07/10/2022
धमोरा, मंडावरा और हरदिया ठिकाने के पितृ पुरुष वीर योद्धा, जुझार ठाकुर उदय सिंह जी के 325 वे बलिदान दिवस पर भावभीनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि ।
आज धमोरा गांव के गढ़ परिसर में मनाए गए बलिदान दिवस समारोह में मुख्य अतिथि श्री वीरेंद्र प्रताप सिंह जी गुढ़ा पूर्व विधायक ने शिरकत की।
ठाकुर उदय सिंह जी का जन्म शेखावत वंश के प्रतापी शासक भोजराज जी,राजा टोडरमल जी जो कि उदयपुर शेखावाटी परगना के शासक थे के परिवार में हुआ। इतिहास प्रसिद्ध भोजराज जी और टोडरमल जी आपके क्रमशः परदादा और दादा थे। आपका जन्म ठाकुर भीम सिंह जी के घर हुआ। शेखावतों के सुप्रसिद्ध ठिकाने खंडेला पर आक्रमण होने पर खंडेला के राजा ठाकुर केसरी सिंह जी ने अपने परिवार के शेखावत सरदारों को रण निमंत्रण भेजा। ठाकुर उदय सिंह जी और उनके परिवार के भाई बांधवों ने रण निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया। मुगल सेना और खंडेला की सेना के बीच सांभर के नजदीक हरिपुरा देवली में युद्ध हुआ। यह युद्ध तीन दिन तक चला। इस युद्ध के दूसरे दिन अप्रतिम वीरता दिखाते हुए उदय सिंह जी वीर गति को प्राप्त हुए। इस युद्ध का वर्णन करते हुए केसरी सिंह समर नामक पुस्तक में लेखक हरिदास ने लिखा है कि ' भीम दो उदो भीम ज्यूँ मंडे ' अर्थात् भीम सिंह का सुपुत्र उदय सिंह महाभारत के भीम की तरह लड़ा।
इस तरह वर्णन लेखक ने किया है जो कि खुद युद्ध भूमि में उपस्थित था।
इसी घटना पर आधारित एक दोहा इतिहासकार सवाई सिंह जी धमोरा साहब ने लिखा था
" हरख हियो हरि सूं मिल्यो, और हरिपुर जंग।
पोता टोडरमाल रा, रंग उदयसिंह रंग ।।"
आपके वंशज धमोरा, मंडावरा और हरड़िया ठिकाने में निवास करते हैं।
उदय सिंह का ससुराल निम्बी जोधा था। आपके चार पुत्र संग्राम सिंह जी, जगमाल सिंह जी, बाघ सिंह जी और आयुवान सिंह जी थे। इस बाबत सवाई सिंह जी ने कवित लिखा है
उदय सिंह जी च्यार सूत, धरम धरा री ढाल।
धड़ बाघ संग्राम अरु, आईदान जगमाल।।
आपके लिए एक अज्ञात दोहा भी प्रचलित है
मंडावरा जलम्यो उदो, गढ़ निम्बी म तोरण।
हरिपुरा रण खेत रहयो, धमोरा में ओरण।।
आपके वंशजों ने समय समय पर मातृ भूमि रक्षार्थ प्राणों की आहुति देकर कुल परंपरा को अक्षुण्ण रखा है।
पुनश्च सादर नमन 🙏🙏