09/05/2026
दो साल पहले बंगाल की धरती पर जब हम कवि सम्मेलन में पहुँचे थे, तब मंच पर जाने से पहले ही हमें समझा दिया गया था
“हिंदुत्व पर कम बोलिए…“राष्ट्रवाद से बचिए…”
हमने मुस्कुराकर कहा था हम राष्ट्रभक्ति पर बोलेंगे, क्योंकि वही हमारी आत्मा है, और सोचा शाम को मंच पर सबको अपना बना लेंगे।
लेकिन पीड़ा तब हुई जब मंच पर Saurabh Jain जी को केवल कुछ ही मिनटों में रोक दिया गया…सिर्फ इसलिए कि उनकी कविता में हिंदुत्व की हुंकार थी, भारत माँ की वंदना थी, “वंदे मातरम्” की गूंज थी। उस दिन मन बहुत आहत हुआ था।
ऐसा लगा था जैसे अपनी ही भूमि पर अपनी ही संस्कृति, अपने ही राष्ट्रप्रेम को कहने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ रही हो।
लेकिन समय बदलता है…
और अब बंगाल की हवा बदल गई है आज वहीं से लगातार कवि सम्मेलनों के निमंत्रण आ रहे हैं।लोग खुलकर सुनना चाहते हैं
भारत माता की जय, वंदे मातरम्, सनातन, राम और कृष्ण की भूमि का गौरव। अब मंचों पर डर नहीं, स्वर गूंजेंगे, अब लोग वही सुनना चाहते हैं जो वर्षों से उनके हृदय में दबा हुआ था।
हृदय से धन्यवाद Narendra Modi जी Amit Shah जी MYogiAdityanath जी Suvendu Adhikari जी
जिनकी दृढ़ता ने देश के कोने-कोने में राष्ट्रभक्ति की आवाज़ को और मजबूत किया।
राम और कृष्ण की यह भूमि केवल मिट्टी नही,यह सनातन की चेतना है।
इसे दबाया नहीं जा सकता,क्योंकि जब-जब इसे रोकने की कोशिश हुई है,यह और प्रखर होकर उभरी है। 🇮🇳