Mohan Vatika Nursery

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13/04/2026
राजस्थान में अप्रैल के महीने में मौसम ने अचानक 'रिवर्स गियर' लगा दिया है। तपती गर्मी और लू की बजाय, पूरे प्रदेश में इस स...
04/04/2026

राजस्थान में अप्रैल के महीने में मौसम ने अचानक 'रिवर्स गियर' लगा दिया है। तपती गर्मी और लू की बजाय, पूरे प्रदेश में इस समय लगातार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने 4 अप्रैल को भी प्रदेशवासियों को राहत नहीं दी।

आज 25 से अधिक जिलों के लिए मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और भारी ओलावृष्टि का महा-अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटों में बीकानेर और जैसलमेर समेत कई जिलों में ओले गिरे, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

26/03/2026

खैरथल सुखमनहेरी में 5 साल के बच्चे द्वारा कार चलाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पिता द्वारा चाबी सौंपे जाने के बाद बच्चे ने अनजाने में कार स्टार्ट कर डी... यह घटना सीसीटीवी में कैद हुई है और इस तरह की लापरवाही पर लोगों में नाराजगी है.

19/03/2026

रेगिस्तान की तपती रेत में भी हरियाली मुमकिन है! 🌵✨
कहते हैं कि अगर इरादा पक्का हो और दिमाग में 'जुगाड़' की शक्ति हो, तो बंजर जमीन से भी सोना उगाया जा सकता है। इस फोटो में आप देख सकते हैं कि कैसे एक भारतीय किसान ने पुरानी प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल करके एक शानदार 'ड्रिप इरिगेशन' (बूंद-बूंद सिंचाई) सिस्टम तैयार किया है।

It is said that if the intention is strong and the power of 'Jugad' is in mind, gold can be grown even from barren land. In this photo, you can see how an Indian farmer has created a brilliant 'Drip Irrigation' system using old plastic bottles.

कई लोगो के प्रश्न आये है कि बेलपत्र के फल तोड़ने के बाद खराब निकल रहे। कुछ तो काले पड़ कर खुद ही गिर रहे। आज का ये लेख इसी...
15/03/2026

कई लोगो के प्रश्न आये है कि बेलपत्र के फल तोड़ने के बाद खराब निकल रहे। कुछ तो काले पड़ कर खुद ही गिर रहे। आज का ये लेख इसी समस्या पर आधारित है। बेल (बिल्व) के फल का नीचे से काला होकर अंदर से सड़ना एक आम समस्या है, जो मुख्य रूप से फंगल इन्फेक्शन या पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है।

मुख्य कारण और समाधान

1) फ्रूट रॉट/फल सड़न

यह सबसे आम कारण है। यह Phoma या Phytophthora जैसे कवक के कारण होता है।

🔹 लक्षण: फल के निचले हिस्से जहाँ से वह फूल से जुड़ा होता है पर काले या भूरे धब्बे बनते हैं, जो धीरे-धीरे अंदर तक फैल जाते हैं और गूदे को काला व कड़वा कर देते हैं।
🔹 कारण: अधिक नमी, बारिश के बाद जलभराव, या मिट्टी में मौजूद फंगस।

2) बोरॉन की कमी

बेल के फल में इंटरनल नेक्रोसिस की समस्या बोरॉन नामक सूक्ष्म तत्व की कमी से होती है।

🔹 लक्षण: फल बाहर से ठीक दिख सकता है लेकिन अंदर से काला और सख्त होने लगता है। कभी-कभी फल बीच से फट भी जाते हैं।
🔹 पहचान: अगर फल पकने से पहले ही अंदर से काला पड़ रहा है, तो यह बोरॉन की कमी का संकेत है।

3) फल मक्खी/फ्रूट फ्लाई

कभी-कभी फल मक्खी फल के निचले नरम हिस्से में छेद करके अंडे दे देती है।

🔹 लक्षण: मक्खी के लार्वा अंदर ही अंदर फल को खाते हैं, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं और फल अंदर से काला होकर सड़ने लगता है।

👉 बचाव के उपाय

🔸 फंगल इन्फेक्शन : कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। पेड़ के नीचे जलभराव न होने दें। यदि फल सड़ने की समस्या (Fruit Rot) दिख रही है, तो हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें। यह छिड़काव तब तक जारी रखें जब तक कि नए फलों में कालापन आना बंद न हो जाए।

🔸 बोरॉन की कमी : सुहागा (Borax) 50-100 ग्राम प्रति वयस्क पेड़ की जड़ के पास मिट्टी में मिलाएं या बोरोसोल का छिड़काव करें। इसे साल में केवल दो बार देना पर्याप्त होता है। पहली बार जनवरी-फरवरी में फूल आने से पहले और दूसरी बार मई-जून में

🔸 साफ-सफाई : गिरे हुए सड़े फलों को बगीचे से दूर ले जाकर जमीन में गहरा दबा दें या जला दें ताकि संक्रमण न फैले।

🔸 ध्यान दें : उपचार का सबसे सही समय फूल आने के बाद और फल बनने की शुरुआती अवस्था होती है।

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फिटकरी का पानी पौधों में डालने को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत दावे किए जाते हैं—“100 से ज्यादा फल-फूल मिलेंगे”, “पौधा रॉकेट...
03/03/2026

फिटकरी का पानी पौधों में डालने को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत दावे किए जाते हैं—“100 से ज्यादा फल-फूल मिलेंगे”, “पौधा रॉकेट की तरह बढ़ेगा”—लेकिन सच यह है कि फिटकरी (Alum) कोई खाद नहीं है, बल्कि यह एक soil-corrector और disinfectant की तरह काम करती है।
सही तरह और सही पौधों पर इस्तेमाल करने से फायदा होता है, लेकिन गलत इस्तेमाल पौधे को नुकसान भी पहुँचा सकता है।
नीचे पूरी सच्चाई और सही तरीका दिया है 👇

🌿✨ फिटकरी का पानी पौधों में डालने के असली फायदे
✅ 1. मिट्टी का pH संतुलित करता है (slightly acidic बनाता है)
फिटकरी मिट्टी को हल्का अम्लीय बनाती है, जो इन पौधों को बहुत पसंद है:

गुलाब

हिबिस्कस (गुड़हल)

ब्लू अपराजिता

लेमन ग्रास

हाइड्रेंजिया

बेरीज़

साइट्रस पौधे

pH सही होते ही इन पौधों में
✔ फूल बढ़ते हैं
✔ कलियाँ जल्दी बनती हैं
✔ पत्तियाँ चमकदार होती हैं

✅ 2. मिट्टी में मौजूद फंगस और कीटाणुओं को कम करता है
फिटकरी में anti-fungal और anti-bacterial गुण होते हैं जिससे—
✔ जड़ों में सड़न कम होती है
✔ कीटाणु कम होते हैं
✔ मिट्टी हल्की व साफ रहती है

✅ 3. जड़ों की मजबूती और नमी पकड़ने की क्षमता बढ़ती है
इसके बाद पौधा
✔ ज्यादा फूल
✔ ज्यादा फल
✔ और तेज़ ग्रोथ
दिखाता है।
यही कारण है कि लोग कहते हैं—
“गमले में 100 की जगह 200 फूल आने लगे…”
(असल में पौधा स्वस्थ हो जाता है, इसीलिए फूल/फल खुद-ब-खुद बढ़ जाते हैं)

⚠️ लेकिन ध्यान रखें
फिटकरी को खाद समझकर ज़्यादा डालना पौधे को जला सकता है।
यह नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटैशियम (NPK) नहीं देता,
इसलिए इसे साथ में खाद देना जरूरी है।

🧴 फिटकरी का सही उपयोग तरीका
👉 तरीका 1: फिटकरी पानी बनाकर डालें

1 लीटर पानी

उसमें 2 ग्राम फिटकरी (एक मटर के दाने जितनी)

रातभर छोड़ दें

अगले दिन पौधे में डालें

⏰ हर 20–25 दिन में सिर्फ 1 बार डालें।

👉 तरीका 2: स्प्रे

1 लीटर पानी

1 ग्राम फिटकरी

पत्तियों और मिट्टी पर हल्का स्प्रे
⏰ महीने में 1 बार

❌ किन पौधों में कभी न डालें
फिटकरी मिट्टी को acidic करती है, इसलिए ये पौधे खराब हो सकते हैं:

मनी प्लांट

स्नेक प्लांट

पोथोस

एरिका पाम

ZZ प्लांट

पीस लिली

सक्यूलेंट्स

एलोवेरा

🌸 अगर फिटकरी के साथ यह 2 चीज़ें जोड़ दें → फूल दोगुने

फिटकरी पानी

सरसों खली / वर्मी कम्पोस्ट

गुड़ का पानी महीने में 1 बार

https://youtube.com/shorts/R8Ei-sl0OtE?si=iHjZEbB1aaQNWhmA
28/02/2026

https://youtube.com/shorts/R8Ei-sl0OtE?si=iHjZEbB1aaQNWhmA

चमकीले, गहरे लाल रंग के पतले छिलके और बड़े, आयताकार, हाथीदांत जैसे आकार के लिए प्रसिद्ध है। प्रति फल का वजन  लगभग 25 ग....

बारी 13 आमबांग्लादेश कृषि अनुसंधान संस्थान (BARI) द्वारा विकसित एक उच्च उपज देने वाली संकर किस्म (अमरापली पामर) है । यह ...
28/02/2026

बारी 13 आमबांग्लादेश कृषि अनुसंधान संस्थान (BARI)
द्वारा विकसित एक उच्च उपज देने वाली संकर किस्म (अमरापली पामर) है । यह एक लोकप्रिय, जल्दी फल देने वाली, रेशे रहित, मीठी और सुगंधित किस्म है। रोग प्रतिरोधक क्षमता और छोटे, आसानी से प्रबंधनीय वृक्ष आकार के कारण यह छोटे पैमाने पर घरेलू बागवानी और व्यावसायिक खेती दोनों के लिए उपयुक्त है।
प्रमुख विशेषताएं और लक्षण
दिखावट: मध्यम से बड़े आकार के, सुनहरे पीले फल, जिन पर अक्सर हल्का लाल/बैंगनी रंग का निशान होता है।
स्वाद और बनावट: असाधारण रूप से मीठा (लगभग 25 टीएसएस) और चिकना, दृढ़ और रेशे रहित गूदा।
उपज और वृद्धि: यह अपनी उच्च उपज क्षमता के लिए जाना जाता है। ग्राफ्टिंग द्वारा उगाया गया यह पौधा आमतौर पर 2-3 वर्षों में फल देने लगता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता: अत्यधिक रोग-प्रतिरोधी।
खेती: यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह पनपता है, इसे पूर्ण सूर्यप्रकाश (प्रतिदिन 6-8 घंटे) और अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है।
खेती संबंधी सुझाव
पानी देना: प्रारंभिक विकास चरण के दौरान नियमित रूप से पानी देना आवश्यक है, लेकिन मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए।
दूरी: उच्च घनत्व वाले रोपण के लिए उपयुक्त।
रखरखाव: इसे आम तौर पर कम रखरखाव वाला पौधा माना जाता है, लेकिन आकार बनाए रखने और नई वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए वार्षिक छंटाई से लाभ होता है।
बारी 13 को अक्सर इसके "मुंह में घुल जाने वाले" अनुभव के लिए पसंद किया जाता है और यह सीधे सेवन, जूस और डेसर्ट के लिए आदर्श है।

28/02/2026

अगर आप घर पर आसान तरीके से पौधे उगाना चाहते हैं, तो पत्ती से उगने वाले ये पौधे आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं। इन्हें ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती और ये जल्दी बढ़ते हैं।

� जेड प्लांट (Jade Plant)

जेड प्लांट को धन और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसकी मोटी पत्तियों को मिट्टी में लगाने से नया पौधा आसानी से तैयार हो जाता है। यह पौधा रोशनी पसंद करता है लेकिन सीधी धूप से बचाकर रखें। कम पानी में भी यह लंबे समय तक जीवित रहता है।

� स्वीट हार्ट प्लांट (Sweet Heart / Hoya kerrii)

स्वीट हार्ट प्लांट अपनी दिल के आकार की पत्तियों के कारण बेहद आकर्षक होता है। इसे एक ही पत्ती से भी उगाया जा सकता है, यह पौधा हल्की धूप और अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी में अच्छे से बढ़ता है।

� पत्थरचट्टा (Bryophyllum)

पत्थरचट्टा एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है। इसकी पत्तियों को मिट्टी में लगाने से नया पौधा बन जाता है। यह पौधा न केवल उगाने में आसान है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी इसे विशेष बनाते हैं।

� स्नेक प्लांट (Snake Plant / Sansevieria)

स्नेक प्लांट एक अत्यंत लोकप्रिय इनडोर पौधा है, जो हवा को शुद्ध करने के लिए जाना जाता है। इसकी मोटी और लंबी पत्तियों को काटकर मिट्टी या पानी में लगाने से नया पौधा उगाया जा सकता है। यह कम रोशनी, कम पानी और कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ता है। बेडरूम और ऑफिस के लिए यह एक आदर्श पौधा माना जाता है।

� कलांचो (Kalanchoe)

कलांचो एक सुंदर फूलों वाला सक्सुलेंट पौधा है, जिसे पत्ती द्वारा आसानी से उगाया जा सकता है। यह पौधा कम पानी और अच्छी धूप में भरपूर फूल देता है और घर की बालकनी या खिड़की के पास रखने के लिए उपयुक्त है।

� अगर यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो पोस्ट को लाइक करें और हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें ताकि आप रोजाना ऐसे ही उपयोगी पौधों और गार्डनिंग टिप्स की जानकारी पा सकें, धन्यवाद �

26/02/2026

चीकू का पेड़ अपने स्वादिष्ट फल के साथ-साथ हरियाली और छांव से घर-बगीचे की शोभा बढ़ाता हैं। इस पोस्ट में हम चीकू में फूल आने के बाद फल न लगने के मुख्य कारणों और उनके प्रभावी उपायों को सरल भाषा में समझाएंगे, ताकि आप अपने पेड़ को बेहतर फल देने के लिए तैयार कर सकें।

🔰 चीकू में फूल आते हैं, पर फल क्यों नहीं लगते ?

1️⃣ परागण की कमी :
चीकू के फूलों में नर और मादा भाग होते हैं, लेकिन इनका परागण कीड़ों जैसे मधुमक्खी या हवा से होता हैं। अगर परागण पूरा नहीं हुआ तो फूल गिर जाते हैं और फल नहीं बनते।

💠 समाधान :
बगीचे में मधुमक्खी जैसे परागण मित्र कीड़े आकर्षित करने वाले फूल लगाएं जैसे गेंदा और तुलसी। पौधे पर पानी का छिड़काव न करें ताकि परागण में बाधा न आये।

2️⃣ अत्यधिक नमी या पानी का असंतुलन :
फूल के समय ज्यादा पानी देने से फूल झड़ सकते हैं।

💠 समाधान :
फूल आने के समय सिंचाई संतुलित मात्रा में करें। जल निकासी ठीक रखें, पानी जमा न होने दें।

3️⃣ पोषक तत्वों की कमी :
पौधा फूल तो देता हैं, पर अगर उसमें जरूरी पोषण न मिले तो फल बनने की शक्ति नहीं रह जाती हैं।

💠समाधान :
फरवरी-मार्च और जुलाई-अगस्त में यह खाद दें-
🔅 गोबर की सड़ी खाद – 5 से 7 किलो
🔅 नीम खली – 250 ग्राम
🔅 सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) – 125 ग्राम
🔅 सिवे पोटाश – 50 ग्राम
🔅 बोनमील या चूना – 50 ग्राम

ज़िंक और बोरॉन की कमी को पूरा करने के लिए फूल आने से पहले 0.2% बोरॉन और 0.5% जिंक सल्फेट का फोलियर स्प्रे करें।

4️⃣ पेड़ की कटाई-छंटाई न होना :
पुरानी टहनियाँ ज्यादा होने पर नई वृद्धि रुक जाती हैं और फलन कम होता हैं।

💠समाधान :
हर 2 साल में एक बार फरवरी-मार्च या बरसात में हल्की कटाई-छंटाई करें, ताकि नई शाखाएँ निकलें और फलन बढ़े।

5️⃣
तापमान और मौसम :
चीकू को गर्म और नम मौसम चाहिए, फूल के समय अगर अचानक तापमान गिर जाये या तेज हवा हो तो फूल झड़ सकते हैं।

💠समाधान :
ऐसे समय पेड़ के आस-पास नमी बनाए रखें और ठंडी हवा से बांस की जाली या मल्चिंग द्वारा बचाव करें।

🔰 फूल झड़ने से बचाने के लिए सुझाव :-

1️⃣ प्लानोफिक्स (NAA) 10–20 PPM का छिड़काव फूल आने के समय करें।

2️⃣ अगर पेड़ में कीड़े या रोग हैं, तो नीम-ऑयल या जैविक कीटनाशकों का उपयोग करे.

25/02/2026

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Carol Schulz, Nitin Hake, Ajit Singh, Ruwanthi Wasana, Drx Sanchit Kumar, Rahul Mahlawat

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Khairthal
301404

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