10/09/2022
भाव संभालने से....
मन संभल जाता है
शब्द संभालने से....
वाणि संभल जाती है
व्यवहार संभालने से....
रिश्ते संभल जाते हैं
कभी भावों से शब्दों से बात से या मेरे व्यवहार से आपके हृदय को ठेस पहुचायी हो, आपका दिल दुखाया हो, तो हमारे इस व्यवहार के लिए हम हॄदय से क्षमा प्रार्थी हैं|
पर्युषण पर्व के समापन बेला पर हमारे ऐसे कठोर कृत्य को क्षमा करें।
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*खम्मामि सव्व जीवाणाम, सव्वे जीवा खमंतु मे।*
*मेत्ति मे सव्व भुदेसु, वैरं मझ्झं ण केण वि।*
मेरे और मेरे समस्त परिवार की ओर से
उत्तम क्षमा