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"बिल गेट्स ने समझाया कि उनकी बेटी गरीब आदमी से शादी क्यों नहीं कर सकती""कुछ साल पहले, मैं अमेरिका में निवेश और वित्त पर ...
21/12/2024

"बिल गेट्स ने समझाया कि उनकी बेटी गरीब आदमी से शादी क्यों नहीं कर सकती"

"कुछ साल पहले, मैं अमेरिका में निवेश और वित्त पर एक सम्मेलन में गया था। वक्ताओं में से एक बिल गेट्स थे। प्रश्न-उत्तर सत्र के दौरान, मैंने उनसे एक सवाल पूछा जिसने सभी को हंसा दिया।
मैंने पूछा: क्या वह, जो दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, अपनी बेटी की शादी किसी गरीब या साधारण आदमी से करने को तैयार होंगे?
उनके जवाब ने मेरी सोच को बदल दिया।

बिल गेट्स ने कहा:

पहले यह समझें कि धनवान होना केवल बैंक में ढेर सारे पैसे होना नहीं है।

धन सबसे पहले यह क्षमता है कि आप संपत्ति बना सकें।
उदाहरण के लिए: कोई व्यक्ति जो लॉटरी या भाग्य के खेल में 100 मिलियन डॉलर जीतता है, वह अमीर नहीं होता। वह एक गरीब व्यक्ति होता है जिसके पास बहुत सारा पैसा आ गया। यही कारण है कि 90% लॉटरी विजेता 5 साल बाद फिर से गरीब हो जाते हैं।

इसके विपरीत, ऐसे लोग भी हैं जो पैसे के बिना ही अमीर हैं।
उदाहरण के लिए, अधिकांश उद्यमी (entrepreneurs)।
वे पहले ही धन की ओर बढ़ने की यात्रा पर होते हैं, भले ही उनके पास पैसे न हों, क्योंकि वे अपनी वित्तीय बुद्धिमत्ता (financial intelligence) विकसित कर रहे हैं, और यही असली धन है।

अमीर और गरीब में क्या फर्क है?

सीधे शब्दों में कहें:

अमीर व्यक्ति अमीर बनने के लिए कड़ी मेहनत करने को तैयार होता है।

गरीब व्यक्ति अमीर बनने के लिए कुछ भी (यहां तक कि अपराध भी) करने को तैयार होता है।

अगर आप किसी युवा को देखते हैं जो सीखने, नई चीजों का अभ्यास करने, खुद को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करता है, तो जान लीजिए कि वह अमीर व्यक्ति है।
लेकिन अगर आप किसी ऐसे युवा को देखते हैं जो सरकार या दूसरों को अपनी समस्याओं के लिए दोषी ठहराता है, अमीर लोगों को चोर कहता है और केवल आलोचना करता है, तो वह गरीब व्यक्ति है।

अमीर लोग मानते हैं कि उन्हें बस जानकारी और प्रशिक्षण की जरूरत है।
गरीब लोग मानते हैं कि दूसरों को उन्हें पैसा देना चाहिए।

निष्कर्ष:
जब मैं कहता हूं कि मेरी बेटी किसी गरीब आदमी से शादी नहीं करेगी, तो मैं पैसों की बात नहीं करता।
मैं उस आदमी की संपत्ति बनाने की क्षमता की बात करता हूं।

मुझे माफ करें, लेकिन ज्यादातर अपराधी गरीब लोग होते हैं। जब वे पैसे के सामने आते हैं, तो वे अपना दिमाग खो बैठते हैं। यही कारण है कि वे चोरी और डकैती करते हैं।
उनके लिए यह अभिशाप है क्योंकि वे नहीं जानते कि वे अपने दम पर पैसे कैसे कमा सकते हैं।

एक कहानी:
एक दिन, एक बैंक के गार्ड को पैसों से भरा बैग मिला। उसने बैग उठाकर बैंक मैनेजर को लौटा दिया।
लोगों ने उसे मूर्ख कहा, लेकिन वास्तव में वह व्यक्ति एक अमीर आदमी था जिसके पास पैसा नहीं था।

1 साल बाद, बैंक ने उसे रिसेप्शनिस्ट की नौकरी दी।
3 साल बाद, वह ग्राहक प्रबंधक बन गया।
10 साल बाद, वह उस बैंक का क्षेत्रीय प्रबंधक बन गया, जहाँ वह सैकड़ों कर्मचारियों का नेतृत्व करता है।
आज उसके वार्षिक बोनस उस राशि से अधिक हैं, जिसे वह चुरा सकता था।

धन सबसे पहले एक मानसिकता है, मेरे दोस्त।"
डॉ. किंग हाउस

साभार सोशल मीडिया

21/12/2024

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15/12/2024

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17/05/2024
बक्सवाह जंगल बचाओक्योंकिप्राणवायु पेड़ो से मिलती हैं हीरो से नही--------वर्तमान समय में हम देख रहे है कि लाखों रुपये होने...
18/05/2021

बक्सवाह जंगल बचाओ
क्योंकि
प्राणवायु पेड़ो से मिलती हैं हीरो से नही
--------
वर्तमान समय में
हम देख रहे है कि लाखों रुपये होने के बावजूद भी इंसान ऑक्सीजन की कमी के कारण अपनी जान नही बचा पा रहा हैं... ऐसे में ये कुछ करोड़ो के हीरे हमारे लिए क्या मायने रखते होंगे...यह भली भांति समझ सकते है...।।
बस यही बात सरकारों को समझ मे जानी चाहिए...!!

मित्रों मध्यप्रदेश का एक जिला छतरपुर हैं... जहां अक्सर बारिश कम होती हैं.. जो जंगल हैं वहाँ भी लकड़ी माफियां सरकार की मोन स्वीकृति में प्रतिवर्ष हजारों पेड़ो को लील रहे है....।
जो काम जंगल माफिया नही कर पा रहे वो अब सरकार करने को तैयार हो आई एक साथ लाखो पेड़ो को काटना...!!

बक्सवाह तहसील के 382.131 हेक्टयर भूमि के जिस जंगल को काटे जाने की सरकार ने स्वीकृति दी हैं उसमें बताया हैं कि 2,15,875 पेड़ काटे जायेगे...।
आप समझ सकते है मित्रो की यह आंकड़ा कितना सही होगा..सरकार ने सिर्फ बड़े पेड़ो की गिनती की हैं उन झाड़ियों को,लताओं को,कंद -मूल ओर औषधीय गुणों से भरी वनस्पतियों का आंकलन कौन लगाएगा...जब पूरा देश कोविड की चपेट में है, शुगर के मरीजो कि अधिक जान गई हैं,, उन्ही मरीजो को ठीक करने वाली गुड़मार इन जंगलो में आसानी से मिल जाती हैं,, क्या इन सबका आंकलन नही होना चाहिए.....!!!

हमारा इतना सोचना भी काफी नही हैं क्योंकि जंगल मे सिर्फ पेड़ ही नही होते अपितु जंगली जीवो ओर कीट पतंग पक्षियों का एक संसार बसता हैं... उस संसार को उजड़ने से बचाना हैं...।।

सरकार जनता के साथ हो सकती हैं पर बिजनेस करने वाली कम्पनियां अक्सर मौका ढूंढती हैं... कोरोना महामारी के बीच वो इस मुद्दे को शीघ्र ही निपटाकर ,केंद्र से अनुमति लेने वाली हैं ताकि कोई बवंडर न हो ,ओर वे अपने उद्देश्य में सफल हो जाये...।
हम उनके इस उद्देश्य को कतई सफल नही होने देंगे....समाज का जनजागरण कर उनको बक्सवाह जंगल बचाने के लिए आगे लाएंगे...इस कार्य को में अकेला या 10-20लोग कर लेंगे यह बिल्कुल नही होगा...इसके लिए देश भर में अच्छे कार्यो को करने वाले मित्रो को आगे आना होगा...यह आंदोलन हम सबका हैं, इसकी जीत ओर हार हम सबकी हैं, यहां तक कि आने वाली पीढ़ियों की हैं...।

बहुत जल्दी हम इस जंगल को बचाने के लिए देश भर के पर्यावरण मित्र एक ठोस रणनीति के तहत कुछ कदम उठाने वाले है, जिसके बारे में आपको समय समय पर अवगत कराया जाएगा...।।

🙏🙏
निवेदक
समस्त प्रकृतिप्रेमी

कुछ जानकारी या आंदोलन को गति देने के लिए आपके पास कोई आइडिया हो तो मुझे इस नम्बर पर अवश्य अवगत कराएं...।।

भारतीय संस्कृति में  #वैशाख मास (इस वर्ष जो 27 अप्रैल से प्रारम्भ हो गया है )में पूरे महीने पीपल को पानी देने का विधान ह...
06/05/2021

भारतीय संस्कृति में #वैशाख मास (इस वर्ष जो 27 अप्रैल से प्रारम्भ हो गया है )
में पूरे महीने पीपल को पानी देने का विधान है क्योंकि इस मास में गर्मी सर्वाधिक होती है तथा इस महत्वपूर्ण जीवनदायी वृक्ष को बचना जरूरी है।
#पीपल का पेड़ भारतीय मूल का है और #प्राणवायु से लेकर लाख तक का दाता होने से देवता है। मानवीय चेतना में पहला देवता पेड़ को ही समझा गया और मानव ने प्रथमत: पेड़ के आगे अपना याचक रूप पेश किया। सिलोन, कंबोडिया से लेकर जावा, सुमात्रा तक इस वृक्ष के प्रति श्रद्धा लगभग डेढ़, दो हज़ार साल से है। यहां वहां बच्चा बच्चा जानता है कि यह पेड़ ज्ञान देता है, ध्यान देता है, वरदान देता है, सम्मान देता है।

ठेठ गंवई भाषा के भाव है :
पीपल पूजे परणैती भर भर मोत्यं थाल।
दु:ख, दोष, दोरमो, तीनू कानी टाल।।

पीपल का फैलना, फलना और फूलना सब शुभ है। पीपल #पर्यावरण का अंग है। इससे पर्यावरण है। इसकी लाख ने रंग दिया, महावर दिया, चूड़ियों की गोलाई से सपनों वाले सुहाग का संसार दिया। जब से नारी मन ने लाल और लाह को चाहा, पीपल ने उसकी कामना में रंग भरे। लाख ने लाखों की चपड़ी होकर अपने सीने पर मुहर लगवाई है।

यह बोधि वृक्ष है। विष्णु वृक्ष है। सर्वलोक में मंगलकारी वृक्ष है। #वृक्षायुर्वेद, सस्य वेद में पीपल की महिमा है। यह अश्वत्थ नाम से गीता, भागवत, ब्रह्म पुराण, स्मृतियों और बौद्ध, ब्राह्मण ग्रंथों में स्मरणीय है। कल्पलता विचार और वनस्पति जातक के रूप में इस वृक्ष की गतिविधियों का अध्ययन हुआ है। मैंने इसके लगभग तीन सौ संदर्भ देखें हैं। हालांकि अधिकांश परस्पर समान और सामान्य है।

पीपल को श्रीलंका आदि में ले जाकर #बोधिवृक्ष के रूप प्रचारित करने के प्रसंग को पारिजात, कल्पवृक्ष, कोविदार आदि के आख्यानों से जोड़कर देखना चाहिए। पेड़ पहले परस्पर लाए और लेे जाए जाते थे। लोग अपना काम करके लौट आते लेकिन पेड़ अपना काम करते रहते। दो हज़ार साल पहले ही लोग जान चुके थे कि पेड़ लगाने से उद्देश्य स्थाई और सफल होते हैं।

यह भी देखिए, लोक में पीपल देवी है। पीपल की भी देवी है पीपलाज माता। पिप्पलाद के आख्यान है। पीपल की अनेक लोक कथाएं हैं, लोक वार्ताएं हैं, लोकगीत हैं... इनको कहने, सुनने और पढ़ने, पढ़ाने से पुण्य से ज्यादा अन्न, धन, लाव लश्कर और राजपाट, वैभव होता है... और क्या चाहिए?
साभार: श्रीकृष्ण "जुगनू"

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12/02/2021

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10/02/2021

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09/02/2021

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07/02/2021

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06/02/2021

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