Sukhrani Nursery

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06/11/2020
23/09/2020

बाबा भक्त संवाद
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भक्त -- बाबा डाइबिटीज है
बाबा -- मिठाई कब से नहीं खाई ?
भक्त -- छोड़ दिया,बाबा
बाबा -- फिर से खाओ ,कृपा आयेगी

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भक्त -- बाबा ,नौकरी नहीं मिली
बाबा -- मुली कब से नहीं खाई
भक्त -- कभी कभी खा लेता हूं
बाबा -- यह मै मुली क्यों देख रहा हूं ,तुम रोज कई बार खाओ ,कृपा आयेगी ।
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भक्त --- बाबा, घरवाली के बच्चा नहीं होता
बाबा -- ( तांत्रिक बाबा) -- एक पशु बलि देवी मांगती है । जाओ ले आओ ।बच्चा होगा।
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न जाने कितने किस्से हैं ये तो बानगी भर हैं। दुनिया के हर मजहब,संप्रदाय में मिलते हैं। अनेक चमत्कारी बाबा ,फकीर से दुनिया भरी पड़ी है।
कोरोना ने फिलहाल सबके धंधे बंद करा रखे हैं । प्रकृति , ईश्वर,अल्लाह, गॉड कुछ कहो क्या इनको , इन चमत्कार पैदा करने वालों को आपके भगवान मानेंगे ? कदापि नहीं।
आप भी ऐसी भक्ति से तो बचेंगे जरूर। जो पहले ना समझ थे, सीधे सरल थे ,ठग लिए जाते थे - वे भी अब जागरूक हो गए । वे भी अब ऐसे बाबाओं,आचार्यों मुल्लों की बात न मानेंगे । महामारी ने तो दुनिया की आंखे खोल दी है।

अब विज्ञानमय धर्म और धर्ममय विज्ञान का युग आ गया।

आचार्य श्री होरी

#आचार्यश्रीहोरी

13/09/2020

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बुद्धि, ज्ञान,विज्ञान ,धर्म,दर्शन का आश्रम

विज्ञानमय धर्म की राह |बुद्धि,कर्म,ज्ञान मार्ग धर्म,दर्शन

08/09/2020
08/09/2020

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धार्मिक,आध्यात्मिक चिंतन के लिये रहें सम्पर्क में | एक लाइक कर के |

बुद्धि,कर्म,ज्ञान,विज्ञान मार्ग चलें?

25/08/2020

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बुद्धि,कर्म,ज्ञान,विज्ञान मार्ग चलें?

23/08/2020

दीप शिखा ध्यान
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विश्व के विभिन्न धर्मों,संप्रदायों ,दार्शनिक मतों,आश्रमों में ध्यान पर अपने अपने विचार,मत और रीतियां हैं । योग दर्शन के अष्टांग योग में ध्यान ,धारणा ,समाधि का महत्वपूर्ण स्थान है। बुद्ध का विपश्यना ध्यान विश्व प्रसिद्ध है जो बौद्ध धम्म मानने वालों के लिए बुद्ध की परम देन है। आज भी श्री श्री रविशंकर हों या आचार्य रजनीश या रामदेव या और भी अनेक योग्य मनीषी ,आचार्य सब के यहां ध्यान की पद्धतियां हैं ।
ध्यान धार्मिक ,दार्शनिक तो है ही वैज्ञानिक भी है । दुनिया में अनेकों शोध हो चुके हैं जिनमें ध्यान के शारीरिक और मानसिक लाभ सिद्ध हुए हैं । अधिकांश रोग ,बीमारियां psychosomatic हैं। यहां तक शरीर की विभिन्न क्रियाएं मस्तिष्क से संचालित होती हैं और हार्मोनल परिवर्तन में मस्तिष्क का भारी योगदान रहता है।
आपकी भावनाएं,संवेदनाएं शरीर की विभिन्न प्रणालियों को पूरी तरह प्रभावित करती हैं। आप तनाव में हैं तो भूख का न लगना क्या है ?? शवासन यौगिक क्रियाओं का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह भी विश्राम की मुद्रा में ध्यान है ।
बौद्धिक आश्रम वैज्ञानिक दृष्टि के अनुरूप ही धर्म ,दर्शन की रीतियों को आगे बढ़ाता है ,इसलिए यहां पर ध्यान के लिए " दीप शिखा ध्यान" नाम से रीति,प्रक्रिया निर्धारित है। अयिए यह क्या है ,क्यों है ,कैसे है ??? पर चर्चा करें ।
प्रश्न ---- दीपशिखा ध्यान क्या है ?
उत्तर --- यह एक ध्यान क्रिया है जिसको एक प्रज्ज्वलित दीप के साथ करते हैं । कम से कम 7 फीट की दूरी पर एक जलता हुआ दीप रखते हैं ।दीप मिट्टी का बना हो ।और उसमें घी का प्रयोग हो ,किसी तेल का प्रयोग वर्जित है। दीप के सामने बैठ कर लौ (दीप शिखा) को ध्यान से पूर्ण एकाग्र हो कर देखना आरंभ करते हैं । शिखा को देखते देखते कभी कभी आंखें बंद कर लौ ( शिखा) को मन के अंदर देखते हैं । इस तरह की क्रिया के बाद आंख बंद होने की स्थिति में भी मन कीआंखो के सामने , प्रज्ञा चक्षु में दीप की शिखा दिखती है। जिस पर ध्यान लगातार लगाए रखना है। एक समय पूर्ण ध्यान की स्थिति आएगी।
प्रश्न --- दीप शिखा ध्यान क्यों ??
उत्तर --- अग्नि जो सूर्य की भी ऊर्जा है और प्रकाश के साथ ऊष्मा (heat) देती है मानव ही नहीं बल्कि समस्त जीवों के लिए जीवन है ,यहां तक कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त है और जीव,अजीव, चर, अचर, मृत जीवित, तत्व, अणु,परमाणु सबको किसी न किसी रूप में संचालित, योजित करती है। दीप शिखा से प्रकाश साधक के पास तरंगों में पहुंचता है । मन के तम को हरता है ।आपके अंतस में दीप प्रज्ज्वलित करने की क्रिया आरंभ करता है। ध्यान की उच्चतम स्थिति और बिंदु दीप शिखा ध्यान से साधक को मिलता है।

प्रश्न --- दीप शिखा ध्यान कैसे करें ?

उत्तर --- इसे व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों तरह से करना है ।घर में सायं कोई भी घर का सदस्य इस तरह ध्यान कर सकता है । एक दीप में ही परिवार के सारे सदस्य एक साथ ध्यान कर सकते हैं । यह ध्यान बैठ कर किया जाता है। वस्त्र और आसन साफ और आरामदायक हो। समय 7 मिनट से अपनी स्थिति अनुसार कितनी भी देर कर सकते हैं । पूर्ण प्रक्रिया आश्रम में एक बार आकर व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से सीख कर ही करें उचित होगा।

इस ध्यान से साधक उत्कृष्ट स्थिति में पहुंच कर शारीरिक,मानसिक,आध्यात्मिक,वैज्ञानिक लाभ प्राप्त करता है ।

आचार्य श्री होरी
बौद्धिक आश्रम, सोहरामऊ उन्नाव
धरसनिया,बाराबंकी


#आचार्यश्रीहोरी

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