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23/07/2017
How can one get to know that the lost thing will be found or not through the Krishna Murthy Paddhati Method?Let’s take a...
08/08/2016

How can one get to know that the lost thing will be found or not through the Krishna Murthy Paddhati Method?
Let’s take an example
On 9 Th April at 12:40 am, a person called me and said, “His new car has been stolen “and he wanted to know whether he would be able to find his lost car or not.
I told him to choose any number randomly from 1-249.
Details:
Date: 10 Th April 2016
Time: 12:40 am
Number -108
Place: Delhi
I prepared the kundali based on his chosen number. First of all I was inquisitive to know whether the question is right or not and whether it is being asked at right time or not.
1. As the question was related to vehicle, we shall see the 4 Th house and will check the fourth house is linked with ruling planet or not. I saw that the lord of fourth house was Jupiter and it was placed in the ruling planet at the time of question asked.
2. As the Moon is a factor of mind, Moon was in the nakshtara of Venus, it clearly shows that the question was related to vehicle in the mind of the person who was asking question.
3. The sub lord of 4th house was venus ,and venus mahadasha was running at the time of question asked , so It sures that the question was related to fourth house .Therefore following these three rules we can 100 per cent say that the question was related to vehicle and it was asked at correct time by the person.
Now we’ll see whether the car will be found or not-
For vehicle we observe fourth house and for profit eleventh house is seen.
First of all we’ll see the sub lord of fourth house and whose star that sub lord is sitting.
Observations based on above study:
⦁ The sublord of fourth house is Venus and that is in the star of Saturn and Saturn is retrogred , if the nakshtra owner of any house sit in the nakshtra of retrogred planet, the answer of any question becomes negative. Due to the retrograd position of Saturn we can say that the possibilities of finding lost vehicle are less.
⦁ The sub lord of eleventh house is Saturn which is sitting in the nakshtra of Mercury, Saturn is retrogres and mercury is related to 5,8,12 as well as with6, 8, 12 which reflects loss.
RESULT:
On the bases of above observations and study we can say that the possibility of finding lost vehicle is negligible
Aacharya Pankaj
call - 9540407086, 01145567086

Once I met a familiar woman. She was really worried about her son's studies and showed to me his horoscope. She told me ...
29/07/2016

Once I met a familiar woman. She was really worried about her son's studies and showed to me his horoscope. She told me that his son isn’t really into studies and whenever he tries to do so, he gets distracted and feels suffocated. So, his examination result is inevitably poor. When I looked at his horoscope,
I found that the sub lords of 4th house is venus sitting in 6th house . as well as the Lord of 5th house is jupiter were sitting is also in 6th house.
Then I understood the whole matter. Education is related to 4th and 5th house, and the direction of 6th house in horoscope is in west - north-west. So I felt that sub lord of house related to education is sitting in 6th house and Jupiter (which is related to knowledge and is also the lord of 5th house) is also sitting in 6th house.
Therefore, I realized the child must also be sitting in west - north-west direction for studying. So I sent an interior designer to make a vaastu map of the house and I found the same thing that the study table of the child was located in the west - north - west direction. It’s a place which is responsible for causing anxiety and depression. So I gave her a few solutions related to vaastu and also to shift her child’s study table to west - south-west (which is the place for study and knowledge). After 4 months, she came to me really happy that vaastu has made a significant change in her child’s life. Now he is studying well and getting good grades which are way more than his earlier. To her it was like a miracle and she was really joyous.
Aacharya Pankaj - 9540407086 , 01145567086

पितृदोष क्या है और इसका वास्तु से क्या संबंध है ? :-क्यों पितृ दोष के उपाय करने के बाध भी परेशानियां कम नहीं होती ?पितृद...
15/05/2016

पितृदोष क्या है और इसका वास्तु से क्या संबंध है ? :-
क्यों पितृ दोष के उपाय करने के बाध भी परेशानियां कम नहीं होती ?
पितृदोष क्या है और इसका वास्तु से क्या संबंध है ? :-
इस लेख में मै आपको बताऊंगा की जन्म कुंडली में पितृदोष होने के बाद हमारे घर में वास्तु दोष कहां उत्पन होता है, और कैसे इस वास्तु दोष को हटाकर हम पितृदोष के प्रभावों को 90% तक कम कर सकते हैं ?
सबसे पहले हम यह जानेंगे की पित्रदोष बनता कैसे हैं ? :-
सूर्य हमारे पितृ है, और जब राहु की छाया सूर्य पर पड़ता है (तब सूर्य यानि की सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काम हो जाता है ) यानि की जब राहू सूर्य के साथ बैठा हो , या राहु पंचम भाव में हो , या सूर्य राहु के नक्षत्र में हो , या पंचम भाव का उप नक्ष्त्र स्वामी राहु के नक्षत्र में हो तब ऐसी परिस्थिति में पितृदोष उत्पन होता है |
ऐसा माना जाता है कि परिवार में किसी की अकाल मृत्यु हो जाती है और उनका सही तरीके से श्राद ना किया गया हो तब उस परिवार में जन्म लेने वाले संतान में पितृ दोष आ जाता है ( खासकर पुत्र संतान मै ) जिसकी वजह से उन्हें अपने जीवन में काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है |
जिस व्यक्ति के जन्म कुंडली में है पूर्ण पितृदोष होता है उन्हें पुत्र संतान का सुख प्राप्त नहीं हो पाता है |
आपने ऐसे कई लोगों को देखा होगा जो कि मेडीकल के अनुसार स्वस्थ होते हैं लेकिन फिर भी संतान की प्राप्ति नहीं होती और डॉक्टर बताते हैं कि मेडिकल से उन्हें कोई परेशानी नहीं है फिर भी उन्हें संतान का सुख नहीं मिल पाता या कई लोगों के सिर्फ पुत्री ही होती हैं पुत्र धन की प्राप्ति नहीं हो पाता |
ऐसी परिस्थिति में उनकी कुंडली में पितृदोष जरूर होता है और उनके घर में ईशान कोण या नैत्रत्य कोण में शौचालय जरूर होता है |
कई बार पितृ दोष का प्रभाव इतना बढ़ जाता है व्यक्ति का सारा जमीन जायदाद एवं संपत्ति तक बिक जाता है और वह नई संपत्ति खरीद भी नहीं पाता|
आपने ऐसे कई लोगों को ऐसे देखा होगा या सुना होगा जो बहुत बड़े जमींदार होते थे उनके पास बहुत ज्यादा पैसा होता था लेकिन आज उनके पास कुछ भी नहीं है यहाँ तक की अपना घर तक नहीं है इसका मुख्य कारन पितृदोष होता है |
अब हम यह जानेंगे की पितृदोष का वास्तु से क्या सम्बन्ध है, :-
घर में पितृ का स्थान दक्षिण और पश्चिम का कोना है यानी कि नैत्रत्य कोण है । जन्म कुंडली में जब भी पूर्ण पितृदोष बनता है यानी की राहु (जो की नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत्र है ) मजबूत हो जाता है, और जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में नकारात्मक उर्जा मजबूत होता है उस घर में भी उसका प्रभाव देखने को मिलता है
घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह ईशान कौन से होता है और नकारात्मक उर्जा का प्रवाह नैत्रत्य कोण से होता है , जब जन्म कुंडली में पितृ दोष होता है यानी कि राहु मजबूत होता है ऐसी परिस्थिति में वह व्यक्ति जिस घर में रहता है उस घर के नैत्रत्य कोण में वास्तु दोष जरूर होता है
नैत्रत्य कोण के मुख्यतः वास्तु दोष निम्नलिखित हैं :-
नैत्रत्य कोण में शौचालय का होना , डस्टबिन का होना , नाली का होना , दक्षिण पश्चिम में गंदगी होना (जो की राहु की नकारात्मक उर्जा को 100 गुना बढ़ा देता है ),
दक्षिण पश्चिम में पृथ्वी की उर्जा होती है अगर यहां पर पेड़ - पौधे रखे हों या दीवार का रंग हरा हो तो भी पृथ्वी की उर्जा समाप्त हो जाती है जिससे भी यहाँ पर वास्तुदोष पैदा होते हैं ।
वैवाहिक जीवन पर प्रभाव :-
घर में नैत्रत्य कोण रिश्ते का स्थान भी है , और अगर यहां पर वास्तु दोष होता है तो वैवाहिक जीवन में बहुत सारी परेशानियां आती हैं यहां तक कि कई बार बात तलाक तक पहुंच जाती है और जिसका कोई खास वजह नहीं होता , अगर किसी व्यक्ति के घर में आपसी रिश्ते खराब हो और बिना किसी कारन के बार-बार झगड़े होते हैं तो नैत्रत्य कोण में वास्तु दोष जरूर होगा ।
आचार्य पंकज - 9540407086 , 01145567086
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14/04/2016

नकारात्मक से सकारात्मक की ओर:-

सकारात्मकता (Positivity) की शुरुआत आशा और विश्वास से होती है| किसी जगह पर चारों ओर अँधेरा है और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा और वहां पर अगर हम एक छोटा सा दीपक जला देंगे तो उस दीपक में इतनी शक्ति है कि वह छोटा सा दीपक चारों ओर फैले अँधेरे को एक पल में दूर कर देगा| इसी तरह आशा की एक किरण सारे नकारात्मक विचारों को एक पल में मिटा सकती है|

नकारात्मकता को नकारात्मकता समाप्त नहीं कर सकती, नकारात्मकता को तो केवल सकारात्मकता ही समाप्त कर सकती है| इसीलिए जब भी कोई छोटा सा नकारात्मक विचार मन में आये उसे उसी पल सकारात्मक विचार में बदल देना चाहिए|

उदाहरण के लिए अगर किसी विद्यार्थी को परीक्षा से 20 दिन पहले अचानक ही यह विचार आता है कि वह इस बार परीक्षा (Exam) में उत्तीर्ण नहीं हो पाएगा तो उसके पास दो विकल्प है – या तो वह इस विचार को बार-बार दोहराए और धीरे-धीरे नकारात्मक पौधे को एक पेड़ बना दे या फिर उसी पल इस नेगेटिव विचार को पॉजिटिव विचार में बदल दे और सोचे कि कोई बात नहीं अभी भी परीक्षा में 20 दिन यानि 480 घंटे बाकि है और उसमें से वह 240 घंटे पूरे दृढ़ विश्वास के साथ मेहनत करेगा तो उसे उत्तीर्ण होने से कोई रोक नहीं सकता| अगर वह नेगेटिव विचार को सकारात्मक विचार में उसी पल बदल दे और अपने पॉजिटिव संकल्प को याद रखे तो निश्चित ही वह उत्तीर्ण होगा|

कृष्णमूर्ति पद्धति प्रश्न कुंडली से कैसे पता करें कि कोई खोई हुई वस्तु मिलेगी या नहीं |9 अप्रैल रात को 12:40 पर मुझे एक ...
13/04/2016

कृष्णमूर्ति पद्धति प्रश्न कुंडली से कैसे पता करें कि कोई खोई हुई वस्तु मिलेगी या नहीं |
9 अप्रैल रात को 12:40 पर मुझे एक व्यक्ति का कॉल आया उसने बोला उसकी नई कार चोरी हो गई है , मिलेगी या नहीं
प्रश्न पूछने का समय :-
10 अप्रैल 2016
समय - 12:40 AM
नंबर – 108
स्थान - दिल्ली
तब मैंने उनसे 1 से लेकर 249 के बीच में कोई एक नंबर पूछा उन्होंने 108 नंबर बताया
मैंने 108 नंबर से प्रश्न कुंडली बनाई और सबसे पहले मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि प्रश्न सही पूछा जा रहा है या गलत और सही समय पर पूछा जा रहा है या नहीं |
1. प्रश्न वाहन से संबंधित था इसलिए चौथे घर को देखेंगे |
चौथे घर का संबंध रुलिंग प्लेनेट से बनता है या नहीं प्रश्न के समय चौथे घर का स्वामी बृहस्पति था जो कि रुलिंग प्लेनेट में था
२. चंद्रमा मन का कारक है चंद्रमा शुक्र के नक्षत्र में था और वाहन का कारक शुक्र होता है जिससे यह पता चलता है कि व्यक्ति के मन में वाहन से संबंधित प्रश्न था ।
3. चौथे घर का उपनक्षत्र स्वामी शुक्र है और प्रश्न के समय शुक्र की महादशा थी | जिससे यह पता चलता है कि प्रश्न चौथे घर से ही संबंधित था | अतः यह तीनों नियमों को देखते हुए हम यह शत प्रतिशत कह सकते हैं कि प्रश्न पूछने वाले व्यक्ति के मन में प्रश्न वाहन से ही संबंधित था और सही समय पर पूछा गया था
अब हम यह देखेंगे की गाड़ी मिलेगी या नहीं :-
इसके लिए चौथे घर और 11 वे घर को देखेंगे |
वाहन के लिए चौथे घर को देखते हैं और लाभ के लिए ग्यारहवें घर को देखते हैं
सबसे पहले चौथे घर का उपनक्षत्र स्वामी देखेंगे, और वह उपनक्षत्र स्वामी किसके नक्षत्र में बैठा है उसे देखेंगे ।
1. चौथे घर का उपनक्षत्र स्वामी शुक्र है जो कि शनि के नक्षत्र में बैठा है और शनि वक्री है अगर किसी घर का उपनक्षत्र स्वामी वक्री ग्रह के नक्षत्र में बैठ जाए तो प्रश्न का उत्तर नकारात्मक हो जाता है, यहां पर शनि वक्री होने की वजह से हम कहेंगे की वाहन के मिलने की संभावना नहीं है|
2. 11वे घर का उपनक्षत्र स्वामी शनि है और शनि बुध के नक्षत्र में बैठा है , शनि वक्री है और बुद्ध का संबंध 5,8, 12 से है और साथ ही साथ 6,8, 12 से भी है जोकि नुकसान को दर्शाता है अतः इन दोनों नियमों के देखने के बाद हम यह कहेंगे की खोये हुवे वाहन मिलने की सम्भवने न के बराबर है ||
आचार्य पंकज
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