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28/06/2025
Refreshing old memory _😇💙"5th class_😎
23/10/2024

Refreshing old memory _😇
💙"5th class_😎

दोस्तों ये किस किस को याद है, जो कभी चलते फिरते हुए कहीं न कहीं मिल जाया करता था, जिसे हमने बचपन में सुना था कि इसको तार...
16/08/2024

दोस्तों ये किस किस को याद है, जो कभी चलते फिरते हुए कहीं न कहीं मिल जाया करता था, जिसे हमने बचपन में सुना था कि इसको तारे का टुकड़ा कहते है , कोई कहता था उल्का पिंड है, आप इसको क्या बोलते थे | _🤔 ""
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बदल जाते हैं लोग अजमाने से, जिंदगी जी लेते हैं, एक बहाने से राहें चुनते हैं, सही मंजिल की ओर फिर बदल जाती हैं, राहें ठोक...
03/05/2022

बदल जाते हैं लोग अजमाने से, जिंदगी जी लेते हैं, एक बहाने से राहें चुनते हैं, सही मंजिल की ओर फिर बदल जाती हैं, राहें ठोकरें खाने से_🖤🔥

आखिर इन प्रधानों की तारीफ कैसे ना करूं इन प्रधानों के लिए क्या अलग से पैसा आया है"🤔वर्तमान प्रधान साथीयों वर्तमान प्रधान...
03/09/2021

आखिर इन प्रधानों की तारीफ कैसे ना करूं
इन प्रधानों के लिए क्या अलग से पैसा आया है"🤔

वर्तमान प्रधान साथीयों वर्तमान प्रधानों के कार्यों को देखो ये भी आप लोगों के साथ के ही हैं और इनके लिए भी पैसा वही से आता है जहां से आप लोगों को... फर्क इतना है कि कोई पैसा धरातल पर लगाता है जो बार बार दिखता है और कोई अपने जेब में डालता है जो किसी को नहीं दिखता.!!!

भगत सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले भंगी का नाम बोघा था। भगत सिंह उसको बेबे (मां) कहकर बुलाते थे। जब कोई पूछता कि भगत...
03/09/2021

भगत सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले भंगी का नाम बोघा था। भगत सिंह उसको बेबे (मां) कहकर बुलाते थे। जब कोई पूछता कि भगत सिंह ये भंगी बोघा तेरी बेबे कैसे हुआ? तब भगत सिंह कहता, मेरा मल-मूत्र या तो मेरी बेबे ने उठाया, या इस भले पुरूष बोघे ने। बोघे में मैं अपनी बेबे (मां) देखता हूं। ये मेरी बेबे ही है।
यह कहकर भगत सिंह बोघे को अपनी बाहों में भर लेता।
भगत सिंह जी अक्सर बोघा से कहते, बेबे मैं तेरे हाथों की रोटी खाना चाहता हूँ। पर बोघा अपनी जाति को याद करके झिझक जाता और कहता, भगत सिंह तू ऊँची जात का सरदार, और मैं एक अदना सा भंगी, भगतां तू रहने दे, ज़िद न कर।
सरदार भगत सिंह भी अपनी ज़िद के पक्के थे, फांसी से कुछ दिन पहले जिद करके उन्होंने बोघे को कहा बेबे अब तो हम चंद दिन के मेहमान हैं, अब तो इच्छा पूरी कर दे!
बोघे की आँखों में आंसू बह चले। रोते-रोते उसने खुद अपने हाथों से उस वीर शहीद ए आजम के लिए रोटिया बनाई, और अपने हाथों से ही खिलाई। भगत सिह के मुंह में रोटी का गास डालते ही बोघे की रुलाई फूट पड़ी। ओए भगतां, ओए मेरे शेरा, धन्य है तेरी मां, जिसने तुझे जन्म दिया। भगत सिंह ने बोघे को अपनी बाहों में भर लिया।
ऐसी सोच के मालिक थे अपने वीर सरदार भगत सिंह जी...। परन्तु आजादी के 70 साल बाद भी हम समाज में व्याप्त ऊँच-नीच के भेद-भाव की भावना को दूर करने के लिये वो न कर पाए जो 88 साल पहले भगत सिंह ने किया।
महान शहीदे आजम को इस देश का सलाम।
इंकलाब जिंदाबाद 🇮🇳

  Om_  नम: Shivay_🙃Pic credit.
01/09/2021


Om_ नम: Shivay_🙃
Pic credit.

26/08/2021

Jai_Shankar '"❤️😍

07/06/2021

❤💕💕

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