Meera Nursery & Garden

Meera Nursery & Garden All kinds of fruit plants, ornamental, road side plants available here.

08/02/2026
08/02/2026
08/02/2026
08/02/2026

🔥 राजस्थान के दुर्ग: पत्थर नहीं, पराक्रम बोलता है 🔥

रेत, पहाड़ और समय—तीनों को चुनौती देते ये दुर्ग सिर्फ किले नहीं हैं,
ये हैं रणनीति, साहस और स्वाभिमान की जिंदा मिसाल।

🛡️ जैसलमेर – जहां रेगिस्तान भी प्रहरी बन जाता है
🛡️ मेहरानगढ़ – ऊँचाई से नहीं, हौसले से राज करता हुआ
🛡️ आमेर – शान, योजना और शक्ति का संगम
🛡️ कुंभलगढ़ – दीवारें इतनी लंबी, कि इतिहास भी थक जाए
🛡️ चित्तौड़गढ़ – जहां बलिदान ने अमरता पाई

👉 दुश्मन आए, घिरे…
पर राजस्थान कभी नहीं झुका।

“किले टूट सकते हैं,
पर रजवाड़ों का स्वाभिमान नहीं।” 🔥

08/02/2026
08/02/2026

"आपने एक अपराधी को अदालत में निर्दोष साबित कर दिया। लेकिन उसके गुनाहों से सारी दुनिया वाकिफ है। मैं ऐसे पेशे में नहीं रह सकता। मुझे नहीं जाना इंग्लैंड। नहीं करनी वकालत।" शायद ऐसा ही कुछ के.एन.सिंह जी ने उस वक्त अपने पिता से कहा होगा।

K.N.Singh ने लखनऊ से लैटिन विषय में सीनियर कैम्ब्रिज पास की थी। पिता चाहते थे कि इन्हें बैरिस्टर की पढ़ाई करने इंग्लैंड भेजा जाए। इसिलिए इन्हें लैटिन विषय दिलाया गया था।

लेकिन एक दिन K.N.Singh ने वकालत करने इंग्लैंड जाने से इन्कार कर दिया। और वो इसलिए क्योंकि इनके पिता ने एक खूंखार अपराधी को अदालत में निर्दोष साबित कर दिया था। उस घटना ने के.एन.सिंह जी को इतना निराश किया कि वकालत के पेशा उन्हें बेकार लगने लगा। कहा जाता है कि के.एन.सिंह के पिता ने जिस अपराधी को अदालत में शरीफ साबित किया था वो सुल्ताना डाकू था। उस दौर में सुल्ताना डाकू का वहां खौफ हुआ करता था।

ये भी दावा किया जाता है कि अदालत से बरी कराने के बाद के.एन.सिंह जी के पिता ने सुल्ताना डाकू को अपने घर में भी ठहराया था। लेकिन ये सब कही-सुनी बातें हैं। इनकी पुष्टि कभी नहीं हो सकी है। इसलिए आंख मूंदकर इन्हें सच समझना सही नहीं होगा। इन्हें फिलहाल अफवाह ही माना जाना चाहिए। चूंकि के.एन.सिंह स्पोर्ट्स में भी बहुत अच्छे थे तो 1936 के जर्मनी ओलंपिक्स में जैवलिन थ्रो व शॉटपुट प्रतियोगिता में उनका चयन लगभग हो ही चुका था।

मगर इसी दौरान उन्हें अपनी बहन की देखभाल के लिए कोलकाता जाना पड़ा। के.एन.सिंह की बहन की आंखों का ऑपरेशन हुआ था। जबकी उस वक्त उनके पति इंग्लैंड में थे। कोलकाता में ही के.एन.सिंह जी की मुलाकात पृथ्वीराज कपूर से हुई थी। पृथ्वीराज कपूर इनके पारिवारिक मित्र भी थे। पृथ्वीराज कपूर से हुई उस मुलाकात ने ही के.एन.सिंह के जीवन को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया।

हुआ कुछ यूं कि पृथ्वीराज कपूर के ज़रिए के.एन.सिंह की जान-पहचान देबकी बोस से हुई जो उस दौर में कलकत्ता फिल्म इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम हुआ करते थे। देबकी बोस फिल्म डायरेक्टर थे। जिन दिनों के.एन.सिंह से उनकी मुलाकात हुई थी उन्हीं दिनों वो "ईस्ट इंडिया फिल्म कंपनी" के बैनर तले "सुनहरा संसार" नामक एक फिल्म बना रहे थे। के.एन.सिंह की शख्सियत और बातचीत करने के उनके ढंग से देबकी बोस बहुत प्रभावित हुए। देबकी बोस ने के.एन.सिंह को सुनहरा संसार फिल्म में डॉक्टर के एक छोटे से रोल रोल के लिए साइन कर लिया।

साथियों आज के.एन. सिंह जी की पुण्यतिथि है। आज 26 साल हो गए हैं के.एन. सिंह जी को इस दुनिया से गए। 31 जनवरी 2000 को के.एन. सिंह जी का देहांत हुआ था। के.एन. सिंह जी को बहुत सम्मान से याद करते हुए क़िस्सा टीवी उन्हें नमन करता है। और फ़िल्म इंडस्ट्री में किए गए उनके योगदान के लिए, उन्हें सैल्यूट करता है। अभी बहुत कुछ है के.एन. सिंह जी के बारे में जानने के लिए। बहुत रोचक है इनकी आगे की कहानी। वो कहानी आपको इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में मौजूद एक लेख में मिल जाएगी। उसे अवश्य पढ़िएगा। इनकी कहानी आपको पसंद आएगी, गारंटी है।

07/02/2026
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