साज़ कीऽत

Text: Kuldeep Pandita

Chant along the eighth verse of the Charchastav.श्री पंचसतवी चर्चास्तव:8त्वत्पाद पंकज रज: प्रणिपात पूतै:पुण्यै रऽनल्प मत...
02/10/2020

Chant along the eighth verse of the Charchastav.

श्री पंचसतवी चर्चास्तव:8

त्वत्पाद पंकज रज: प्रणिपात पूतै:
पुण्यै रऽनल्प मतिभि: कृतिभि: कवीन्द्रै:।
क्षीर क्षपाकर दुकूल हिमाऽवदाता
कैरप्य वापि भुवन त्रितयेऽपि कीर्ति:।।
अर्थात्:
ही दीवी चान्यन पंपोष पाऽदन
हन्ज़िह गर्द प्यठ कोऽर यिमव प्रणाम ।
तिम् बनेयि निर्मल उत्तम तीऽज़ भोज़ सोस
दाना उत्तम कवि प्रऽऽवि तिमव नाम।
दोध च़न्द्रम रीशिम् वस्त्र बेयि शीऽन पऽठि
सफ़ा बनिथ त्र्यन भवनन मँज़ बनेयि नेकनाऽम।।

Text: Kuldeep Pandita

Chant along to the seventh verse of the Charchastav. श्री पंचसतवी चर्चास्तव:7पृथ्वीभुजोऽप्युदयन प्रवरस्य तस्यविद्याधर प्...
02/10/2020

Chant along to the seventh verse of the Charchastav.

श्री पंचसतवी चर्चास्तव:7

पृथ्वीभुजोऽप्युदयन प्रवरस्य तस्य
विद्याधर प्रणति चुम्बित पादपीठ
यच्चक्रवर्ति पदवी प्रणय: स एष
त्वत्पाद पंकज रज: कणज: प्रसाद:।।
अर्थात्:
ओदीयन राऽजस ख्राऽवि प्यठ कराऽन मीऽठ्य
विद्याधर त दीव तस छि अऽदीन।
चक्रवर्ती ओहदऽ ओऽस तमि प्रोवमुत
चाऽनि पाऽदि गर्दि हेंज़ि अनुग्रह सऽऽति।।

Text: Kuldeep Pandita

Chatn along to the fifth verse of the Charchastav.श्री पंचसतवी चर्चास्तव:5सूते जगन्ति भवती भवती बिभर्तिजागर्ति तत्क्षयकृ...
02/10/2020

Chatn along to the fifth verse of the Charchastav.

श्री पंचसतवी चर्चास्तव:5

सूते जगन्ति भवती भवती बिभर्ति
जागर्ति तत्क्षयकृते भवती भवानि।
मोहं भिनत्ति भवती भवती रुणद्धि
लीलायितं जयति चित्रमिदं भवत्या।।
अर्थात्:
ब्रह्मा रूप ज़गतस करान पऽदऽ च़य
विष्णु रूप पाऽलन छख करान च़य।
रूद्र रूप संहार अऽखऽरस करान च़य
मोह दिवान त बेयि तऽथि ति गाऽलान च़य।
लीलाय यिम चाऽनि छुस वुछान रंग रंग
जय जय कार अऽसिनय चान्यन लीलायन।।

Text: Kuldeep Pandita

Chant along to the sixth verse of the Charchastav.श्री पंचसतवी चर्चास्तव:6यस्मिन्मनागऽपि नवाम्बुज पत्र गौरि!गौरि ! प्रसा...
02/10/2020

Chant along to the sixth verse of the Charchastav.

श्री पंचसतवी चर्चास्तव:6

यस्मिन्मनागऽपि नवाम्बुज पत्र गौरि!
गौरि ! प्रसाद मधुरां दृश मादधासि
तस्मिन्निरन्तरऽमनन्ग शराव कीर्णा:
सीमन्तिनी नयन सन्ततय: पतन्ति।।
अर्थात्:

ही गौरी पम्पोष रंग सफ़ा यस
अमृत नज़र छख़ च़ऽ त्रावऽनी
तस प्यठ नित्य नियम साऽरेयि योगनीय
काऽमदीवस ज़न छि वश गच्छाऽनी

Text: Kuldeep Pandita

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Bangalore
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