Vastu cure

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19/05/2017

घर से अनुपयोगी और अनावश्यक चीज़ों को हटाइये
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सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि घर से कबाड़ या अनुपयोगी और अनावश्यक चीज़ों को हटाना कहाँ तक तर्कसंगत है | कुछ लोगों का मानना है कि ऐसा करना कतई आवश्यक नहीं है जबकि कुछ लोगों का तर्क इसके पक्ष में होता है | जहाँ तक अनुपयोगी चीज़ों को हटाने की बात है,यह एक अत्यंत आवश्यक कार्य है जिसे हमें हर हाल में शीघ्रतापूर्वक निबटा लेना चाहिए | हमारे मस्तिष्क में कंप्यूटर की तरह सीमित जगह होती है | इस जगह को हमें बेकार की बातों,पुरानी अनावश्यक दुःखद यादों से नहीं भरना चाहिए | जब हमारा मस्तिष्क इन सब बेकार की बातों से मुक्त होता है तब हम कहीं बेहतर तरीके से सोंच-समझ सकते हैं और अपने और दूसरों के जीवन को सही दिशा दे सकते हैं |आप माने या ना मानें लेकिन यह सच है कि हमारे देश में ज्यादातर घरों में अनावश्यक वस्तुओं का जमावाड़ा अवश्य होता है | कई बार हम अनुपयोगी और अनावश्यक चीज़ों को घर से बाहर फेंकने के बजाय अपने घर में दुछत्ती पर या कमरे में किसी टांड़ पर फेंक कर निश्चिन्त हो जाते हैं | हम इस बात से बेखबर रहते हैं कि उक्त स्थान पर पड़ी वह अनावश्यक वस्तु हमें कितनी हानि पहुँचा सकती है | उस बेकार की वस्तु के दुष्प्रभाव स्वरूप हमारे कार्यों में बिलम्ब होने लगता है और इससे हमारा मानसिक संतुलन भी बुरी तरह प्रभावित होता है | अनुपयोगी वस्तु किस किस्म की है,कैसी है और उसका क्या महत्त्व है इन सब तथ्यों पर हमारे मस्तिष्क का संतुलन या असंतुलन निर्भर करता है | कभी-कभी कोई मामूली सी लगने वाली चीज़ ही किसी बड़ी विपत्ति का कारण बन जाती है | ऐसा नहीं है कि निर्जीव चीज़ का कोई महत्त्व ही नहीं है | घर में रखी हर वस्तु अपने उपयोग का इंतज़ार किया करती है और सच भी है कि समय-समय पर हम उन चीज़ों का उपयोग भी करते हैं | घर में बेकार पड़ी चीज़ों के उपयोग का भी वक़्त आ जाता है |
किसी घर में काफी रद्दी कागज़ और अखबारों का जमावाड़ा था जो कई वर्षों का था | घर के मालिक ने उन अख़बारों और रद्दी कागज़ों को इस लालच से नहीं हटाया था कि ज्यादा रद्दी एकत्र हो जाने पर कबाड़ी को बेचने पर काफी लाभ होगा | यही नहीं उन्होंने घर के काफी वर्षों से फ्यूज हुए बल्बों को भी सहेजकर रखा था | अब इसे उनकी बदनसीबी कहें या विधि का विधान,कि किसी गंभीर बीमारी के कारण उनका एकलौता आठ वर्ष का पुत्र चल बसा | घर में पता नहीं कैसे इतनी विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि उनके पास गैस खत्म हो जाने पर गैस का सिलेंडर खरीदने के भी पैसे नहीं बचे | तब उनकी पत्नी ने ईंटों का चूल्हा बनाकर उन्हीं अखबारों और रद्दी कागज़ों को जलाकर खाना बनाया |
तो कहने का तात्पर्य यह है कि प्रत्येक वस्तु,सजीव या निर्जीव अपने उपयोग के समय का इंतज़ार किया करती है | इसलिए घर में ऐसी कोई भी चीज़ ना रखें जो हमारे उपयोग में तो आए परन्तु हमरी स्थिति बिगड़ने पर | फ़टी-पुरानी,टूटी-फूटी वस्तुएं एवं कपड़े आदि निर्धनता को दर्शाते हैं | घर में ऐसी किसी भी वस्तु को रखने से बचें जो कि गरीबी का एहसास कराती हो | टूटे-फूटे-चिटके गिलास या कप घर से तुरंत हटा दें | फटे कपड़ों को दुरुस्त करा लें या किसी गरीब को दान में दे दें | ध्यान रखें,ऐसी चीज़ों का दान निर्धन या असहाय व्यक्ति को ही दें | किसी सामर्थ्यवान व्यक्ति को भूलकर भी किसी पुरानी वस्तु या कपड़ों का दान न करें | धारदार और नुकीली चीज़ों को छिपाकर रखना चाहिए | आप भले ही सस्ते कपड़े पहनें लेकिन आपके कपड़े सही हालत में और आपके और दूसरों के मन को प्रसन्नता देने वाले होने चाहिए | आपके कपड़ों और आपके घर की वस्तुओं को देखने से किसी के भी मन में नकारात्मक विचार नहीं आने चाहिए | कुल मिलाकर आप यह समझ लें कि आपको और आपके घर को देखने से सभी को प्रसन्नता का एहसास होना अति आवश्यक है | ऐसा आपकी उन्नति के लिए बहुत ज़रूरी है |
घर में यदि काफी समय से किसी भी प्रकार का कोई इलेक्ट्रॉनिक या बिजली का उपकरण बिना किसी उपयोग के रखा हुआ है तो उसका निबटारा तुरंत करें | ऐसी वस्तुएँ कार्यों में बाधा का कारण बनती हैं | काम में आने वाली प्रत्येक वस्तु को झाड़-पोंछकर साफ-सुथरा और चालू हालत में रखना चाहिए | कपड़ों,इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों आदि के अनुपयोगी बिलों को तुरंत हटा दें | यदि ये निकट भविष्य में काम आने वाले हों तो सहेजकर तभी तक रखें जब तक इनकी आवश्यकता पड़ती है,अन्यथा इन्हें तुरंत हटा दें |
घर के एक-एक कमरे को व्यवस्थित करें और अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करते हुए अनावश्यक एवं अनुपयोगी वस्तुओं को हटाते रहें | यह प्रक्रिया आपको जब-तब दोहरानी चाहिए | बीते वर्षों के तिथि वाले कैलेंडर हटा दें | वर्तमान कलेंडर ही रखें | नीरसता से बचने के लिए और जीवन में उत्साह को कायम रखने के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार घर में नई और उपयोगी वस्तुओं को अवश्य लाएं | घर में किसी भी महत्वपूर्ण वस्तु को किसी अच्छे दिन ही खरीदकर लाएं | रोजमर्रा की वस्तुओं को भी खरीदने में उतावले न बनें | जिस वस्तु को जिस दिन खरीदने की बात शास्त्रों में कही गई हो,उसका अवश्य पालन करें | जहाँ तक हो सके शुभ मुहूर्त का अवश्य ध्यान रखें | प्रयास करें कि घर के कबाड़ का निबटारा प्रत्येक सप्ताह या प्रत्येक माह में करते रहें | अपने घर के आस-पास भी साफ-सुथरा माहौल बनाए रखने का प्रयास करें |

04/05/2017

घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा का दोष-
घर का दक्षिण-पश्चिम कोण बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है | यह क्षेत्र स्थायित्व से जुड़ा है | घर के लोगों के आपसी संबंधों के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जाता है | इस क्षेत्र में किचन और टॉयलेट का होना एक बहुत ही बड़ा दोष माना जाता है | इसके अतिरिक्त एक और बड़ा दोष है-इस दिशा की फर्श का नीचा होना | इस दोष के फलस्वरूप घर के लोगों के आपसी संबंधों में बिगाड़ पैदा होता है | यही नहीं,बिजनेस पर भी इस दोष का काफी बुरा असर पड़ता है | इस दिशा की फर्श को यथासंभव ऊँचा करा लें | यहाँ बने किचन में मार्बल का प्रयोग करने से काफी हद तक दोष का परिमार्जन हो जाता है | टॉयलेट को भी अन्य उपाय करके शीघ्र ठीक करा लेना चाहिए | दक्षिण-पश्चिम कोण को यथासम्भव भारी रखना चाहिए | भारी सामान रखने के लिए यह स्थान उचित रहता है |इस स्थान को कभी भी खाली और हल्का नहीं रखना चाहिए | घर के अन्य क्षेत्रों की तरह ही इस स्थान को भी साफ़-सुथरा रखना चाहिए |

मछलीघर या फिश एक़्वेरियम   वास्तु के अनुसार मछली को एक़्वेरियम में पालना या घर या कार्यालय में मछली का प्रतिरूप रखना अतिसौ...
07/04/2017

मछलीघर या फिश एक़्वेरियम

वास्तु के अनुसार मछली को एक़्वेरियम में पालना या घर या कार्यालय में मछली का प्रतिरूप रखना अतिसौभाग्यशाली माना जाता है | कहा जाता है कि इससे परेशानियों का अंत हो जाता है और धन-समृद्धि का आगमन होता है | यही नहीं,इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य में भी आश्चर्यजनक रूप में काफी सुधार होता है | मानसिक चिन्ताएँ और बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को यह प्रयोग काफी हद तक नियंत्रित कर लेता है | मछली एक निहायत निरीह और मूक प्राणी है | किन्तु यदि आप मछली के प्रति प्रेम प्रदर्शित करते हैं और उसका पालन पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रेमपूर्वक करते हैं तो आपको कुछ ही समय में उसके लाभ दृष्टिगोचर होने लगेंगे | बाज़ार में बिकने आई मछली को यदि आप खरीदकर पुनः नदी या ताल के पानी में छोड़ देते हैं तो मौत के मुँह में जाने से बची उस मछली की दुआओं से आपका भविष्य उज्जवल हो जाता है | आपकी परेशानियों के बादल छँट जाते हैं और आप उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहते हैं |
घर या कार्यालय में एक़्वेरियम रखने से दिमाग की उत्तेजना और चिड़चिड़ापन दूर होकर खुश रहने की भावना का विकास होता है | बड़े-बड़े शॉपिंग माल या प्राइवेट संस्थाओं से लेकर छोटे स्तर की बिज़नस संस्थाओं में भी अब एक़्वेरियम रखने पर ध्यान दिया जाने लगा है | मनुष्य आदिकाल से ही प्रकृति के नज़दीक रहा है और इसीलिए उसने प्रगति के कई सोपान चढ़े भी हैं | किन्तु आज का मानव प्रकृति से दूर होता जा रहा है | इसमें काफी हद तक कई प्रकार के सामजिक और आर्थिक दायित्वों के निर्वहन की मज़बूरियाँ होती हैं | इसलिए विशेषज्ञों ने प्रकृति के नज़दीक रहने के कई प्रकार के तरीकों की खोज की और उन्हीं में से एक है-एक़्वेरियम | ऐसे स्थान,जहाँ काफी लोगों का आवागमन होता रहता है एक़्वेरियम रखने के लिए पूर्णतः उपयुक्त होते हैं | इससे कार्य का दबाव काफी कम हो जाता है | एक़्वेरियम में इधर-उधर घूमती रंग-बिरंगी मछलियाँ हमारे रक्त के दबाव को काफी सन्तुलित कर देती हैं और हृदय के कम्पन्न को उचित स्तर पर ले आती हैं | बड़ी उम्र के लोगों के लिए एक़्वेरियम किसी वरदान से कम नहीं है | इससे उनमे जीने की इच्छा प्रबल हो उठती है और वे निराशा के घोर अँधेरे से शीघ्र उबर जाते हैं | अस्पतालों में एक़्वेरियम की उपस्थिति मरीजों को मानसिक शांति प्रदान करती है | मानसिक रोगियों के लिए एक़्वेरियम बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है | ऐसे मरीज़ जिनमें जीने की आस लगभग समाप्त हो चुकी है,उनके लिए भी यह काफी लाभदायक है |
यदि आप सही प्रकार से एक़्वेरियम को अपने घर में उचित स्थान पर स्थापित करते हैं तो आपके कॅरियर और धन सम्बन्धी विषयों में काफी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं | ज्यादातर इसे मुख्य द्वार के समीप ही रखा जाता है ताकि आते-जाते समय यह लोगों की दृष्टि में आ सके और देखने वाले व्यक्ति को इसका उचित लाभ मिल सके | घर में विवाह योग्य व्यक्तियों के लिए भी एक़्वेरियम काफी लाभप्रद सिद्ध होता है | यह आश्चर्यजनक रूप में ऐसे व्यक्तियों के सौभाग्य में काफी बढ़ोत्तरी करता है और उचित जीवन-साथी की शीघ्र प्राप्ति कराता है |
एक्वेरियम सिर्फ मन को प्रसन्नता नहीं देते बल्कि इनसे घर के सदस्यों के ऊपर आने वाली विपत्तियां टलती हैं एवं घर में धन-संपत्ति के आगमन में निरंतरता बनी रहती है। एक्वेरियम में मछलियों की संख्या का विशेष महत्व है। फेंगशुई के अनुसार एक्वेरियम में मछलियों की संख्या कम से कम नौ होनी चाहिए। आठ मछलियां सुनहरे रंग की होनी चाहिए जबकि एक मछली काले रंग की। ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की संख्या नौ बतायी गयी है। संभव है कि इन्हीं कारणों से नौ मछलियां एक्वेरियम में रखने की बात कही गयी है।
जब कभी कोई मछली मर जाये तो उसे एक्वेरियम से बाहर निकाल दें और उसकी जगह नई मछली लाकर रख दें। ध्यान रखें कि जिस रंग की मछली मरी हो उसी रंग की नई मछली हो।जब कोई मछली मरती है तो अपने साथ घर पर आने वाली विपत्तियों को साथ लेकर चली जाती है। इसलिए एक्वेरियम में मछली के मरने पर दुःखी न हों। मछलियों की उछलकूद देखने से मन को शांति मिलती है और यह अपने साथ सारे अपशकुन लेकर चली जाती हैं।
अक्वेरियरम को पूर्व, उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व में रखें। इसे शयनकक्ष अथवा रसोईघर में नहीं रखना चाहिए। इससे संपत्ति की हानि होती है। दांपत्य जीवन में आपसी प्रेम बनाये रखने के लिए इसे मुख्य द्वार के बायीं ओर रखें। दायीं ओर रखने से घर के पुरूष का मन चंचल होता है और परायी स्त्रियों के प्रति उनका आकर्षण बढ़ता है। दिशा का निर्धारण करने का तरीका यह है कि घर के अंदर मुख्य द्वार की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं। जो भाग आपके दाएं होगा उसे दाहिना भाग कहेंगे और दूसरा भाग बायां कहलाएगा।
अगर घर में बड़ा एक्वेरियम रखने की जगह ना हो तो आप छोटा सा एक्वेरियम दो मछलियों वाला भी रख सकते हैं। यह प्यार का प्रतीक माना जाता है। साथ ही आप क्रिस्टल की बनावटी मछलियों का जोड़ा बेडरूम में रख सकते हैं। इसे घर के उत्तर पूर्व, उत्तर या पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए।
गोल्डफिश- गोल्डफिश को सबसे अधिक पवित्र और संपन्नता देने वाला माना जाता है। सोने की प्रतीत होने वाली यह मछली आपके जीवन में भी सोने की चमक बिखेर देगी।
एरोवाना मछली - एरोवाना को सबसे शुभ मछली माना जाता है। मान्यता है कि यह मछली अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख, धन और शक्ति का प्रतीक है। एरोवाना मछली बुरी शक्तियों को हटाती है।अगर आप जिंदा एरोवाना मछली ना पाल पाएं तो आपको मुंह में सिक्का लिए हुए सुनहरी एरोवाना मछली की मूर्ति रखनी चाहिए। इसे भी घर के उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए।

16/02/2017

मकान से सम्बंधित वास्तु के अति-लाभकारी नियम
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-विनीत कुमार श्रीवास्तव
# किसी भी नए मकान में पुरानी लकड़ी नहीं लगानी चाहिए |पुराने घर के दरवाजे,खिड़की आदि लोग काफी सस्ते दामों में बेच देते हैं लेकिन इन्हें यदि आप अपने नए बने घर में लगाते हैं तो वास्तु के काफी नुकसानदेय परिणाम आपको मिल सकते हैं |
# किसी भी मकान में उपयोग में लाई गई लकड़ी दूसरे मकान में लगाने से गृहस्वामी की संपत्ति का नाश होता है और उसका जीवन अशांत हो जाता है |कभी-कभी यह स्थिति इतनी विकराल हो जाती है की गृहस्वामी की मृत्यु तक हो जाती है |
# भवन में एक,दो या तीन जाति की लकड़ी का प्रयोग खिड़की,दरवाजों में करना वास्तु के नियमानुसार मान्य है किन्तु इनसे अधिक प्रकार की लकड़ियों का प्रयोग करने से वह घर अनेकों प्रकार के भय देने वाला सिद्ध होता है |
# मकान में यदि एक ही जाति की लकड़ी का प्रयोग दरवाजों आदि में किया जाता है तो यह अति उत्तम होता है |दो जाति की लकड़ी का प्रयोग मध्यम और तीन जाति की लकड़ी का प्रयोग अधम होता है |
# पूरे घर में केवल सफ़ेद रंग करने से नीरसता पैदा होती है इसलिए अपने विवेकानुसार वास्तु नियमों को ध्यान में रखते हुए अन्य रंगों का चयन करना चाहिए |सफ़ेद रंग प्रारम्भ में तो काफी अच्छा लगता है किन्तु बाद में नीरसता का आभास कराता है |इसलिए पूरे घर को सफ़ेद रंग कराने से बचें |
# भवन की अधिक ऊँचाई वास्तु दोषों में कमी लाती है |छोटे और कम ऊँचाई के घरों में वास्तु दोष की संभावना काफी हद तक होती है |
# किसी भी प्रकार के नए द्रव्य में यदि पुराने द्रव्य का मिश्रण किया जाता है तो यह मकान के लोगों में कलह कराने वाला सिद्ध होता है |कभी भी नए घर में पुराने ईंटें,गिरिल या दरवाजे,खिड़की आदि नहीं लगाने चाहिए |
# अग्नि से जले द्रव्य से जो घर बनाया जाता है उसमे गृहस्वामी निवास नहीं कर पाता है |

09/02/2017

वास्तु के प्रयोग संबंधी दोष एवं उनसे उत्पन्न होने वाली परेशानियाँ

कभी-कभी हम व्यवहारिक रूप में कुछ ऐसे कार्य करते हैं जिनका हमारे ऊपर बहुत ही गलत प्रभाव पड़ता है |हमें यह बिलकुल ही नहीं पता होता है कि हम जाने-अनजाने क्या-कुछ गलत कर रहे हैं |यहाँ मैं आपको प्रयोग संबंधी कुछ ऐसे दोषों से अवगत करा रहा हूँ जो कि वास्तु के नियमों के अनुसार गलत होते हैं और आपके स्वास्थ्य,धन,सम्बन्ध और आपकी चहुँमुखी उन्नति के रास्ते में रूकावट बन जाते हैं |ऐसे कुछ दोष निम्नवत हैं-
(1)आपके घर के मुख्य द्वार के सामने,बाहर या अंदर की ओर यदि किसी भी प्रकार की बाधा या रूकावटकारी वस्तु है तो आप उस रुकावटकारी वस्तु को तुरन्त हटा दें अन्यथा आपकी उन्नति में आश्चर्यजनक रूप में व्यवधान पैदा हो जाएगा |यही नहीं,इस दोष का असर आपके धन,स्वास्थ्य एवं आपसी संबंधों पर भी पड़ेगा |
(2)हमेशा पूर्व या दक्षिण की तरफ सिर करके सोने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और विचार उत्तम होते हैं |इसके साथ ही धन लाभ भी होता है |
(3)झाड़ू एवं पोंछा घर में इस प्रकार रखें कि उन पर किसी की नज़र न पड़ने पाए अर्थात ये दोनों चीज़ें आपकी नज़र में हर समय नहीं आनी चाहिए |ये दोनों नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती हैं |भोजन करते समय या घर से कहीं बाहर जाते समय इनका सामने पड़ना अच्छा नहीं माना जाता |
(4)उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से मृत्यु-तुल्य कष्ट प्राप्त होता है |वायु-विकार बढ़ता है और अजीबोगरीब बीमारियाँ शरीर को लग जाती हैं |इसके साथ ही धन-नाश भी होता है |
(5)पश्चिम दिशा की तरफ सिर करके सोने से अनावश्यक चिंता उत्पन्न होती है और बुरे-बुरे स्वप्न आते हैं |
(6)किसी भी ऐसे दम्पति का जो अभी गृहस्थ जीवन के सुख से निवृत नहीं हुए हैं,ईशान कोण में सोना भयंकर रोगकारक सिद्ध होता है |पूर्व एवं उत्तर दिशा के बीच का कोण ईशान कोण कहलाता है |यह दिशा भगवान् शंकर की दिशा मानी जाती है |इस दिशा का प्रतिनिधि ग्रह गुरु होता है जो कि बुद्धि,विद्या और धन-संपत्ति का कारक ग्रह माना जाता है |
(7)ईशान कोण में बनी रसोई ऐश्वर्य का नाश करती है |ईशान कोण में जल से भरा कलश अति-लाभप्रद होता है |रसोई के लिए उत्तम स्थान अग्निकोण (दक्षिण-पूर्व) होता है |इसलिए संभव हो अति शीघ्र ईशान कोण से रसोई को हटा लेना चाहिए |
(8)किसी भी खिड़की या दरवाजे की ओर पीठ करके बैठना भी दोषकारक होता है |यह स्थिति तब और भी नुक्सानदेह सिद्ध होती है जब इस स्थिति में व्यक्ति को रोजाना बैठना पड़ता है |इससे आपका अपने सहकर्मियों,पारिवारिक लोगों आदि से झगड़ा हो सकता है |आपके ऊपर किसी प्रकार का लांछन भी लग सकता है |आपको किसी से धोखा मिल सकता है |
(9)किसी भी कमरे का ईशान कोण खाली रखना चाहिए |इस कोण में मेज़,कुर्सी,अलमारी आदि नहीं रखें |इस कोण को खाली रखने से वस्तु के सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं |
(10)पलंग के नीचे लोहे का कबाड़ या किसी भी प्रकार की सामग्री रखना दोषकारक होता है |इससे धीरे-धीरे आपकी नींद पर बुरा प्रभाव पड़ता है और आप रोग-ग्रस्त हो जाते हैं |आपके विचार,आपका स्वास्थ्य और आपकी आर्थिक स्थिति पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है |
(11)घर की दक्षिण दिशा में कबाड़ रखना दोषपूर्ण होता है |यदि यह कबाड़ लोहे का हो महा -रोगकारक सिद्ध होता है |आपके अनेकों शत्रु भी बन सकते हैं |
(12)घर के दक्षिण में तुलसी के पौधे नहीं लगाने चाहिए |इससे शत्रुओं के साथ ही रोग भी पैदा होते हैं और मृत्यु-तुल्य कष्ट प्राप्त होता है |
(13)यदि घर की पूर्व दिशा में कूड़ा-करकट,पत्थर या अनुपयोगी सामन रखा हो तो यह घर के बच्चों के लिए नुकसानदायक होता है |उनकी उन्नति में बाधाएँ उत्पन्न हो जाती हैं और उनका समुचित विकास नहीं हो पाता |यही नहीं इससे आपकी आर्थिक स्थिति पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है |
(14)आपके शयन-कक्ष में मृत-पूर्वजों और ईश्वर के चित्र बुरा प्रभाव देते हैं |इन्हें उनके लिए नियत स्थान पर ही लगाएं |इससे आपके गृहस्थ जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है |
(15)शयनकक्ष में किसी भी प्रकार की ऐसी तस्वीर न लगाएँ जिसमे पानी दर्शाया गया हो |शयन-कक्ष में पानी से भरा कोई भी पात्र आपके संबंधों को नीरस बना देता है |यही नहीं,कालांतर में आपके संबंधों में दरार पैदा होकर नौबत तलाक तक आ सकती है |
(16)घर में किसी भी प्रकार की चढ़ने वाली बेल शत्रुओं को पैदा करती है |इसलिए ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार की बेल आपके घर को छूते हुए उस पर न चढ़ने पाए |
(17)आपके पलंग के ऊपर किसी भी प्रकार की बीम आदि नहीं होनी चाहिए |किसी भी प्रकार का झाड़-फानूस या कोई भी लटकने वाली वस्तु का पलंग के ठीक ऊपर होना स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है |
(18)सोते समय किसी भी दर्पण में आपके शरीर का कोई भी अंग नहीं दिखना चाहिए |यदि ऐसा है तो सोते समय उस दर्पण को किसी कपड़े आदि से ढँक देना चाहिए |
(19)घर में दर्पण हमेशा पूर्व,उत्तर या ईशान कोण में लगाएँ |कभी भी दर्पण को दक्षिण,पश्चिम या नैऋत्य कोण की तरफ आने वाली दीवार पर नहीं लगाएँ |दर्पण की तरह प्रभाव देने वाली सभी वस्तुओं पर भी यही बात लागू होती है |
(20)घर में कभी भी ऐसे चित्र ना लगाएँ जिनसे नकारात्मकता का सृजन होता हो |मसलन,रोते हुए लोगों के चित्र,भिखारियों,जंगली पशुओं,नुकीली आकृतियों की पेंटिग,गरीबी को दर्शाते चित्र,लड़ाई-झगड़े को दर्शाते चित्र,लड़ाई के लिए उकसाते चित्र(महाभारत का वह चित्र,जिसमे श्रीकृष्ण अर्जुन को रथ में बैठकर लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ),नटराज की मूर्ति या चित्र,एक ही पक्षी का चित्र,शिकार करते पशुओं के चित्र |इन सभी चित्रों को घर से तुरंत हटा देना चाहिए |इनके स्थान पर घर में सकारात्मकता का सृजन करने वाले चित्रों को लगाना चाहिए |
किसी भी प्रकार की वास्तु संबंधी अन्य जानकारी के लिए इस नंबर पर संपर्क करें - 7784882119

व्यवहारिक वास्तु - घर में इधर-उधर बिखरे पड़े जूते-चप्पल दुर्भाग्य को आमंत्रित करते हैं,इसलिए इन्हें उनके लिए नियत स्थान प...
05/02/2017

व्यवहारिक वास्तु - घर में इधर-उधर बिखरे पड़े जूते-चप्पल दुर्भाग्य को आमंत्रित करते हैं,इसलिए इन्हें उनके लिए नियत स्थान पर ही उतारकर रक्खें |इस बात का भी अवश्य ध्यान रक्खें कि अपने घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने भीतर या बाहर की ओर जूते-चप्पल न उतारें |बल्कि इन्हें द्वार के एक ओर द्वार से कुछ दूर हटकर उतारें |इन्हें कभी उल्टा न रखें,न ही दायाँ-बायाँ पलटकर रखें |इन्हें उसी अवस्था में रक्खें जिस प्रकार यह पहने जाते हैं |घर के मंदिर या किसी भी मंदिर आदि पवित्र स्थान में जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश नहीं करना चाहिए |अन्न आदि के भण्डार कक्ष में और रसोई में भी जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश न करें |इतना ही नहीं,तिजोरी से सामान निकालते या उसमे सामान रखते समय भी जूते आदि उतार दें |इस बात का ध्यान रखने से देवी लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है |

भूमि का शल्य संबंधी दोष-किसी भूमि में खुदाई के दौरान यदि हड्डी के टुकड़े,राख,जली हुई लकड़ी आदि निकलें तो उस दोष को दूर करन...
30/01/2017

भूमि का शल्य संबंधी दोष-किसी भूमि में खुदाई के दौरान यदि हड्डी के टुकड़े,राख,जली हुई लकड़ी आदि निकलें तो उस दोष को दूर करने का सबसे सरल उपाय है कि उस भूमि की 6 फुट गहराई तक की मिट्टी को खुदवाकर फेंकवा दें और उसकी जगह नई पीली मिट्टी को भरवा दें |यदि आप अंडरग्राउंड निर्माण कराना चाहते हैं तो आपको नई मिट्टी भी नहीं भरवानी पड़ेगी किन्तु दूषित मिट्टी का निष्कासन अत्यंत आवश्यक है |मिट्टी के परीक्षण और भूमि की स्थिति की सही जानकारी के लिए किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है |पूर्ण रूप में संतुष्ट होने के बाद ही भवन निर्माण का कार्य प्रारम्भ करना चाहिए |

नव-वर्ष 2017 की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई |
30/01/2017

नव-वर्ष 2017 की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई |

वास्तु का परिचय-वास्तुशास्त्र एक विस्तृत एवं गूढ़ विज्ञान है |जिस स्थान पर हम रहते हैं,उस स्थान की भूमि का विशेष महत्त्व ...
29/01/2017

वास्तु का परिचय-वास्तुशास्त्र एक विस्तृत एवं गूढ़ विज्ञान है |जिस स्थान पर हम रहते हैं,उस स्थान की भूमि का विशेष महत्त्व होता है |ठोस,बलुई एवं कूड़े वाली भूमि के आधार पर हम भवन के स्थायित्व की भविष्यवाणी भली प्रकार कर सकते हैं |पृथ्वी की गुरुत्व शक्ति,ब्रह्मांडीय चुम्बकीय शक्ति,पृथ्वी के ध्रुवों की चुम्बकीय तरंगों के प्रवाह,सूर्य की ऊर्जा एवं पञ्च-तत्वों के मध्य उचित एवं सकारात्मक तालमेल बिठाना ही वास्तु का मुख्य उद्देश्य होता है |एक निर्दोष वास्तु में इन सभी तत्वों के बीच बहुत ही सुंदर तालमेल पाया जाता है |
यहाँ यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि वास्तु का ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों की एक बहुत ही उत्कृष्ट देन है |उनके इस ज्ञान का उचित लाभ उठाकर हम अपने जीवन के साथ ही दूसरों के जीवन को भी बेहतर बना सकते हैं |हमारे पुराणों और कई धार्मिक ग्रन्थों में वास्तु के सन्दर्भ में विस्तृत चर्चा की गई है |यही नहीं,इन ग्रन्थों में वास्तु दोषों के निवारण के अत्यंत सटीक उपाय बताए गए हैं |जिनका प्रयोग करके हम भवन को किसी भी प्रकार की क्षति पहुँचाए बिना उसके वास्तु दोषों का निराकरण अत्यंत सरल एवं प्रभावी ढंग से कर सकते हैं |

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