20/07/2021
वास्तु भाग 8
मित्रों
मकान अथवा भवन के मुख्य दरवाजे के ऊपर पानी की टंकी ना रखें क्योंकि इससे बाहर से आने वाली ऊर्जा प्रभावित होती है, जिससे घर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं खड़ी हो सकती है। इससे हृदय संबंधी बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है उर्जा का संतुलन बनाए रखने के लिए पानी की टंकी को पश्चिम उत्तर पश्चिम कौण में रखें और टंकी की ऊंचाई दक्षिण एवं पश्चिम दीवार से कम रखें।
ऊर्जा का संबंध घर की छत की साफ सफाई से भी है घर की छत साफ करते रहे , छत पर चौखट फालतू सामान, उल्टा मटका, लकड़ी, लोहा, इंटे ,पत्थर ना रखें यह सब चीजें ऊर्जा को बाधित करती है ।
घर में स्वास्थ्य एवं आर्थिक संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है , घर के मुख्य द्वार पर बिजली का मीटर होने से भी अवरोध होती है ,इससे शुभ कार्य में बाधा आती है। बाहर से आने वाली सकारात्मक ऊर्जा के लिए मुख्य द्वार को साफ सुथरा बाधारहित रखें, मुख्य द्वार के सामने पेड़ या कोई खंबा या गड्ढा नहीं होना चाहिए ।
मुख्य द्वार के दोनों तरफ तुलसी के पौधे लगाए जा सकते हैं इससे यह वायुमंडल शुद्ध होता है क्योंकि इसमें पारे की मात्रा होती है।
मुख्य द्वार पर गणपति जी की मूर्ति लगाने चाहिए इसका मुंह घर के अंदर की तरफ लगाएं ,पीठ सड़क की तरफ लगाएं इससे धन की वृद्धि होती है सकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर बनी रहती है, गणपति जी को हर बुधवार मोदक के लड्डू का भोग लगाते रहे।
पानी भूलकर भी दक्षिणा दिशा में ना रखें कभी भी कपड़े बर्तन दक्षिण दिशा में ना धोया करें इससे घर की ऊर्जा असंतुलित होकर घर में अशांति और बीमारी लाती है। अधिकांश लोग सीढ़ियों के नीचे शौचालय बाथरूम बनवा देते हैं यह भी बड़ा दोष उत्पन्न करता है।
बिजली के मीटर वह मोटर आदि लगवा देते हैं इससे ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है, घर में अकारण अशांति का माहौल बन जाता है।
बाथरूम या शौचालय से अक्सर ही नकारात्मक ऊर्जा निकलती रहती है इसलिए इनका स्थान एकांत में होना चाहिए और घर के मध्य भाग में भी इनका निर्माण नहीं होना चाहिए, ब्रह्म स्थान की सकारात्मक ऊर्जा का ह्रास होता है।
धन्यवाद