05/11/2025
अंशी तो चली गई अनंत की यात्रा पर, लेकिन उसके नाम पर राजनीति का अंतहीन सिलसिला जारी
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चुनार थाना क्षेत्र के पचेवरा गांव निवासी पारस सिंह की बहू और डॉ. अजीत सिंह की पत्नी अंशी की मौत संदिग्ध है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है, मानो पारस सिंह, उनके बेटे, पत्नी और बेटी ने ढरकी लगाकर अंशी के गले में जहर उड़ेल दिया हो।
अंशी के पिता का भी बयान कोई नया नहीं है। जब भी किसी लड़की की ससुराल में संदिग्ध मौत होती है तो अधिकतर में उसके पिता का बयान इसी तरह का होता है। लेकिन यह भी देखा गया है कि साल दो साल बाद वही पिता अपना बयान भी पलट देता है, और कोर्ट में कहता है कि मैंने आवेश या गुस्से में वह बयान दिया था। यदि इस मामले में भी भविष्य में ऐसा ही होता है तो पारस सिंह और उनके परिवार को रावण करार देने वाले भी क्या अपनी टिप्पणी को वापस लेंगे। यदि मुकदमे में सारे आरोपी बाइज्जत बरी हो जाते हैं तो इस समय की उड़ाई गई इज्जत को वापस दिला पाएंगे। शायद नहीं।
इसलिए सोशल मीडिया पर ट्रायल चलाने वालों से करबद्ध अनुरोध है कि वे शांत रहें। अंशी की मौत का सबसे ज्यादा दुख उसके पिता को जरूर होगा, लेकिन उससे कम दुख पारस सिंह एंड फेमिली को भी नहीं होगा।
न अभी पोर्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है, न मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ, हम सभी लग गए दोषी ही ठहराने। इसमें समाज के वे लोग भी हैं, जो कभी खुद को पारस सिंह का अत्यंत करीबी जताते थे। भाई समय है। सबको एक बार खराब समय से गुजरना ही होता है। ऐसे में साथ भले न दीजिए, तटस्थ तो रह ही सकते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करिए। मुकदमे का ट्रायल शुरू होने दीजिए। फैसला आने तक कैसे किसी को दोषी करार दे सकते हैं।
अंशी की मौत का दुख मुझे भी है। उसने मृत्युपूर्व कोई बयान तो दिया नहीं है। हो सकता है कि उसकी मौत किसी बीमारी से हुई हो। आजकल तो हंसते, गाते, नृत्य करते, भाषण देते कभी भी मौत आ जा रही है। कैसे कह सकते हैं कि हत्या ही है। हां यदि दहेज के लिए उसे प्रताड़ित किया जाना साबित हो जाएगा तो पारस सिंह का विरोध करने वालों में मैं सबसे आगे रहूंगा।
आप भी जानते हैं कि इस एक्ट का कितना दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट तक को इस पर टिप्पणी करनी पड़ी है। न जाने कितने परिवार इस एक्ट के कारण उजड़ गए। हां, यदि पारस सिंह से कोई ईर्ष्या है तो बात ही अलग है।
इस मामले में देखा जा रहा है कि सत्ताधारी दल के कुछ नेता भी पुलिस पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। पुलिस अपना काम अपने तरीके से कानून के हिसाब से कर ही रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है। शेष की तलाश जारी है। कितने दिन गिरफ्तारी से कोई बच पाएगा। न गिरफ्तारी होगी तो हाजिर तो होना ही होगा। फिर इतनी राजनीति क्यों।
आप सभी से निवेदन है कि धैर्य रखें। दूध का दूध और पानी का पानी होना तय है।
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