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**जल्द शुरू कीजिये सागवान की खेती और कमाइए डबल मुनाफा** आजकल भारत के हर राज्य में किसान सागवान की सफलतापूर्वक खेती करते ...
06/01/2022

**जल्द शुरू कीजिये सागवान की खेती और कमाइए डबल मुनाफा**

आजकल भारत के हर राज्य में किसान सागवान की सफलतापूर्वक खेती करते हैं और अच्छी खासी कमाई करते हैं. तो सोचिए मत जल्द शुरू कीजिये सागवान की खेती और कमाइए डबल मुनाफा. वैसे तो किसान अपनी कमाई को डबल करने के लिए कई तरह की खेती को अपनाते हैं. लेकिन अगर वो यही चीज़ पूरी जानकारी के साथ करें, तो उनके लिए अधिक यह फायदेमंद साबित होगा. इसी के चलते आपको अपनी आय करोड़ों में करनी है, तो आपको सागवान की खेती करनी चाहिए.

सागवान की खेती लंबी अवधि के लिए बहुत लाभदायक है. इसे बर्मा टीक (Burma Teak) नाम से भी जाना जाता है. तो आइये आज हम आपको बताते हैं सागवान की खेती से जुड़ी हर एक जानकारी. बर्मा टीक या सागवान का पौधा दो तरह से तैयार किया जा सकता है पहला बीज संवर्धन (Seed Culture) और दूसरा ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) से. बीज संवर्धन प्रक्रिया पुरानी है. टिशू कल्चर प्रक्रिया सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले पौधों के उत्पादन का नया तरीका है.
मिट्टी -
सागवान की खेती के लिए भूमि की ऊंचाई अधिक होनी चाहिए, ताकि वर्षा का पानी बिल्कुल भी जमा न हो. खास बात यह है कि इसकी बर्मा टीक की खेती (Burma Teak Farming) किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है.साथ ही सागवान की खेती के लिए सूर्य का प्रकाश महत्वपूर्ण है. ध्यान रहे कि खेती क्षेत्र के ऊपर आसमान खुला हो.
तापमान -
सागवान के लिए 10 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा होता है. इसके साथ ही यह बहुत खराब मौसम की स्थिति में भी जीवित रह सकता है. क्योंकि यह विशेष रूप से हमारी भारतीय जलवायु के लिए तैयार किया जाता है.
बीज की मात्रा व उपचार -
एक एकड़ में रोपाई के लिए लगभग 1500-1800 clones का प्रयोग करें। सागवान वृक्ष के फल का छिल्का मोटा और सख्त होता है, इसलिए नर्सरी में बिजाई से पहले सागवान के बीजों की अंकुरन प्रतिशतता बढ़ाने के लिए बीजों का पूर्व उपचार किया जाता है। फलों को भिगोने और सुखाने के लिए पूर्व उपचार का पारंपरिक ढंग प्रयोग किया जाता है। इस विधि में बीजों को 12 घंटे के लिए पानी में भिगोया जाता है और फिर 12 घंटे के लिए धूप में सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया 10-14 दिनों तक बार बार दोहराई जाती है। बीजों के उपचार के लिए अन्य तेजाबी और गड्ढा वाले पूर्व उपचार के ढंग हैं।
बुवाई का समय और तरीका -
सागवान की खेती के लिए मानसून सबसे अच्छा मौसम है. रोपण के लिए 2 मीटर x 2 मीटर या 2.5 मीटर x 2.5 मीटर या 3 मीटर x 3 मीटर की दूरी का उपयोग करें. अंतरफसल में 4 मीटर x 4 मीटर या 5 मीटर x 5 मीटर की दूरी का उपयोग किया जा सकता है.
बुवाई की गहराई -
सागवान पूर्व अंकुरित स्टंप लगाने के लिए 45 सेमी x 45 सेमी x 45 सेमी का गड्ढा खोदें और गड्ढे को मिट्टी और अच्छी तरह से सड़ी गाय के गोबर से भरें. सबसे पहले खेतों की अच्छे से जुताई करें. गहरी जुताई करके खेत के पुराने फसल के अवशेष को खत्म कर देना चाहिए. इसके बाद खेत में 8 से 10 फ़ीट की दूरी रखते हुए दो फ़ीट चौड़े और डेढ़ फ़ीट गहरे गड्डो को तैयार कर लेना चाहिए. सागवान के पौधों को अधिक उवर्रक की जरूरत होती है . इसलिए इसके पौधों की रोपाई करने से एक माह पहले तक़रीबन 15 KG पुरानी गोबर की खाद के साथ 500 GM N.P.K.की मात्रा को मिट्टी में मिलाकर छोड़ दे. गड्डो को पौध रोपाई के एक माह पहले तैयार किया जाता है. सागवान के पौधों की रोपाई को बीज के रूप में करके पौधों के रूप में की जाती है. इसके पौधों की रोपाई के लिए लाये गए पौधे लगभग दो वर्ष पुराने होने चाहिए, क्योकि दो वर्ष पुराना पौधा अच्छे से वृद्धि करता है.
सिंचाई -
मानसून के महीने में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है. गर्मी के महीने में या तनाव की अवधि के दौरान सिंचाई करें. तनाव की अवधि के दौरान सिंचाई करने से उपज में काफी हद तक सुधार होता है. अधिक सिंचाई से पानी के फफोले और फंगस फैलेंगे.
विकास -
हालांकि किसान चाहें तो इसे ज्यादा समय तक भी खेत में रख सकते हैं. 12 वर्षों के बाद ये पेड़ समय के हिसाब से मोटा होता जाता है, जिससे पेड़ की कीमत भी बढ़ती चली जाती है. साथ ही किसान एक ही पेड़ से कई सालों तक मुनाफा कमा सकते हैं. सागवान का पेड़ एक बार काटे जाने के बाद फिर से बड़ा होता है और दोबारा इसे काटा जा सकता है. ये पेड़ 100 से 150 फुट ऊंचे होते हैं. रोपण के बाद पहले छह महीनों के दौरान यह पौधा लगभग 12 से 15 फीट बढ़ता है और दो साल बाद यह 30 फीट तक बढ़ सकता है.
​​सागवान से करोड़ों में कमाई -
बाजार में 12 साल के सागवान के पेड़ की कीमत 25 से 30 हजार रुपये तक है और समय के साथ इसकी कीमत में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है. ऐसे में एक एकड़ की खेती से 1 करोड़ रुपये की कमाई आराम से की जा सकती है. सागौन की लकड़ी में उच्च मात्रा में प्राकृतिक तेल होते हैं जो इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता में मदद करते हैं. और इसके तेल की कीमत से किसान अच्छी ख़ासी कीमत कमा सकते हैं.

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