23/01/2018
क्या आप जानते है सलखन के जीवाश्म के बारे में ?सलखन जीवाश्म पार्क में एलगल स्ट्रोमैटोलाइट्स नाम के जीवाश्म पाये जाते हैंजो कि पृथ्वी पर पाये जाने वाले प्राचीनतम जीवाश्मों की श्रेणी में आते हैं।इस प्रकार के जीवाश्मों का निर्माण आमतौर से नीलहरित शैवाल समूह के सूक्ष्मजीवों द्वारा कणों को आपस में जोड़ने के कारण होता है।
अमेरिका के यलोस्टोन पार्क के जीवाश्म अभी निर्माण की प्रक्रिया मे है फिर भी यलोस्टोन पार्क को अमेरिकी सरकार ने पर्यटन के नजरिए से इस कदर विकसित कर लिया है कि इससे सालाना करोड़ों डालर की कमाई की जा रही है जबकि सलखन का पार्क पुरी तरह परिपक्व है एवं 150 करोड़ वर्ष प्रचीन है।
सलखन जीवाश्म पार्क भूवैज्ञानिक समय माप के अनुसार प्रोटीरोजोइक काल से सम्बद्ध हैं।अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार सलखन जीवाश्म पार्क अमेरिका के यलोस्टोन जीवाश्म पार्क से काफी प्राचीन एवं क्षेत्रफल मे तीन गुना ज्यादा बढा है।
सलखन जीवाश्म पार्क कैमूर वन्यजीव क्षेत्र मे लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल मे फैला है जो राज्य वन विभाग के अधिकार क्षेत्र मे आता है।जीवाश्म पार्क का परिधि क्षेत्र 3.5 किलोमीटर है।
सलखन जीवाश्म पार्क के वन ऊष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन की श्रेणी के है।वन मे कुर्ची, सलाई,पलास,तेंदू,झिंगन,सिद्धा,खैर,धावडा,जंगली बांस,आंवला,धवई,हरसिंगार जैसी काष्ठीय वनस्पतियों की प्रजाति का बाहुल्य है।पार्क मे जीवाश्म आमतौर से चट्टानों पर छल्ले के आकार मे दिखते है
यहाँ के जीवाश्म के बारे में भूवैज्ञानिकों को पूर्व से ही पता था,लेकिन स्थानीय निवासियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी कोई जानकारी नही थी।पहली बार 23 अगस्त 2001 को हिन्दी दैनिक हिंदुस्तान में छपे एक लेख के माध्यम से इस जीवाश्म पार्क के विषय में स्थानीय लोगो को पता चला
अखबार मे छपे इस लेख को संज्ञान मे लेते हुऐ सोनभद्र जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी श्री भगवान शंकर ने इस जीवाश्म पार्क का8 अगस्त 2002 को विधिवत उद्धाटन किया।प्रारम्भिक कवायदों के क्रम मे पार्क के रास्ते बने और सुरक्षा की दृष्टि से कंटीले तारों से घेरेबंदी की गयी।
सलखन जीवाश्म पार्क मे 5 दिसम्बर 2002 को भूविज्ञान सम्बंधित एक अन्तराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो.एस कुमार के संयोजकत्व मे देश और विदेश के 42 भूवैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।
प्रो. एस कुमार के संयोजकत्व मे देश और विदेश के जो प्रो. है वो कनाडा के प्रो. HJ hoffman,अमेरिका के प्रो. Bruce Norman Runneger, Dr JR lion, Dr linda ,SM portar मुख्य थे।इस कार्यशाला मे वैज्ञानिकों से सिद्ध कर दिया कि यहाँ चट्टानों पर छल्लेदार आकृतियाँ जीवाश्म ही हैं।