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22/01/2015

The face mapping is a combination of the ancient Chinese medicine and the Ayurveda, explaining how certain parts of your face are tightly connected with other

06/07/2014

बाज लगभग ७० वर्ष जीता है, पर अपने जीवन के ४०वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं। पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है और शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं। चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है। पंख भारी हो जाते हैं और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते हैं।

भोजन ढूढ़ना, भोजन पकड़ना और भोजन खाना, तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं। उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं, या तो देह त्याग दे, या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे, या स्वयं को पुनर्स्थापित करे, आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में।
मन अनन्त, जीवन पर्यन्त

जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं, तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा। बाज पीड़ा चुनता है और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है। वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, अपना घोंसला बनाता है, एकान्त में और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया।

सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है, अपनी चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं पक्षीराज के लिये। तब वह प्रतीक्षा करता है चोंच के पुनः उग आने की। उसके बाद वह अपने पंजे उसी प्रकार तोड़ देता है और प्रतीक्षा करता है पंजों के पुनः उग आने की।
नये चोंच और पंजे आने के बाद वह अपने भारी पंखों को एक एक कर नोंच कर निकालता है और प्रतीक्षा करता पंखों के पुनः उग आने की।

१५० दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा और तब कहीं जाकर उसे मिलती है वही भव्य और ऊँची उड़ान, पहले जैसी नयी। इस पुनर्स्थापना के बाद वह ३० साल और जीता है, ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।
प्रकृति हमें सिखाने बैठी है,

25/06/2014

दो भाई साथ साथ खेती करते थे।मशीनों की भागीदारी और चीजों का व्यवसाय किया करते थे .
चालीस साल के साथ के बाद एक छोटी सी ग़लतफहमी की वजह से उनमे पहली बार झगडा हो गया था झगडा दुश्मनी में बदल गया था.एक सुबह एक बढाई बड़े भाई से काम मांगनेआया.बड़े भाई ने कहा “हाँ ,मेरे पास तुम्हारे लिए काम हैं. उस खेत की तरफ देखो ,वो मेरा पडोसी हैं. यूँ तो वो मेरा भाई हैं. पिछले सप्ताह तक हमार ेखेतो के बीच घास का मैदान हुआ करता था. पर मेरा भाई बुलडोजर ले आया और अब हमारे खेतो के बीच ये खाई जरुर हैं. जरुर उसने मुझेपरेशान करने के लिए ये सब किया होगा.
अब मुझे उसे मजा चखना है. तुम खेत के चारो तरफ बाड़ बना दो ताकि मुझे उसकी शक्ल भी ना देखनी पड़े.
”“ठीक हैं”, बढाई ने कहा.उसने बढाई को सारा सामान लाकर देदिया और खुद शहर चला गया. शाम को लौटा तो बढाई का काम देखकर भौचक्का रह गया.
बाड़ की जगह वहा एक पुल था जो खाई को एक तरफसे दूसरी तरफ जोड़ता था.इससे पहले की बढाई कुछ कहता ,उसका छोटा भाई आ गया.“तुम कितने दरिया दिल हो , मेरे इतने भला बुरा कहने के बाद भी तुमने हमारे बीच ये पुल बनाया, कहते कहते उसकी आँखे भर आई और दोनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगे.
जब दोनों भाई सम्भले तो देखा की बढाई जा रहा था.रुको मेरे पास तुम्हारे लिए और भी कई काम हैं,बड़ा भाई बोला. मुझे रुकना अच्छा लगता ,पर मुझे ऐसे कई पुल और बनाने हैं,बढाई मुस्कुराकर बोला और अपनी राह को चल दिया.
दिल से मुस्कुराने क लिए जीवन में पुल की जरुरत होती हैं खाई की नहीं. छोटी छोटी बातों पर अपनों से न रूठे.
जिन्दगी बहुत खुबसूरत है इसे खुसी से जियो।।

21/06/2014
JAI..JAI...SHREE...RADHE.......
14/06/2014

JAI..JAI...SHREE...RADHE.......

जय ...श्री ...कृष्णा...
06/05/2014

जय ...श्री ...कृष्णा...

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