23/06/2021
यह घर, आम के पेड़ पर बना हुआ है और इस घर को बनाने वाले शख्स का नाम है कुल प्रदीप सिंह (केपी सिंह)। अजमेर में पले-बढे केपी सिंह पिछले कई बरसों से उदयपुर में ही रह रहे हैं। साल 2000 में उन्होंने यह ‘ट्रीहाउस’ बनाया था और इसे बनाने के पीछे उनका मकसद था कि पेड़ कटने से बचाया जाए और लोगों के सामने एक मॉडल पेश किया जाए। द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने इस पूरे सफर के बारे में विस्तार से बताया।
केपी सिंह कहते हैं, “मैंने IIT कानपुर से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद राजस्थान में ही काम करने लगा। लगभग सात-आठ साल तक बिजली विभाग में काम करने के बाद, मैंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद, मैंने अपनी खुद की कंपनी शुरू की, जो आज इलेक्ट्रिसिटी के क्षेत्र में ही काम कर रही है।”
उन्होंने कहा कि 1999 के आसपास, वह घर बनाने के लिए उदयपुर में जमीन की तलाश कर रहे थे।
केपी सिंह ने बताया, “इस इलाके को पहले ‘कुंजरो की बाड़ी’ कहा जाता था। यहां रहनेवाले लोग, फलों के पेड़ लगाते थे और फल बेचकर अपना गुजारा करते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा और शहर की आबादी बढ़ने लगी, तो यहां लगे लगभग 4000 पेड़ों को काटकर प्लॉट तैयार किया जाने लगा। जब मेरी मुलाक़ात एक प्रॉपर्टी डीलर से हुई, तो मैंने उन्हें पेड़ों को काटने की बजाय उसे उखाड़कर अन्य खाली जगह पर लगाने का सुझाव दिया। लेकिन उन्होंने कहा कि इसमें बहुत खर्च आएगा। इसके बाद मैंने उन्हें कहा कि अगर पेड़ों को कहीं और नहीं लगा सकते, तो आप पेड़ों पर ही घर बना दीजिए।”
प्रॉपर्टी डीलर ने केपी सिंह की बात को अनसुना कर दिया। लेकिन केपी सिंह ने ठान लिया कि वह अब पेड़ पर ही घर बनाएंगे। इसलिए, उन्होंने उसी जगह पर एक प्लॉट खरीदकर उसमें लगे आम के पेड़ पर घर बनाने का फैसला किया।
केपी सिंह ने घर बनाने की शुरुआत साल 1999 में की थी और 2000 में यह बनकर तैयार हुआ। उन्होंने कहा, “जब मैंने घर बनाना शुरू किया, तब आम के पेड़ की लंबाई लगभग 20 फ़ीट थी। इसलिए उस समय मैंने सिर्फ दो मंजिला घर ही बनाया। अपने सपनों के इस घर को बनाने के लिए मैंने इस पेड़ की एक टहनी तक नहीं काटी है। मेरा घर जमीन से लगभग नौ फीट ऊंचाई पर है और पेड़ के तने के सहारे टिका हुआ है। आज इस पेड़ की लम्बाई 40 फ़ीट से भी ज्यादा है।”