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आज पोस्ट के माध्यम से आप जानेंगे कढ़ी पत्ता के पौधे को कैसे लगाये, देखभाल और इसके लाभ क्या क्या है। कढ़ी पत्ता रुतासी परिवार से संबंधित पेड़ है, जो की मूलतः भारत का देशज है और गर्म जलवायु में आसानी से पनपता है। पौधे का वैज्ञानिक नाम मुराया कोएनिजी है। इसे कढ़ी पत्ता, करी पत्ता और मीठी नीम की पत्तियां भी कहते है। पौधे को वास्तु अनुसार आग्नेय कोण में रखें।

★कैसे लगाये◆●
कढ़ी पत्ता के पौधे को तीनो विधि बीज, कलम और तैयार पौधा लेकर फरवरी से मार्च के महीने में लगाया जा सकता है। एक गमले में सारे जल निकासी के छिद्र को खोल कर इट के टुकड़े से ढक कर मिट्टी से भर लें और उसके अंदर स्वस्थ बीज डाल के 2 से 3 इंच मिट्टी से ढक दे। अब मिट्टी को भरपूर पानी देकर नमी बनाके रखें, लेकिन ध्यान रखें पानी की मात्रा ज्यादा नहीं होनी चाहिए। गमले को हर दिन कम से कम 6 घंटे तक धूप मिलने वाली जगह पर रखें। बीज का अंकुरण 7 से 8 दिन में हो जाता हैं।

★मिट्टी◆●
पौधा किसी भी मिट्टी में आसानी से वृद्धि कर सकता है। अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी पत्तियो के उपज के लिए अच्छी होती है। घर पर मिट्टी तैयार करने के लिए सुखी मिट्टी, सुखी गोबर खाद, रेत 3 भाग में, सरसो खली, नीम खली 5% की मात्रा में, फंगीसाइड एक साथ मिलाले। इसमें कुछ इट पत्थर के छोटे टुकड़े भी 10% की मात्रा में डालदे।

★पानी और प्रकाश◆●
कढ़ी पत्ता के पौधे की मिट्टी को कभी भी अधिक पानी न दें क्योंकि इसे ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन ध्यान रखें कि मिट्टी नम होनी चाहिए। कढ़ी पत्ते के पौधों को 6 से अधिक घंटे दिन की धूप जरूर दे।

★कढ़ी पत्ता की देखभाल◆●
कढ़ी पत्ता की देखभाल में जरूरी है समय समय पर मिट्टी की गुड़ाई, मिट्टी में नमी, सही मात्रा में सूर्य प्रकाश, उचित मात्रा में खाद। पौधे को बढ़वार के अनुसार 1 से 2 साल में फरवरी में रूट प्रुनिग कर मिट्टी में बदलाव करके सडी हुई गोबर की खाद के साथ रिपोट करें। साथ ही ऊपरी विकाश के अनुसार पौधे की समय समय पर साल में 2 बार कटाई छटाई फरवरी या अक्टूबर में करते रहना चाहिए। इससे पौधा तेजी से बढ़ता है। हरा भरा और घना रहता है।

★कढ़ी पत्ता से खुसबू नही आने पर◆●
पत्तों से खुशबू नहीं आने का सबसे बड़ा कारण पौधों का सही तरीके से ध्यान नहीं रखना है। अगर आप पौधे को लगातार खाद नहीं देंगे, केवल पानी ही डालते रहेंगे, तो पत्तियां अपनी खुशबू खो देती हैं। इसलिए अगर आप पौधे का ध्यान नहीं रखेंगे, तो इसमें न ही सुगंध होगी और न ही पकाने में इसका स्वाद आएगा।

★तेज वृद्धि के लिए खाद◆●
■ कढ़ी पत्ता में किसी कैमिल खाद का प्रयोग न करें। इससे विपरीत मौसम के पौधा जल्दी बीमार पड़ता है कई बार खराब भी हो जाता है।
■ छांछ को उपयोग 200 ml छाछ को 1 लीटर पानी में मिला कर 15 दिन में 1 बार पौधे के ऊपर स्प्रेय करे और जड़ में डाले।
■ चावल धोने के पानी को 15 दिन प्रिसर्व करके रखें। 15 दिन बाद 5 गुना पानी मिला कर महीने में 1 बार जड़ में डाले।
■ गोबर खाद का प्रयोग 2 महोने में 1 बार करें।
■ तेजी से बढाने के लिए अंडे के छिलके, एप्सम साल्ट, चाय पत्ती की खाद, केले के छिलके की खाद का समय समय पर महीने में एक बार प्रयोग करें।

★मिट्टी की गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण◆●
हप्ते में 1 बार पानी देने के 1 दिन पहले और पानी देने के 1 दिन बाद मिट्टी की गुड़ाई करे। कोई खरपतवार दिखे तो उसे समय रहते ही बाहर निकाल दे।

करी पत्ता के स्वास्थ्य लाभ◆●

कढ़ी पत्ता में भारी विशिष्ट गंध और तीखे स्वाद के अलावा विटामिन ए, बी, सी, बी12, कैल्शियम और आयरन प्रचुर मात्रा में होता हैं। प्राकृतिक रूप से आपकी प्रतिरक्षा को मजबूत करता है। कढ़ी पत्ते की तासीर ठंडी होती है जो पेट को ठंडक पहुंचाता है जिससे पाचन से जुड़ी कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। भोजन में कढ़ी पत्ता को शामिल करने से पेचिश, दस्त, मधुमेह, मॉर्निंग सिकनेस और मतली के उपचार में मदद करता है। करी पत्ता शरीर से विषाक्त पदार्थों और वसा की मात्रा को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके उपयोग से शरीर में मौजूद बैड कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने में मदद मिलती है।

1) कढ़ी पत्ता कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर कढ़ी पत्ता कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीकरण जिससे खराब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल पैदा होता है को रोकता हैं, यह अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाता है और एथेरोस्क्लेरोसिस और हृदय रोग से बचाता है।

2) करी पत्ते में दूध से 800% अधिक कैल्शियम होता है। गर्भवती, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के लिए उत्तम होता है।

3) कढ़ी पत्ता पाचन क्रिया को बढ़ाता है। जो पेट को अनावश्यक कचरे से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं।

4) लीवर के लिए कढ़ी पत्ता की पत्तियों में मौजूद टैनिन और विटामिन ए, विटामिन सी, एंटी-ऑक्सीडेटिव प्रोपर्टी अंग को प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए सक्रिय करती है।

5) कढ़ी पत्ता बालों के विकास को तेज करता है। क्षतिग्रस्त बालों के लिए, ढीले बालों के लिए, पतले बालो के लिए, झड़ते बालो के लिए इसके अलावा स्कैल्प के फफूंद संक्रमण, रूसी आदि के इलाज के लिए उपयोग किया जा सकता है।

6) कढ़ी पत्ता आंखों के स्वास्थ्य के लिए कैरोटीनॉयड युक्त विटामिन ए से भरपूर होता है, जिससे कॉर्निया को नुकसान होने की संभावना कम हो जाती है। इस प्रकार, पत्तियां रेटिना को सुरक्षित रखती हैं और दृष्टि हानि से बचाती हैं।

7) कढ़ी पत्ता कार्बाज़ोल अल्कलॉइड यौगिक जिनमें एंटीऑक्सिडेंट, जीवाणुरोधी और विरोधी गुण से भरपूर होते हैं जो बैक्टीरिया को खत्म करता है।

8) कढ़ी पत्ता वजन घटाने को बढ़ावा देता है। शरीर में जमा चर्बी को दूर करने के लिए एक बेहतरीन उपाय है।

9) कढ़ी पत्ता के सेवन से कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी का असर कम होता है और क्रोमोसोमल डैमेज और बोन मैरो प्रोटेक्शन से भी बचाव होता है।

10) रक्त संचार, मासिक धर्म के मुद्दों, सूजाक, दस्त को हल करने में मदद करता है। नियमित आहार में शामिल करने से दर्द को कम करता है।

11) कढ़ी पत्ता में मधुमेहरोधी गुण होते हैं। अपने आहार में करी पत्ते का उपयोग कर इन्सुलिन बनाने वाली अग्न्याशय कोशिकाओं को उत्तेजित और ढका जा सकता है।

12) कढ़ी पत्ता घावों के इलाज में मदद करता है। इसका पेस्ट लगाने से घाव, रैशेज, फोड़े-फुंसी और हल्की जलन पर उपचारात्मक प्रभाव पड़ता है। पत्तियों का पेस्ट किसी भी प्रकार के हानिकारक संक्रमण को रोकने और खत्म करने में भी मदद करता है।

★कैसे प्रयोग करें◆●
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और बीमारी पहुंचाने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। इसका सेवन हर व्यक्ति को प्रतिदिन करना जरूरी है। सुबह खाली पेट 7 से 8 पत्तियों को चबाने के बाद एक ग्लास पानी पी लेना चाहिए।

★कढ़ी पत्ता का फल◆●
कढ़ी पत्ता के बेरी को खाया जा सकता है या बीज निकालकर रस बनाया जा सकता है। ताज़ा पेय पदार्थ बनाने के लिए जूस का स्वतंत्र रूप से सेवन किया जा सकता है या अन्य फलों, मसालों और सामग्री के साथ मिलाया जा सकता है। इसके रस का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में टॉनिक के रूप में भी किया जाता है।

★★★विशेष नोट
यदि आपको अस्थमा है या एलर्जी है तो करी पत्ता खाने से बचें। संभव है कि लंबे समय तक बालों पर करी पत्ते का इस्तेमाल बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। करी पत्ता और बालों के तेल को एक साथ बार-बार लगाने से बचें। खाने योग्य होते हुए भी करी पत्ते की छोटी फलियाँ खाने से बचना चाहिए।

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