26/12/2019
बिहार का पहला लाल सितारा काॅमरेड चन्द्रशेखर सिंह जी के जयंती पर लाल सलाम।
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काॅ. चंद्रशेखर का जन्म 26 दिसंबर 1915 र्इ. को मसनदपुर बीहट में हुआ। इनके माता का नाम चंद्रावती देवी एवं पिता श्री रामचरित्र सिंह थे। प्रारंभिक शिक्षा बिहार विधापीठ में हुर्इ जिसका मुख्यालय सदाकत आश्रम था जो महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के दौर में प्रदेश कांग्रेस के द्वारा संचालित किया जाता था। मुजफफरपुर कालेजियेट स्कूल से 1933 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। आगे की शिक्षा के लिए बनारस हिन्दू विश्वविधालय में नामांकन कराया। इसी बीच उनकी पहली शादी खगडि़या जिले के रहीमपुर गांव में 1934 र्इ. में हुर्इ। कुछ ही वर्षों के बाद बीमारी के कारण पहली पत्नी की मौत हो गर्इ। उस समय बनारस विश्वविधालय राजनीति का केंद्र था। वहीं का. रूस्तम सैटिन के प्रभाव में आकर वामपंथी विचारधारा को अपनाया। बनारस में बीए पास करने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से बिहार के संगठन को मजबूत करने के उददेश्य से पटना यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ार्इ करने का निर्देश दिया गया जिसके तहत उन्होंने अर्थशास्त्र से एम ए में दाखिला लिया। वहीं यूनिवर्सिटी में कांग्रेसी छात्र इंद्रदीप सिन्हा से दोस्ती हुर्इ। उनके साथ मिलकर स्टूडेंट फेडरेशन बनाया। सन 1937 में पटना छात्र संघ का निर्माण किया। और 1938 में बिहार राज्य छात्र संघ का संगठन कायम हुआ। कामरेड चंद्रशेखर बिहार राज्य छात्र संघ के प्रथम सचिव चुने गए। दिसंबर 1938 में कलकत्ता में आयोजित आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के सम्मेलन में बिहार राज्य छात्र संघ को संबद्ध कराने के लिए प्रयास किया एवं सीपीआर्इ के महासचिव पीसी जोशी से मुलाकात की। बेगूसराय में प्रगतिशील विचारधारा के प्रचार के लिए गुप्त क्रांतिकारी संगठन का. ब्रहमदेव शर्मा, सूर्यनारायण सिंह, राजदेव र्इश्वर, देवकीनंदन सिंह, रामोतार सिंह आदि के सहयोग से बनाया। ठीक इसी समय बिहार में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य इकार्इ का गठन 20 अक्टूबर 1939 को मुंगेर शहर में किया गया। केंद्रीय पर्यवेक्षक पोलित ब्यूरो के सदस्य का. रूद्रदत्त भारद्वाज की उपसिथति में किया गया। जिसमें मुख्य रूप का. सुनील मुखर्जी, का. अली अशरफ, का. राहुल सांकृत्यायन सहित बीस लोग शामिल हुए। इस बीच का. चंद्रशेखर ने एमए की परीक्षा पास कर पटना ला कालेज में दाखिला करवाया। का. चंद्रशेखर की दूसरी शादी सारण जिला के सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी गोरियाकोठी निवासी श्री नारायण प्रसाद सिंह की छोटी पुत्री शकुंतला देवी के साथ 19 फरवरी 1940 र्इ. को हुर्इ। शादी के दूसरे दिन 20 फरवरी को गोरिया कोठी में आयोजित एक बड़ी सभा में का. चंद्रशेखर के मित्र मंडली के सभी उपसिथत लोग कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए। 20 मार्च 1940 को अखिल भारतीय कांग्रेस का सम्मेलन रामगढ़ में हो रहा था जिसमें पार्टी की लाइन रखने के लिए का. रूद्रदत्त भारद्वाज गुप्त रूप से शामिल हुए जिसमें का. चंद्रशेखर का अहम योगदान था। परिणामस्वरूप कुछ ही दिनों बाद रानीगंज ला कालेज के पीजी हास्टल से का. चंद्रशेखर और का. अली अशरफ को गिरफतार कर हजारीबाग जेल भेज दिए गए। लगभग दो वर्ष बाद सन 42 के प्रारंभ में का. चंद्रशेखर जेल से रिहा होकर आए। अपने धुन के मतवाले तेजी से सूबे में छात्र व नौजवानों को संगठित करने के लिए पहल करने लगे। भारत छोड़ो आंदोलन में गांधीजी की गिरफतारी की खबर सुनकर अखिल भारतीय छात्र संघ ने इसके विरोध में एक दिन की हड़ताल का आहवान किया। 12 अगस्त को छात्र संघ के महामंत्री का. चंद्रशेखर के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन सचिवालय पर हो रहा था। प्रदर्शनकारियों पर लाठियां व गोलियां चली जिसमें सात छात्र शहीद हो गए। आजादी के बाद 1948 के प्रारंभ में पार्टी का प्रथम राज्य सम्मेलन में का. चंद्रशेखर को राज्य सचिव मंडल का सदस्य चुना गया। जीवन पर्यंत वे इस पद पर बने रहे। अगस्त 1949 में पुलिस ने का. चंद्रशेखर को का. जगन्नाथ सरकार के साथ फिर गिरफतार कर ली। जून 1951 में जेल से लौटे। स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव में का. चंद्रशेखर को बेगूसराय संसदीय क्षेत्र एवं बखरी विधानसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार बनाया गया। का. चंद्रशेखर बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से चुनाव हार गए। बेगूसराय विधानसभा के उपचुनाव में का. चंद्रशेखर विजयी हुए। बिहार विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ने पहली जीत दर्ज की और का. चंद्रशेखर हिन्दी भाषा-भाषी क्षेत्र के पहले विधायक बने। अखबार की सुर्खियों ने लिखा कि बिहार के राजनीतिक क्षितिज पर लाल सितारे का उदय। कुछ ही महीने बाद दूसरे आम चुनाव में का. चंद्रशेखर बेगूसराय से उम्मीदवार हुए और फिर चुनाव हार गए। वर्ष 1962 में का. चंद्रशेखर अपने गृह क्षेत्र तेघड़ा विधानसभा से विजयी हुए। सन 1964 र्इ. में बंबर्इ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महाअधिवेशन में का. चंद्रशेखर राष्ट्रीय परिषद के सदस्य चुने गए और जीवन के अंतिम क्षण तक इसके सदस्य रहे। 6 अगस्त 1965 को पटना में बिहार सरकार के द्वारा छात्रों पर लाठी व गोली बरसार्इ गर्इ जिसके विरोध में गांधी मैदान में 10 अगस्त को आयोजित सभा में का. चंद्रशेखर व अन्य दिग्गज नेता शामिल हुए। सभा के दौरान ही पुलिस ने अंधाधुंध लाठियां चलार्इ जिसमें का. चंद्रशेखर बुरी तरह घायल हो गए जिन्हें किसी तरह पटना अस्पताल में भर्ती कराया गया। 1967 र्इ. में चौथे आम चुनाव में का. चंद्रशेखर बरौनी विधानसभा से जीत कर विधानसभा पहुंचे। बिहार में प्रथम संयुक्त मोर्चा मंत्रिमंडल में 5 मार्च 1967 को शपथ ग्रहण किया। जनसंघ तथा कम्युनिस्ट पार्टी इस मंत्रिमंडल में शामिल हुए। इस मंत्रिमंडल में कम्युनिस्ट पार्टी के दो सदस्य का. चंद्रशेखर और का. इंद्रदीप सिन्हा मंत्री बनाए गए तथा का. तेजनारायण झा को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया। का. चंद्रशेखर को सिंचार्इ एवं बिजली विभाग का दायित्व मिला। इन्होंने सिंचार्इ विभाग में अभूतपूर्व कार्य किया। विभिन्न लंबित योजनाओं को त्वरित गति से पूरा कराया। यह सरकार दस महीने में ही गिर गर्इ। बेगूसराय-वीरपुर-संजात रोड का. चंद्रशेखर के अथक प्रयास से बना। उन्होंने भूमि सुधार आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभार्इ। का. चंद्रशेखर भारत सोवियत सांस्कृतिक संघ के सदस्य भी रहे। बाद के दिनों में इसके राज्य उपाध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने पार्टी द्वारा चलाए जा रहे 1969 के परती तोड़ो आंदोलन एवं 1970 के फाजिल जमीन पर कब्जा करो आंदोलन का नेतृत्व किया। सन 1971 में जर्मन जनवादी गणतंत्र की यात्रा पर गए। लीवर क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें जर्मनी इलाज के लिए भेजा गया जहां से वे स्वस्थ होकर लौटे। वर्षों तक पार्टी द्वारा चलाए जा रहे जनांदोलन में शरीक होते रहे। इस बीच उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया। डाक्टरी रिपोर्ट आने से पूर्व ही पार्टी कार्यक्रम में शामिल का. चंद्रशेखर बेहोश हो गए। इन्हें पटना ले जाया गया लेकिन डाक्टरों के अथक प्रयास के बाद भी 20 जुलार्इ 1976 को का. चंद्रशेखर इस दुनिया को अलविदा कह गए।