08/05/2024
पौधो को पालने के लिए कुछ मूल भूत जरुरते होती है।
1. हवा, पानी, धूप, माध्यम, पोषक तत्व
2. कीड़े बीमारियों से सुरक्षा
अगर ये सभी अनुकूल है उनके लिए तो वो अपना सर्वोत्तम देते है। हर पौधे की जरूरत प्रजाति के अनुसार बदलती है और उनके कीड़े बीमारी भी बदल जाते है। उसी की अनुसार समझकर आपको उनका प्रबंध करना पड़ता है ताकि पौधा स्वस्थ्य रहे मस्त रहे ।
1. तेज, ठंडी या गर्म हवा से बचाने के उपाय मौसम के अनुसार बहुत आवश्यक है। कमजोर तने वाले पौधो को उचित सहारे की जरूरत भी होगी।
2. पानी सामान्य pH और EC (TDS) वाला हो । अत्यधिक TDS वाला पानी नहीं हो। क्लोरिन या सोडियम कार्बोनेट और बायकार्बोनेट बहुत ज्यादा नही हो। गमले की मिट्टी जरूरत से ज्यादा चिकनी लग रही हो। पानी उतरने में ज्यादा समय लग रहा है। या ऊपर एल्गी लग रही है। पौधे की पत्तियां पीली किनारे जले हुए हो तो ध्यान देने की जरूरत है। सिंचाई कब करना है, कितनी मात्रा में करना है भी बहुत महत्वपूर्ण है। कम पानी चाहने वाले पौधो को कम पानी दीजिए, अधिक पानी चाहने वालों को ज्यादा पानी चाहिए। लोग तुलसी को जल चढ़ा चढ़ा के ही खत्म कर देते है।
3. उचित धूप जरूरी है आवश्यकता अनुसार पौधे को ऐसे स्थान पर रखें जहां धूप मिले। छाया वाले पौधे छाया में हो। तेज धूप से बचाने के लिए छाया करें।
4. माध्यम बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छे माध्यम में जड़ों का विकास अच्छा होता है। पोषक तत्व आसानी से मिलते है। पानी का जमाव नही होता है। तो मिट्टी को ऐसा होना चाहिए जिसमे जड़ों का विकास अच्छा हो। चिकनी मिट्टी है तो रेत मिलाइए, रेतीली है तो चिकनी मिट्टी चाहिए, कंपोस्ट हो, उपचारित किया हुआ कोकोपीट हो सकता है जलधारण को बढ़ाने के लिए। अगर मिट्टी में जीवाणुओं की सक्रियता अच्छी है तो मिट्टी अच्छी रहेगी बस उसमे ऑर्गेनिक मैटर मिलाते रहिए।
5. पोषक तत्वों की कुल उपलब्धता माध्यम पर निर्भर करती है । एक ही माध्यम में एक पौधा बहुत अच्छा चलता है और दूसरा नही चलता है । उसका कारण पौधे की व्यक्तिगत जरूरतें है। हर पौधे की पोषण जरूरत अलग है और उसी के अनुरूप आपको पोषक तत्वों का प्रबंध करना होता है। एक ही नियम सभी पौधो पर लागू नहीं होता है। टमाटर की कैल्शियम जरूरत ज्यादा होती है, पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम और मैग्नेशियम, नाइट्रोजन की ज्यादा जरूरत होती है। गोभी में जिंक, बोरोन ज्यादा चाहिए। ऐसे ही बढ़वार के समय अलग तत्व चाहिए तो फूल आते समय अलग तत्व। ये आपको समझना होगा पौधा कब क्या मांग रहा है उसे तब वो पर्याप्त मिल रहा है अथवा नहीं।
6. इतना सबकुछ करने के बाद जिससे आपको चिंतित होने की जरूरत है वो है कीड़े और बीमारियां। आम तौर पर घरेलू बागवानी में दो तरह के कीड़े लगते है। एक पत्ती खाने वाले और दूसरे रस चूसने वाले । इनमे भी रस चूसने वाले कीड़ों का प्रभाव ज्यादा होता है। मिलीबग, माहू, मकड़ी मुख्य है वहीं 2 - 4 प्रकार की इल्लियां मुख्य है। खेत में लगने वाले कीड़ों की तरह कीड़े घरेलू बागवानी में नही मिलते है। इसके लिए कीड़े की पहचान करके ऑर्गेनिक या रासायनिक तरीके उपयोग में लिए जा सकते है। सब्जियों और फलों में कीड़े अलग होते है सही पहचान के बाद उनका नियंत्रण नही करने पर कुछ भी हाथ नही आता।
7. बीमारियां घरेलू बागवानी में लगने की संभावना खेत से ज्यादा होती है। इसलिए बीमारी को समझना और उसका नियंत्रण करना बहुत आवश्यक होता है बाकी पौधे के नष्ट होने में समय नहीं लगता है। पौधे के हर भाग में बीमारी हो सकती है फिर वो जड़ है, तना है, पत्ती है या फूल और फल कोई फर्क नही पड़ता । कई बार जड़ में बीमारी लगी होती है और इलाज हम पत्ती का कर रहे होते है क्योंकि लक्षण पत्ती पर दिख रहे होते है। बीमारी फूल में होती है और हम कंपोस्ट दे रहे होते है। ऐसे ही बीमारी होने का कारण जानना भी जरूरी है, बीमारी फफूंद से है, बैक्टीरिया से है, वायरस से है या माईको प्लाज्मा से है या इनमे से कोई नही होकर वो कोई फिजियोलॉजिकल डिसऑर्डर है या किसी पोषक तत्व की कमी का लक्षण है। जब तक आपको इसका ज्ञान नही होगा आप ना सही निदान कर पाएंगे और ना ही उसका उपचार कर पाएंगे।
8. ये सभी बाते समय के साथ अनुभव से आयेगी जितना आप पौधो के साथ रहेंगे उतना आप पौधो को पढ़ पाएंगे। आज 30 साल से ज्यादा के अनुभव के बाद में कह सकता हूं की मुझे 5 प्रतिशत भी नही पता है। तो कुछ पोस्ट पढ़कर आप विशेषज्ञ नही बन जायेंगे। लेकिन विशेषज्ञ बनने का तरीका आपको पता चल जायेगा की कितना आपको ज्ञान लेना है और कितना अनुभव।